Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
मत्ती 22:1 मत्ती 22:2 मत्ती 22:3 मत्ती 22:4 मत्ती 22:5 मत्ती 22:6 मत्ती 22:7 मत्ती 22:8 मत्ती 22:9 मत्ती 22:10 मत्ती 22:11 मत्ती 22:12 मत्ती 22:13 मत्ती 22:14 मत्ती 22:15 मत्ती 22:16 मत्ती 22:17 मत्ती 22:18 मत्ती 22:19 मत्ती 22:20 मत्ती 22:21 मत्ती 22:22 मत्ती 22:23 मत्ती 22:24 मत्ती 22:25 मत्ती 22:26 मत्ती 22:27 मत्ती 22:28 मत्ती 22:29 मत्ती 22:30 मत्ती 22:31 मत्ती 22:32 मत्ती 22:33 मत्ती 22:34 मत्ती 22:35 मत्ती 22:36 मत्ती 22:37 मत्ती 22:38 मत्ती 22:39 मत्ती 22:40 मत्ती 22:41 मत्ती 22:42 मत्ती 22:43 मत्ती 22:44 मत्ती 22:45 मत्ती 22:46



मत्ती 22:23—उस दिन सदूकी जिन्होंने मरे हुओं के पुनरुत्थान को नहीं माना
पद का ऐठन यह है कि उसी दिन यीशुदेव के सामने दो समूह एक साथ उभरते हैं: सदूकी, जो मरे हुओं के पुनरुत्थान को नहीं मानते, और फरीसी, जो परमेश्वर के राज्य के लिए नियमों में बंधे रहते हैं। उनका प्रश्न यीशु से यह होता है कि लौटकर पुनरुत्थान के बारे में क्या सच माना जाए, ताकि वे अपनी धारणा को मज़बूत कर सकें। इस वातावरण में यीशु दर्शाते हैं कि परमेश्वर का राज्य वर्तमान जीवन से आगे की वास्तविकता है और उसकी व्यवस्था उसी क्रम में चलती है जिसमें प्रेम और सत्य टिके रहते हैं।
पवनित पाठ से भगवान की प्रवृत्ति और विश्वास की शिक्षा
इस पाठ में God की सत्ता और जीवन के नियम स्पष्ट होते हैं। यीशु ने पुरानी क़ानून की परंपराओं के भीतर न बचकर, परमेश्वर के आत्मिक राज्य की दिशा दिखाई। वह बतलाते हैं कि परमेश्वर एक है जो मृतकों से भी पहले जीवन के बारे में सोचता है, यानी पुनरुत्थान की आशा उसके सामने इतनी वास्तविक है जितनी कि वर्तमान जीवन की व्यवस्था। इससे पता चलता है कि ईमानदार विश्वास में सत्य-जीवन की धारणा, न कि केवल नियमों की पद्धति, जीवन के लिए निर्णायक है।
महत्वपूर्ण शब्दों और imagery की स्पष्टता
अन्य प्रासंगिक आयतें (संक्षेप में) और उनके सम्बन्ध
यहाँ तीन cross-रेफरेंसेस हैं जो मूल विचार को मजबूत करते हैं:
विश्लेषण: ईमान और दृष्टिकोण
इस उद्धरण में यीशु मानवीय प्रश्नों के माध्यम से परमेश्वर के राज्य की गहराई दिखाते हैं—जो बातें सामान्य नियमों से परे हैं। वे सदूकी और उनके प्रश्न के पीछे की प्रवृत्ति को देखते हैं, और कहते हैं कि परमेश्वर का मालिकाना नियम वहाँ भी है जहाँ जीवन की सामान्य सीमा समाप्त होती है। इसलिए विश्वास का वास्तविक माप यह नहीं कि कौन-कौन से नियम याद आएं, बल्कि यह कि जीवन के अंत में परमेश्वर के प्रेम और सत्ता के साथ हमारा सम्बन्ध क्या है।
आज के लिए अनुप्रयोग
संदर्भ कुटुंब: यह पाठ Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक डोमेन टिप्पणी-प्रेरित सार से प्रेरित नहीं है, पर उनके विचारों के समाकलन से एक संतुलित निष्कर्ष निकलता है कि पुनरुत्थान और परमेश्वर के राज्य का सत्य व्यक्ति-जीवन के भीतर कैसे आकार लेता है।
उद्धरण: नीचे दिए गए तत्वों में से अगर आपके पाठ-स्रोत में स्पष्ट उद्धरण मिलें, तो उन्हें संक्षेप में यहाँ शामिल किया जा सकता है, परंतु पूर्ण पाठ नहीं दोहराया गया है।