Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
मत्ती 22:1 मत्ती 22:2 मत्ती 22:3 मत्ती 22:4 मत्ती 22:5 मत्ती 22:6 मत्ती 22:7 मत्ती 22:8 मत्ती 22:9 मत्ती 22:10 मत्ती 22:11 मत्ती 22:12 मत्ती 22:13 मत्ती 22:14 मत्ती 22:15 मत्ती 22:16 मत्ती 22:17 मत्ती 22:18 मत्ती 22:19 मत्ती 22:20 मत्ती 22:21 मत्ती 22:22 मत्ती 22:23 मत्ती 22:24 मत्ती 22:25 मत्ती 22:26 मत्ती 22:27 मत्ती 22:28 मत्ती 22:29 मत्ती 22:30 मत्ती 22:31 मत्ती 22:32 मत्ती 22:33 मत्ती 22:34 मत्ती 22:35 मत्ती 22:36 मत्ती 22:37 मत्ती 22:38 मत्ती 22:39 मत्ती 22:40 मत्ती 22:41 मत्ती 22:42 मत्ती 22:43 मत्ती 22:44 मत्ती 22:45 मत्ती 22:46



पाठ का संक्षेप एवं संदर्भ
यह प्रश्न मत्ती 22:36 में एक गुरु-स्तर के प्रश्नकर्ता से आता है, जो यीशु से पूछता है कि “विधि में कौन सी आज्ञा बड़ी है?” निजी धार्मिक नेता अपनी आस्था की परक साफ़ कर रहे थे: क्या गुरु-दायित्वों में उच्चतम बात प्रेम है या किसी विशिष्ट कानून की कसौटी? यीशु ने एक सीधे-सीधे, संपूर्ण उत्तर की उम्मीद के बजाय, एक दो-तरफ़ा मार्ग दिखाया: पहले प्रेम के पहले सच्चे दायित्व की ओर इशारा, फिर कानून और नबी-उद्धरणों की गहराई के साथ उसे जोड़ा।
पद का पाठ - महाराष्ट्रिक दृश्य
पद स्पष्ट करता है: “हे गुरु, व्यवस्था में कौन सी आज्ञा बड़ी है?” इसमें यह बताने की चाबियाँ छिपी हैं— व्यवस्था का सार प्रेम है जो परमेश्वर और पड़ोसी के प्रति समग्रता से उभरती है।
घटना-परिप्रेक्ष्य और मुख्य शिक्षा
इस संदर्भ में पवित्र शास्त्र के पं案, जो परमेश्वर के प्रेम और पड़ोसी के प्रति प्रेम को आधार बनाते हैं, यीशु द्वारा एक सबसे ऊँचे स्तर पर रखे जाते हैं। प्रेम ही वह धागा है जो सभी օրենքों और भविष्यवाणियों को एक सूत्र में पिरो देता है; प्रेम के बिना अन्य बाहरी आचरण केवल ढाँचा बनकर रह जाते हैं। यीशु ने नीति-नियमों की क्रमबद्धता से आगे बढ़कर दोनें प्रमुख कमरों—परिस्थिति-परक कानून और निष्ठापूर्ण आस्था—को एक साथ बाँध दिया।
तुलनात्मक दृष्टिकोण — अन्य बाइबिल दार्शनिक शब्द
- मंथन में सामाजिक कानून और नैतिकता के प्रति प्रेरणा का केंद्रीय विषय प्रेम है; पुराने नियम में भी प्रेम का पाठ प्रमुख है, जैसे कि वृद्ध मसीहों के लेखन और दासत्व से मुक्ति के संदेशों में।
महत्वपूर्ण पाठ से निष्कर्ष
मुख्य शिक्षा यह है कि ईश्वर के साथ एक निष्ठावान प्रेम और पड़ोसी के लिए वास्तविक सम्मान एक साथ आने चाहिए। यह एक ऐसी प्रतिबद्धता है जो धार्मिक कर्मकांड को भी प्रेरित करती है, और उसे जीवन के व्यवहार के साथ मिलाती है।
2-3 crosses और संक्षिप्त व्यাখ्या
संक्षेप में, प्रेम परमेश्वर की today समस्त व्यवस्था का सार है; जिसे निभाने से सारे नियम पूरे हो जाते हैं।
व्यावहारिक अनुप्रयोग
सारांश
मत्ती 22:36 में यीशु ने एक सरल पर गूढ़ शिक्षण दिया: ईश्वर के प्रेम के प्रेमी बनो—पहला प्रेम परमेश्वर के लिए और दूसरा प्रेम तुम्हारे पड़ोस के लिए। यह प्रेम ही पूरे धर्मशास्त्र का मंगल सूत्र है और जीवन के हर क्षेत्र में मार्गदर्शक बनता है।
हिंदी टिप्पणीकारों के उल्लेख
इस संदेश को समझने में पुराने publiques-डायरेक्शनल टिप्पणीकारों का प्रेरणा-संदेश मददगार है, जैसे मैथ्यू हेनरी, एल्बर्ट बार्न्स और ऐडम क्लार्क।