Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
रोमियों 1:1 रोमियों 1:2 रोमियों 1:3 रोमियों 1:4 रोमियों 1:5 रोमियों 1:6 रोमियों 1:7 रोमियों 1:8 रोमियों 1:9 रोमियों 1:10 रोमियों 1:11 रोमियों 1:12 रोमियों 1:13 रोमियों 1:14 रोमियों 1:15 रोमियों 1:16 रोमियों 1:17 रोमियों 1:18 रोमियों 1:19 रोमियों 1:20 रोमियों 1:21 रोमियों 1:22 रोमियों 1:23 रोमियों 1:24 रोमियों 1:25 रोमियों 1:26 रोमियों 1:27 रोमियों 1:28 रोमियों 1:29 रोमियों 1:30 रोमियों 1:31 रोमियों 1:32



रोमियों 1:6 का अभिधेयार्थ: बुलाए गया लोग
पवित्र पत्र के संदर्भ में रोमियों की पंक्ति 1:6 प्रेरित पौलुस के संदेश का एक महत्वपूर्ण पहलू उजागर करती है: परमेश्वर की बुलाहट प्रत्येक ईश्वरजन के लिए है, ताकि वे यीशु मसीह के द्वारा पहचान में आकर उद्धार पाएँ। रोम 1 में पौलुस रोम के विश्वविद्यालय-समाज के बीच चर्च की स्थापना और विश्वास की गहराई की चर्चा कर रहा है; अतः verse6 भी इस योजना का व्यक्तिगत भाग बताता है—हर उस व्यक्ति को बुलावा है जो मसीह के अनुयायी बनने के लिए चुना गया है।
मुख्य अभिज्ञान
“जिनमें से तुम भी यीशु मसीह के होने के लिये बुलाए गए हो” का अर्थ यह है कि ईश्वर अपनी योजना केाधार पर सभीGentiles और Jews को, उन सबको जो मसीह में शामिल होते हैं, उद्धार की पुकार देता है। इसे “बुलाहट” का शब्द एक कृपा-कार्य के रूप में समझना उचित है—एक ऐसा आह्वान जो न सिर्फ विश्वास के लिए सूचित करता है बल्कि मसीह के जीवन में संपर्क बनाकर परिवर्तन के अवसर बनाता है।
दो-तीन प्रमुख विषय
अनुशंसित क्रॉस-रेफरेंसेस (संक्षेप)
– रोमियों 8:28-30: ईश्वर की बुलाहट और उसके अपराध-हीन उद्देश्य का दृढ़ संकेत देता है कि हर पिता अपने बच्चों को प्रकृति के अनुसार बुलाता है।
– 2 कुरिन्थियों 5:20: मसीह के संदेश के सार को व्यक्तिगत रूप से ग्रहण करने की जिम्मेदारी बताता है कि हम—प्रत्येक व्यक्ति—उसकी ओर से प्रवचन बनें।
– इयह 55:1-3: उद्धार का निमंत्रण सभी के लिए खुला है, चाहे पृष्ठभूमि कुछ भी हो, ताकि इन्सान जीवन पाए।
व्यावहारिक चिंतन
क्या आप स्वयं इस बुलाहट की स्थिति में हैं? अगर आप पवित्र आत्मा के प्रभाव से प्रेम, विश्वास और नम्रता की भाषा में यीशु के साथ अपने संबंध को मजबूत पाते हैं, तो यह साबित होता है कि ईश्वर ने आपको बुलाया है। यह बुलाहट न सिर्फ धार्मिक ज्ञान बल्कि जीवन-व्यवहार, वैश्विक दृष्टिकोण, और दया-निर्वाह के लिए बाध्य करती है। एक विश्वासी के रूप में अपने दिनचर्या में यह विचार रखें कि आप किस प्रकार अपने परिवार, मित्रों और समाज के लिए मसीह की भीड़-भाड़ के संदेश को जीवंत बना सकते हैं।
संक्षेप निष्कर्ष
रोमियों 1:6 में बताई गई बात कि आप भी यीशु मसीह के होने के लिए बुलाए गए हो, इसका अर्थ है कि ईश्वर ने हर एक को उद्धार के दायरे में प्रवेश हेतु आमंत्रित किया है। यह बुलावा व्यक्तिगत और समुदाय दोनों स्तरों पर मसीह के जीवन के अनुराग को जन्म देता है और विश्व को नए समुदाय की पहचान प्रदान करता है—जो प्रेम में एक, आस्था में गहरा, और सेवा में सक्रिय रहता है।
एतिहासिक व्याख्या-नोट: Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke जैसे प्रकाशकों से उद्धृत संक्षिप्त विचार, हिंदी पाठकों के लिए उपलब्ध सार्वजनिक-डोमेन अभिधियों के अनुरूप, इस पाठ के साथ संगत रूप से पाठ-भाव को स्पष्ट करते हैं।