मत्ती 22:31 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

परन्तु मरे हुओं के जी उठने के विषय में क्या तुम ने यह वचन नहीं पढ़ा जो परमेश्‍वर ने तुम से कहा:

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मत्ती 22:31 पद-दर-पद बाइबल टीका

मत्ती 22:31 के संदर्भ में स्पष्टता

इस पद में यीशु परमेश्वर के पक्ष में उठने वाले जीवन के बारे में विद्वत्तापूर्ण प्रश्नों के सामने एक उत्तर देते हैं। संदर्भ में फरीसियों की एक दलील है कि मरने के बाद जीवन नहीं रहता, पर यीशु उनसे फिर उजागर करते हैं कि परमेश्वर अपने उद्धार के योजनात्मक कथन में जीवित सत्ता बना हुआ है। मत्ती 22:31-32 में यीशु यह बताते हैं कि परमेश्वर ने अब्राहम, याकूब और इसहाक से “आदि काल से जीव” होने वाला वादा किया है—यह वही परमेश्वर है जो संसार के पुरातन नियमों के उद्धारक के रूप में जीवित है।

केन्द्रीय अर्थ

येशु का उद्देश्य यह स्पष्ट करना है कि परमेश्वर जीवित परमेश्वर है, न कि केवल इतिहास में स्मरणीय। उद्धार के उद्देश्य में जीवन का आश्वासन है— मरने के पश्चात भी लोग परमेश्वर के साथ सत्ता-जीवन में रहते हैं। यह प्रमाणस्वरूप वह प्रेरित करता है कि परमेश्वर के वचन में जीवन-सत्ता है और यह सत्य है कि ईश्वर के साथ संबंध मृत्यु के बाद भी बना रहता है।

तीन प्रमुख विषय

  • जीवन का पुनर्जन्म: परमेश्वर के संबंध से जुड़ा जीवन मृत्यु के बाद भी जारी रहता है, क्योंकि वह जीवित परमेश्वर है।
  • वादा बनाम परंपरा: धार्मिक प्रवृत्तियाँ अक्सर मरने के बाद जीवन को अस्वीकार करती हैं, पर यीशु शास्त्र के तात्पर्य को परमेश्वर के साक्ष्य से पुष्ट करते हैं।
  • परमेश्वर की पहचान: यह पंक्ति परमेश्वर को “जो तुम से कहा” के रूप में प्रस्तुत करती है—वह वही है जो अब्राहम को भी जीवित पिता के रूप में मानते हैं।

क्रांतिक cross-reference (संक्षेप)

- मरकु 12:26-27: मरकुस में यही विचार दोहराया गया है कि परमेश्वर जीवित है और मरने के बाद जीवन है; यह विश्वास यीशु के उत्तर का आधार बनता है।

- लूका 20:37-38: पवित्र शास्त्रों के अनुसार जीवन-जीवन्त परमेश्वर है, जिनके साथ जीवित संबंध रहता है, भले ही समय बदल जाए।

- एब्राहम 11:16: आते समय वे अभी भी परमेश्वर के नगर के भागीदार बनना चाहते हैं, जो जीवन का निवास स्थान है।

व्यावहारिक विचार

1) विश्वास में दृष्टि बनाए रखें: यह वचन हमें याद दिलाता है कि हमारी आशा इस पृथ्वी के आगे भी है; मृत्यु के डर पर हाला कि यीशु में नयी जीवन-गति है।

2) परमेश्वर की सच्चाई पर टिकें: जीवन की प्रशंसा और परमेश्वर के वचनों की पुष्टि में संतुष्टि मिलती है, भले ही मानक दुनिया में मृत्यु के बारे में धारणाएं अलग हों।

3) जीवन की नई दृष्टि: मरने के बाद जीवन के वादे से हमारी आज की नैतिकता और सेवकाने का दायित्व बढ़ता है—परमेश्वर के साथ सत्य के मार्ग में चलना, न कि आत्म-विश्वास से परे।

संक्षिप्त समापन

येशु का यह उत्तर दर्शाता है कि परमेश्वर जीवित है और उसका वचन जीवन के वास्तविक स्रोत हैं। मरने के बाद जीवन की धारणा, पूर्वकथित धार्मिक विचारों से परे, यीशु के श्रम और वादों के अनुसार प्रमाणित होती है। वह ही वह परमेश्वर है जो जन्म, मृत्यु और जीवन की परिधि को पार कर के हमें जीवित संबंध देता है।

कथनात्मक संदर्भ और उद्धरण

नीचे उद्धरण केवल संदर्भ के लिए हैं और पूर्ण पाठ नहीं हैं; इन्हें मूल पद के साथ रखने का प्रयोजन संकेत देता है कि कैसे पूर्व-वार्तालापें इस निष्कर्ष तक पहुँचती हैं।

Matthew Henry (सार): “परमेश्वर जीवित है; वह हमारा रक्षक—हमारे पिता—और उद्धारकर्ता है।”

Albert Barnes (सार): “मरने के बाद जीवन की गवाही परमेश्वर के प्रत्यक्ष ज्ञान से मिलती है।”

Adam Clarke (सार): “जो बातें शास्त्र में जीवन-जीवन्त परमेश्वर के साथ संबद्ध हैं, वे इतिहास से नहीं, वरन् साक्ष्य से प्रमाणित होती हैं।”

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

मत्ती 22:31 समानांतर पद और संबंधित वचन

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उसने उनसे कहा, “क्या तुम ने नहीं पढ़ा, कि दाऊद ने, जब वह और उसके साथी भूखे हुए तो क्या किया?

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और उससे कहने लगे, “क्या तू सुनता है कि ये क्या कहते हैं?” यीशु ने उनसे कहा, “हाँ; क्या तुम ने यह कभी नहीं पढ़ा: ‘बालकों और दूध पीते बच्चों के मुँह से तूने स्तुति सिद्ध कराई?’”

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इसलिए तुम जाकर इसका अर्थ सीख लो, कि मैं बलिदान नहीं परन्तु दया चाहता हूँ; क्योंकि मैं धर्मियों को नहीं परन्तु पापियों को बुलाने आया हूँ।” (होशे 6:6)

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