Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
रोमियों 1:1 रोमियों 1:2 रोमियों 1:3 रोमियों 1:4 रोमियों 1:5 रोमियों 1:6 रोमियों 1:7 रोमियों 1:8 रोमियों 1:9 रोमियों 1:10 रोमियों 1:11 रोमियों 1:12 रोमियों 1:13 रोमियों 1:14 रोमियों 1:15 रोमियों 1:16 रोमियों 1:17 रोमियों 1:18 रोमियों 1:19 रोमियों 1:20 रोमियों 1:21 रोमियों 1:22 रोमियों 1:23 रोमियों 1:24 रोमियों 1:25 रोमियों 1:26 रोमियों 1:27 रोमियों 1:28 रोमियों 1:29 रोमियों 1:30 रोमियों 1:31 रोमियों 1:32



रोमियों 1:3 पर केंद्रित धार्मिक टिप्पणी
मुख्य interpretive बिंदु: रोमियों 1:3 में बुद्धिमत्ता से कहा गया है कि यीशु मसीह सर्वशक्तिमान परमेश्वर के पुत्र राजा-तलों पर निर्भर प्रतिज्ञाओं की पूर्णता हैं—जो शरीर के भाव से दाऊद के वंश से उत्पन्न होकर इस संसार में आये। यह वाक्य यीशु के मानव-जातीय इतिहास और उसकी divine purpose को एक साथ जोड़ता है: मसीह पृथ्वी पर मानव कहलाने के अनुभव से आते हैं, ताकि उद्धार का कार्य और परमादेश की वस्तु पूर्ण हो सके।
साहित्यिक संदर्भ और पृष्ठभूमि
प्रथम अध्याय में प्रकाशित होने के कारण पवित्रशास्त्र के लेखक पॉल यीशु मसीह के जीवन-चरित्र को दाऊदी वंशावली के संदर्भ में प्रस्तुत करते हैं। यहाँ “अपने पुत्र … जो शरीर के भाव से दाऊद के वंश से उत्पन्न हुआ” शाब्दिक रूप से प्रभु यीशु के मानवीय विरासत को दर्शाता है, जबकि उसका परमात्म्य पूर्ण रूप से बना रहता है। यह संयोजन दिखाता है कि यीशु एकदम वही अनुभव देता है जो मानवता के बीच न्याय-प्रयोजन के लिए आवश्यक था।
थियोलिकल Significance ( theological significance )
- उद्धार के इतिहास में यीशु का दाऊदी वंश से आना यह दर्शाता है कि परमेश्वर ने पुरानी प्रतिज्ञाओं को संदर्शित किया है और उन्हें पूरा किया है।
- “बाबू-शरीर” (शरीर के भाव) के माध्यम से यीशु उस स्थान तक पहुँचते हैं जहाँ हम पहुंचे हैं—यानी मानवीय स्थितियों, कष्टों और अवसरों के भीतर। फिर भी वह पवित्रता और परमेश्वरत्व के साथ जीवन जीते हैं।
पवित्रशास्त्रीय संबंध (Cross-references)
संक्षेप में ये सभी cross-refs मसीह की दोहरी प्रकृति—मानव और दिव्य—की पुष्टि करते हैं, जो उद्धार के लिए आवश्यक भागीदारी को दर्शाती हैं।
वाचन-चिंतन के लिए प्रश्न
संक्षिप्त निष्कर्ष
रोमियों 1:3 मसीह की जीवन-यात्रा को एक ऐसी परिपूर्ण प्रतिज्ञा के रूप में बाँधता है जो पुरानी कहानियों से शुरू होकर नई उम्मीद में परिणत होती है। यीशु मानवता के बीच आये, दाऊद के वंश से जन्म लिया, ताकि परमेश्वर की वचन-प्रतिज्ञा पूरी हो और उद्धारपूर्ण मिशन पूरे विश्व के लिए खुल जाए।
उद्धरण उद्धरण: इस पाठ के विश्लेषण में मॉडर्न-जनित commentary से प्रेरित विश्लेषण में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के शब्दों के संक्षिप्त मिलान को नीचे उल्लेखित किया गया है:
— Matthew Henry: “जो शरीर के भाव से दाऊद के वंश से उत्पन्न हुआ”—यह पंक्ति यीशु के मानव-वंश का स्पष्ट संकेत है।
— Albert Barnes: यीशु की मानव-जातीयता वह कड़ी है जिसने प्रतिज्ञाओं को पूरा किया, ताकि उद्धार universal हो सके।
— Adam Clarke: यीशु के जन्म का यह विवरण परमेश्वर के वचनों के साथ मेल खाता है और मसीह के दो-तरफा प्रकृति को स्थापित करता है।