Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
मत्ती 22:1 मत्ती 22:2 मत्ती 22:3 मत्ती 22:4 मत्ती 22:5 मत्ती 22:6 मत्ती 22:7 मत्ती 22:8 मत्ती 22:9 मत्ती 22:10 मत्ती 22:11 मत्ती 22:12 मत्ती 22:13 मत्ती 22:14 मत्ती 22:15 मत्ती 22:16 मत्ती 22:17 मत्ती 22:18 मत्ती 22:19 मत्ती 22:20 मत्ती 22:21 मत्ती 22:22 मत्ती 22:23 मत्ती 22:24 मत्ती 22:25 मत्ती 22:26 मत्ती 22:27 मत्ती 22:28 मत्ती 22:29 मत्ती 22:30 मत्ती 22:31 मत्ती 22:32 मत्ती 22:33 मत्ती 22:34 मत्ती 22:35 मत्ती 22:36 मत्ती 22:37 मत्ती 22:38 मत्ती 22:39 मत्ती 22:40 मत्ती 22:41 मत्ती 22:42 मत्ती 22:43 मत्ती 22:44 मत्ती 22:45 मत्ती 22:46



संदर्भ और संक्षिप्त व्याख्या
मत्ती 22:8 यीशु के अनुपम उपदेश—विवाहीय भोज की दृष्टान्त—के बीच स्थित है। यहाँ द्रष्टान्त में राजा ने अपना पुत्र का विवाह संपन्न करने के लिए भोज तैयार किया, पर जब आमंत्रित अतिथि “योग्य न ठहरे” तो उसने अपने दासों को निर्देश दिया। यह पद कथा के उस बिंदु को बताता है जहाँ आमंत्रित लोगों की अस्वीकृति और उसका परिणाम प्रकट होता है।
केंद्रीय अर्थ
मुख्य रूप से यह वचन उस निराशा और आध्यात्मिक अस्वीकृति को दिखाता है जब परमेश्वर का निमंत्रण अनादर या उपेक्षा से टाला जाता है। राजा का भोज परमेश्वर की उस महिमा एवं उद्धार की मेज़ को प्रतीकात्मक रूप से दर्शाता है। “योग्य न ठहरे” यह बताता है कि जो पादरी, नेता या समाजिक निमंत्रण के पात्र थे, वे उस निमंत्रण के अनुरूप जीवन नहीं जी पाए या उसे अस्वीकार कर बैठे। परमेश्वर का अवसर सीमित नहीं, परन्तु बुलाने वालों की प्रतिक्रिया का परिणाम अवश्य दिखाई देता है।
मुख्य विषय
संबंधित पद और उनका संक्षिप्ते अर्थ
लूका 14:16–24 — यहाँ भी दासों द्वारा आमंत्रितों की अस्वीकार्यता का वर्णन है और राजा अजनबियों को बुलाता है; मत्ती का रेखांकन समान शिक्षा देता है।
मत्ती 21:43 — राष्ट्रीय रूप से अनादर के कारण राज्य की प्रतिलिपि अन्य लोगों को दी जाएगी; यह पद उसी विषय को पुनः पुष्टि करता है कि अनुचित उत्तरों के आध्यात्मिक परिणाम होते हैं।
इब्रानियों 4:1–3 — परमेश्वर के विश्राम के प्रवेश के लिये चेतावनी; निमंत्रण को टालना वास्तविक अवसर से वंचित कर सकता है।
व्यावहारिक चिंतन
यदि यह कथा आज के जीवन पर लागू की जाए तो प्रश्न उठते हैं: क्या मैंने परमेश्वर के निमंत्रण का सम्मान किया है? क्या मेरा व्यवहार मेरे दावा के अनुरूप है? निमंत्रण का तात्पर्य केवल एक क्षणिक अवसर नहीं, बल्कि जीवन-शैली से संबंधित जवाबदेही है। अपने प्रतिदिन के निर्णयों में सच्चाई और श्रद्धा दिखाकर हम “योग्य” ठहरने का प्रयास कर सकते हैं।
पुराने टिप्पणीकारों से संक्षिप्त उद्धरण
मैथ्यू हेनरी ने लिखा है: "The feast was ready, but they were not worthy" — यह परमेश्वर के भोज के प्रति अनुपस्थिति और अयोग्यता पर अंगुली उठाता है।
अल्बर्ट बार्न्स ने संकेत किया कि यह पद उन नेताओं की विफलता को दर्शाता है जो बुलाये गये परन्तु जवाब नहीं दे सके।
संक्षेप में
मत्ती 22:8 हमें सावधान करता है कि परमेश्वर का आमंत्रण केवल शब्द नहीं, बल्कि जीवन का आह्वान है। जिसका उत्तर नकारात्मक होगा, उसके लिए परिणाम स्पष्ट हैं। परन्तु वही निमंत्रण खुला भी है—बहुतायत में दासों को भेजकर अन्य लोगों को बुलाया जाता है—इससे यह भी प्रकट होता है कि परमेश्वर का प्रेम और अवसर व्यापक है, परन्तु वह अपने राज्य की शुद्धि और प्रतिष्ठा भी बनाए रखता है।