Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
मत्ती 22:1 मत्ती 22:2 मत्ती 22:3 मत्ती 22:4 मत्ती 22:5 मत्ती 22:6 मत्ती 22:7 मत्ती 22:8 मत्ती 22:9 मत्ती 22:10 मत्ती 22:11 मत्ती 22:12 मत्ती 22:13 मत्ती 22:14 मत्ती 22:15 मत्ती 22:16 मत्ती 22:17 मत्ती 22:18 मत्ती 22:19 मत्ती 22:20 मत्ती 22:21 मत्ती 22:22 मत्ती 22:23 मत्ती 22:24 मत्ती 22:25 मत्ती 22:26 मत्ती 22:27 मत्ती 22:28 मत्ती 22:29 मत्ती 22:30 मत्ती 22:31 मत्ती 22:32 मत्ती 22:33 मत्ती 22:34 मत्ती 22:35 मत्ती 22:36 मत्ती 22:37 मत्ती 22:38 मत्ती 22:39 मत्ती 22:40 मत्ती 22:41 मत्ती 22:42 मत्ती 22:43 मत्ती 22:44 मत्ती 22:45 मत्ती 22:46



मत्ति 22:45 का अर्थ
सीधे शब्दों में कहें, यहाँ प्रभु के बारे में दाऊद के बयान से उद्धरण उठाते हुए यह सिखाया गया है कि किस तरह दाऊद ने कहा, “प्रभु कहता है” और यह बताते हैं कि मसीह के ऊपर दाऊद की सत्ता नहीं, बल्कि प्रभु की महिमा और आत्मीयता का लाभ स्पष्ट होता है। इसे सीधे तौर पर समझें: जब दाऊद उसे प्रभु कहता है, तो भला वह उसका पुत्र कैसे ठहरा?
प्रसंगिक पृष्ठभूमि
यह पद मत्ती 22 का संदर्भ है, जहाँ यीशु की शिक्षाओं की उस क्रमical में फरीसियों की चुनौती चलती है। शास्त्रों के भीतर दाऊद का संदर्भ एक विशेष रूप से महिमा और ऋण-स्वीकृति का संकेत देता है, कि परमेश्वर ने दाऊद के घराने से मसीह को जन्म दिया—परन्तु मसीह वही प्रभु हैं जिन्हें दाऊद ने अपने परम उद्धारकर्ता के रूप में पहचाना।
व्याख्यात्मक अवलोकन
संक्षिप्त विषय-वस्तु
अनुकल्पित चिंतन (Cross-reference)
1) यशयाह 9:6-7: मसीह के दिव्यता और शांति का वर्णन, जो दाऊद के घराने से उत्तराधिकार में आता है। यह दिखाता है कि प्रभु के प्रति भक्ति अंततः परमेश्वर की राजसी भूमिका में है।
2) मत्ती 1:1-17: दाऊद के घराने से यीशु के जन्म का दायरा स्थापित करता है, ताकि यह दिखे कि वह दाऊद की विरासत को पूरा करते हैं।
3) मत्ती 28:18-20: यीशु के स्वामित्व, सत्ता और शासन-प्रभाव की व्यापकता; यह दर्शाता है कि न केवल जन्म, बल्कि बंधन और मार्गदर्शन भी प्रभु के हाथ में है।
संक्षिप्त निष्कर्ष
यह वाक्य हमें सिखाता है कि मसीह मानव-वंश पर जन्म लेकर भी परमेश्वर के प्रभुत्व के साथ भूमिका निभाते हैं। दाऊद के वक्तव्य में प्रभु होने की आस्था, यीशु के क्रूस-विध्वंस से भी पहले एक स्पष्ट संकेत है कि मसीह की महिमा और आदर beiden गुंजेगी। यह न केवल यीशु की ईश्वर-प्रतिष्ठा का प्रमाण है, बल्कि हमारे विश्वास के केंद्र में भी उनके दिव्य-मानव दोनों स्वरूप की संतुलित समझ रखती है।
अर्थ: यीशु के दाऊद के घराने से होना एक महत्त्वपूर्ण तथ्य है, परन्तु वह प्रभु भी हैं—जो इतिहास और भविष्य दोनों की पूर्णता को धारण करते हैं। यही कारण है कि उनके ऊपर विश्वास करना हमारी सर्वोच्च श्रद्धा है, क्योंकि वही हमारा उद्धारकर्ता हैं और सर्वशक्तिमान के साथ हमारे साथ रहते हैं।
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यह पंक्ति Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के संकलन में उद्धृत विचारों के केंद्र में है; पाठक कृपया ध्यान दें कि पूर्ण पाठ किसी एक के नहीं, बल्कि समकालीन टिप्पणी के संयुक्त निष्कर्षों पर आधारित है।