रोमियों 1:17 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

क्योंकि उसमें परमेश्‍वर की धार्मिकता विश्वास से और विश्वास के लिये प्रगट होती है; जैसा लिखा है, “विश्वास से धर्मी जन जीवित रहेगा।” (हब. 2:4, गला. 3:11)

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रोमियों 1:17 पद-दर-पद बाइबल टीका

रोमियों 1:17 पर नज़र: परमेश्वर की धार्मिकता विश्वास से प्रगट होती है

परमेश्वर की धार्मिकता का अर्थ यह नहीं कि वह कठोर नियमों के अनुसार केवल उसे मान्यता देता है जो परिश्रम से पूर्ण हों; बल्कि यह उसके उद्धारक क्रिया के परिणामस्वरूप विश्वास के द्वारा प्रकट होती है। इस पद में प्रेरित पॉल बताते हैं कि उद्धार की ज्योति कैसे प्रकट होती है—विश्वास से, पहले विश्वास और बाद में। यह वही सिद्धांत है जिसे पुराने प्रयोग में हृदय में “विश्वास से धर्मी जन जीवित रहेगा” के रूप में अभिव्यक्त किया गया है।

पद का संदर्भ- अध्याय के भीतर

रोमियों की पत्री 1 अध्याय के अंत में यह कथन आता है ताकि पाठक समझ सके कि पाप के गढ़े हुए संसार में भी परमेश्वर की धार्मिकता—उसकी नेक कार्य और उद्धार के योजना का परिणाम—विश्वास के द्वारा प्रकट होती है। यह उद्घोष न केवल कौन-सा मार्ग है, बल्कि यह भी दिखाता है कि परमेश्वर अबूझ नियमों से नहीं, विश्वास-पर आधारित संबंध से सम्मानित करता है।

मुख्य आध्यात्मिक शिक्षा

  • धर्मिता परमेश्वर के bounty के माध्यम से विश्वास में आकर बनती है, न कि प्रयास मात्र से।
  • विश्वास की स्थिरता और उसका उद्देश्य कृपा-आधारित संबंध है, जिससे जीवित जीवन मिलता है।

अन्य बाइबल पाठ से तुलना

– हबक्कुक 2:4 में लिखा है कि “विश्वास के लिये धर्मी जीवित रहेगा”—यह वही धुरी है जो रोमियों 1:17 को पुष्ट करती है।

– गलातियों 3:11 में कहा गया है कि “धर्म के द्वारा नहीं, पर विश्वास के द्वारा ही मनुष्य धर्मी ठहरता है”; इससे स्पष्ट होता है कि विश्वास का स्थान नियम के बराबर नहीं, बल्कि उसके ऊपर है।

विश्लेषण और अनुप्रयोग

इस verse में हम देखते हैं कि धार्मिकता “विश्वास से” प्रगट होती है—यानी परमेश्वर के उद्धार-कार्य पर भरोसा करने से जिसे वह हमारे लिए पूरा कर चुका है। यह विश्वास न सिर्फ आरम्भ है, बल्कि जीवन के हर दिन की दिशा है। Kristu के साथ सम्बन्ध में ईमानदार विश्वास से ही जीवित जीवन प्रवेश करता है।

कुछ उपयोगी क्रॉस-रेफरेंसेस

– रोमियों 3:22-24: विश्वास के द्वारा धर्मी बनना, न कि कानून के अनुसार।

– रोम Romans 4:5: विश्वास से भगवान ध्रुव-धर्मी बनाते हैं, कानून से नहीं।

इन संदर्भों से यह स्पष्ट होता है कि प्राचीन-विश्वास की धारा भी यह कहती है कि मानवीय प्रयास से नहीं, बल्कि परमेश्वर की कृपा और विश्वास से ही धर्मी ठहरता है।

सारावश्यक निष्कर्ष

रोमियों 1:17 विश्वसनीय-विश्वास की सारघटना प्रस्तुत करता है: धर्मी वही है जो भगवान की धार्मिकता को विश्वास के द्वारा अनुभव कर के जीवन-शब्दों में जीवित बनाता है। यह न केवल उद्धार की शुरुआत है, बल्कि हर दिन के जीवन का मार्ग भी है—विश्वास सक्रिय, जीने योग्य और जीवन को नया बनाता है।

संक्षेप

हमारी धार्मिकता कौन-सी है? वह जो परमेश्वर की धार्मिकता पर विश्वास से पाई जाती है—विश्वास के काम से नहीं, बल्कि विश्वास के साथ生命 के हर क्षेत्र में प्रगट होती है। यह वही संदेश है जो हबक्कुक और गलातियों के साथ संगति बनाता है: धर्मी葡र केवल विश्वास से जीते हैं।

याद रहे: पूरा उद्देश्य है—विश्वास के द्वारा प्राप्त किये गए नव-जीवन का अनुभव करना और उसे दैनिक व्यवहार में दर्शाना।

टिप्पणी सूत्र (संक्षेप): आशय के आधार पर Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के विचारों में वे समान बिंदु मिलते हैं—विश्वास के द्वारा धर्म-सिद्धि की प्राप्ति, न कि कर्म-केन्द्रित नियमों से; परन्तु उनके शब्द सीधे उद्धृत नहीं हैं यहाँ, केवल समाहित सार रूप में प्रस्तुत किया गया है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

रोमियों 1:17 समानांतर पद और संबंधित वचन

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हबक्कूक 2:4 (HINIRV) »
देख, उसका मन फूला हुआ है, उसका मन सीधा नहीं है; परन्तु धर्मी अपने विश्वास के द्वारा जीवित रहेगा। (इब्रा. 10:37-38, 2 पत. 3:9, रोम. 1:17, गला. 3:11)

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गलातियों 3:11 (HINIRV) »
पर यह बात प्रगट है, कि व्यवस्था के द्वारा परमेश्‍वर के यहाँ कोई धर्मी नहीं ठहरता क्योंकि धर्मी जन विश्वास से जीवित रहेगा।

फिलिप्पियों 3:9 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
फिलिप्पियों 3:9 (HINIRV) »
और उसमें पाया जाऊँ; न कि अपनी उस धार्मिकता के साथ, जो व्यवस्था से है, वरन् उस धार्मिकता के साथ जो मसीह पर विश्वास करने के कारण है, और परमेश्‍वर की ओर से विश्वास करने पर मिलती है,

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