Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
रोमियों 1:1 रोमियों 1:2 रोमियों 1:3 रोमियों 1:4 रोमियों 1:5 रोमियों 1:6 रोमियों 1:7 रोमियों 1:8 रोमियों 1:9 रोमियों 1:10 रोमियों 1:11 रोमियों 1:12 रोमियों 1:13 रोमियों 1:14 रोमियों 1:15 रोमियों 1:16 रोमियों 1:17 रोमियों 1:18 रोमियों 1:19 रोमियों 1:20 रोमियों 1:21 रोमियों 1:22 रोमियों 1:23 रोमियों 1:24 रोमियों 1:25 रोमियों 1:26 रोमियों 1:27 रोमियों 1:28 रोमियों 1:29 रोमियों 1:30 रोमियों 1:31 रोमियों 1:32



तात्कालिक संदर्भ — कहाँ बैठता है यह पद्यांश?
रोमियों 1:4 पौलुस के परिचयात्मक वचनों का हिस्सा है, जहाँ वह अपने स्वयं के संदेश और मिशन की पहचान कर रहा है। पिछले पद्यों में उसने यीशु मसीह की मानवता, वंश और दास्य के संदर्भ बताए; यहाँ वह मसीह की दिव्यता और उठने के कारण पर प्रकाश डालता है। यह वाक्य विशेषकर यीशु के मरे हुए से जीवित उठने को परमेश्वर द्वारा प्रमाणित की गई महान शक्ति के रूप में प्रस्तुत करता है।
परमेश्वर और विश्वास के बारे में क्या प्रकट होता है?
यह वचन बताता है कि मसीह की उत्थान शक्ति न केवल ऐतिहासिक घटना थी, बल्कि परमेश्वर ने यही शक्ति द्वारा अपने पुत्र की दिव्य पदवी घोषित की। "सामर्थ्य के साथ" यह संकेत देता है कि परमेश्वर की शक्तिमत्ता ने मसीह को न सिर्फ जीवन लौटाया बल्कि उसे "परमेश्वर का पुत्र" के रूप में औपचारिक रूप से मान्यता दी। विश्वास के लिए निहित संदेश यह है कि मृतकों में से जीवित होना पाप और मृत्यु पर परमेश्वर की निर्णायक विजय का प्रतीक है—हमारा भरोसा उसी जीवित मसीह पर लगाया जाता है जो इतिहास में वास्तविक शक्ति द्वारा प्रमाणित हुआ।
मुख्य शब्द और छवियों की व्याख्या
“पवित्रता की आत्मा के भाव से” — यह अभिव्यक्ति पवित्र आत्मा के कार्य को इंगित करती है, जो जीवन देने वाला है और उत्थान में सक्रिय था। यह दर्शाता है कि उत्थान मनुष्यों की बुद्धि या प्राकृतिक कारणों का परिणाम नहीं, बल्कि पवित्र आत्मा की दिव्य क्रिया थी।
“मरे हुओं में से जी उठना” — शाब्दिक घटना और अंतिम सत्य दोनों को समेटता है: यह ऐतिहासिक उत्थान है और साथ ही भविष्य के अंतिम उत्थान की आड़ भी लाता है। मसीह का उत्थान विश्वासियों के लिए आशा का आधार है।
“सामर्थ्य के साथ” — यह स्वर शब्द परमेश्वर की निर्णायक शक्ति पर ज़ोर देता है; यह शक्ति न्याय, जीवन और राजकीय अधिकार के संकेत के रूप में काम आई।
संबंधी विधाओं के साथ तुलना
छोटी उद्धरणीय नोट्स — पारंपरिक टिप्पणीकार
मैथ्यू हेनरी ने लिखा है: "His resurrection proved him to be the Son of God" (संक्षेप उद्धरण)। अल्बर्ट बार्न्स ने इस पद्यांश पर ध्यान देते हुए कहा कि उठना परमेश्वर की ओर से एक सार्वजनिक घोषणा थी। यह छोटे उद्धरण उनके सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणियों के सार से लिए गए हैं।
आधुनिक जीवन हेतु अनुप्रयोग
यह पद्यांश हमें याद दिलाता है कि हमारे विश्वास का आधार एक जीते हुए मसीह है, न कि केवल नैतिक आदर्श या स्मरणीय शिक्षाएँ। पवित्र आत्मा वही शक्ति है जो आशा, परिवर्तन और नवीनीकरण लाती है—व्यक्तिगत जीवन में कमजोरियों, अस्थिरताओं और "मृत" स्थितियों के बीच भी। इसलिए:
समग्रतः रोमियों 1:4 हमें पवित्र आत्मा की कार्रवाई, मसीह के उत्थान की ऐतिहासिकता तथा परमेश्वर की स्वीकृति—इन तीनों को साथ जोड़कर विश्वास की मजबूत नींव प्रदान करता है।