Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
मत्ती 22:1 मत्ती 22:2 मत्ती 22:3 मत्ती 22:4 मत्ती 22:5 मत्ती 22:6 मत्ती 22:7 मत्ती 22:8 मत्ती 22:9 मत्ती 22:10 मत्ती 22:11 मत्ती 22:12 मत्ती 22:13 मत्ती 22:14 मत्ती 22:15 मत्ती 22:16 मत्ती 22:17 मत्ती 22:18 मत्ती 22:19 मत्ती 22:20 मत्ती 22:21 मत्ती 22:22 मत्ती 22:23 मत्ती 22:24 मत्ती 22:25 मत्ती 22:26 मत्ती 22:27 मत्ती 22:28 मत्ती 22:29 मत्ती 22:30 मत्ती 22:31 मत्ती 22:32 मत्ती 22:33 मत्ती 22:34 मत्ती 22:35 मत्ती 22:36 मत्ती 22:37 मत्ती 22:38 मत्ती 22:39 मत्ती 22:40 मत्ती 22:41 मत्ती 22:42 मत्ती 22:43 मत्ती 22:44 मत्ती 22:45 मत्ती 22:46
मत्ती 22:27 पर टिप्पणी (HINIRV)
पद का पूरा संदर्भ: “सब के बाद वह स्त्री भी मर गई।” इस कथा का भाग उन प्रश्नों से जुड़ा है जहाँ यीशु ने विवाह-विवाह के नियमों और पुनर्जन्म/जीवन के बाद के दायित्वों के बारे में तीर्थ-प्रश्नों का उत्तर दिया। इस वाक्य में भाषा सरल है, पर इसका अर्थ गहरा है: प्रेम, संबंध और न्याय की स्थायित्व पर दृष्टिकोण उजागर होता है।
केंद्रीय अर्थ
यह पंक्ति एक जालसाजी-प्रश्न के बाद की कथावस्तु का हिस्सा है जिसमें यीशु ने जीवित जीवों की वापसी या पुनर्जन्म पर आधारित एक प्रश लिये। स्त्री का अंत एक व्यावहारिक परिणाम बताता है: विवाह-प्रतिष्ठा के कानून समाज में प्राण-प्रकृति के अनुरूप नहीं टिक पाते, पर प्रेम और कर्तव्य के अध्यायों में परमेश्वर का राज्य स्थिर रहता है। यह उद्धृत पैराग्राफ विवाह-सम्बन्धों के सामाजिक नियमों की सीमाओं को उजागर करते हुए जीवित जीवन की वास्तविकताओं पर विचार कराता है।
मुख्य विषय
दो-तीन महत्वपूर्ण थीम
संदर्भ-पठन (Cross-references)
व्यावहारिक प्रतिबिंब
हमारे आधुनिक जीवन में भी नियम और दायित्व समाज-निर्मित संरचनाओं के भीतर रहते हैं। परमेश्वर के राज्य में, प्रेम, न्याय और दया का संतुलन बनना चाहिए। यह पद हमें यह याद दिलाता है कि बाहरी व्यवस्थाओं के बावजूद जीवन की वास्तविक महता और व्यक्तियों के अस्तित्व की गरिमा सर्वोपरि है। कभी-कभी कर्तव्य और सामाजिक अपेक्षाओं के बीच समझौते की जगह आती है, पर परमेश्वर की इच्छा सेguided विवेक ही मार्गदर्शक बनता है।
संक्षिप्त सार
मत्ती 22:27 में यह संकेत मिलता है कि विवाह-नियम के सामाजिक ढांचे के भीतर जीवन के व्यापक प्रश्नों की गहराई है। यीशु की शिक्षाओं में परमेश्वर का राज्य उन संरचनाओं से ऊपर उठकर मानव जीवन की वास्तविक गरिमा और उद्धार के मार्ग को उद्घाटित करता है।
महत्वपूर्ण उद्धरण (public-domain commentators)
Adam Clarke, Matthew Henry और Albert Barnes के समानार्थी विचारों से संयुक्त निष्कर्ष: विवाह-नियम सामाजिक मान्यताओं के प्रतिनिधित्व हैं, पर अंतिम उत्तर उद्धार के उद्देश्य और परमेश्वर के राज्य की वास्तविकताओं में पाया जाता है। अगर किसी उद्धरण की स्पष्ट पंक्ति दी जाए, तो नीचे दिया जाएगा, पर यहां सार यह है कि- इन शिक्षकों ने व्यवहारिक अनुप्रयोगों में चेतावनी दी है कि बाहरी नियमों के पार भी जीवन की गहराई है।
यहां उपलब्ध संदर्भ प्रतिबिंबित हैं और इन विचारों को समन्वित करते हुए हमने एक एकीकृत व्याख्या प्रस्तुत की है, ताकि पाठक को verse के मूल संदेश की स्पष्ट समझ मिले।