Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
रोमियों 1:1 रोमियों 1:2 रोमियों 1:3 रोमियों 1:4 रोमियों 1:5 रोमियों 1:6 रोमियों 1:7 रोमियों 1:8 रोमियों 1:9 रोमियों 1:10 रोमियों 1:11 रोमियों 1:12 रोमियों 1:13 रोमियों 1:14 रोमियों 1:15 रोमियों 1:16 रोमियों 1:17 रोमियों 1:18 रोमियों 1:19 रोमियों 1:20 रोमियों 1:21 रोमियों 1:22 रोमियों 1:23 रोमियों 1:24 रोमियों 1:25 रोमियों 1:26 रोमियों 1:27 रोमियों 1:28 रोमियों 1:29 रोमियों 1:30 रोमियों 1:31 रोमियों 1:32



रोमियों 1:2 — पवित्र शास्त्र में पहले से ही उसकी सूचना
यह पद यह बताता है कि ईश्वर ने प्रेरितियों के माध्यम से अपना संदेश पहले से ही भविष्यवक्ताओं के द्वारा पवित्रशास्त्र में प्रकाशित कर दिया था। यह दृश्य उद्घोषणा हमारी समझ को स्पष्ट करता है कि ईश्वरीय योजना चिरस्थायी और एकरूप है: वक्त के प्रारम्भ से लेकर अंत तक परमेश्वर की इच्छा और वचन एक सलोना क्रम बनाते हैं।
पार्श्वभूमि और मूल संदर्भ
रोमियों के पन्नों में पौलुस रोम के विश्वासियों के सामने ईश्वरीय वचन की पुख़्ता प्रकृति रखते हैं: पुराने नियम के ग्रंथ, मनुष्य के असफल प्रयासों के बावजूद, परमेश्वर का उद्धारक योजना कुछ समय से पहले से निर्धारित थीं। यहाँ यह कहा गया कि उसने अपने भविष्यद्वक्ताओं के द्वारा पवित्रशास्त्र में पहले से जो बातें लिखी थीं, वे वास्तव में ईश्वर की योजनाओं का हिस्सा हैं। इसका तात्पर्य यह है कि नया जन्म, धार्मिकता और न्याय का संदेश, पुराने अभिलेखों में छुपा हुआ था, और अंतत: मसीह द्वारा पूर्ण हुआ।
मुख्य संदेश
अनुसंधान के साथ सह-संरचनात्मक विषय
1) परमेश्वरीय योजना का सततत्व: पुराने भविष्यवक्ता अपने समय से पहले ईश्वर के उद्देश्य को व्यक्त कर जाते हैं; 2) प्रेरित-लेखन की संगति: रोमियों में नया विमर्श पुराने लेखन के साथ मेल खाता है; 3) उद्धार की पूर्णता: भविष्यवक्ताओं के संदेशों की पूर्ति मसीह द्वारा होती है।
क्रॉस-रेफरेंस (संक्षिप्त संदर्भ और बिंदु)
- गालातियों 3:8: परमेश्वर ने विश्वास के द्वारा जन्म लेने वालों के लिए पहले से आशीष योजना की घोषणा की है। यह दिखाता है कि ईश्वर की यह योजना पहले से ही अभिलाषित थी।
- 1 पतरस 1:10-12: भविष्यवक्ताओं ने जो ज्ञान प्राप्त किया, वह ईश्वरीय अनुग्रह से स्थापित हुआ, ताकि विश्वासियों को मसीह के लिए आनंद मिल सके।
- हेबर 1:1-2: परमेश्वर ने समय-समय पर और विभिन्न प्रकार के पुरुषों के द्वारा अपने वचन की घोषणा की, और अंत में पुत्र के रूप में स्पष्ट किया—यह उसी योजना की एक अभिव्यक्ति है।
हिंदी-विशिष्ट टिप्पणी—उद्धारक योजना का एकीकृत चित्र
हमें यह समझना चाहिए कि पवित्रशास्त्र एक गतिशील किताब है, जो समय के साथ नहीं बदली; यह ईश्वर की एक स्थिर और भरोसेमंद योजना को प्रकट करता है। पुराने प्रमाण में जो कुछ भविष्यवाणीया और घटनाएं थीं, वे नए प्रमाण में मसीह के जीवन, मृत्यु और प्रतिष्ठा के साथ पूर्ण होती हैं। इसलिए पवित्रशास्त्र का हर भाग—पूर्ववर्ती और आगे आने वाले—एक ही लक्ष्य पर केंद्रित है: परमेश्वर के लोग को उनके भरोसे में स्थापित करना और उनकी महिमा को प्रकट करना।
संक्षिप्त संदेशन
ईश्वर का वचन समय से परे स्थिर है। आज जब हम पवित्रशास्त्र के सामने स्थिर रहते हैं, तो हम देख पाते हैं कि हर संदेश, हर उद्धारक संकेत, एक पूर्व-नियोजित मार्ग की कड़ी है। यह स्मरण हमें देता है कि ईश्वर का वचन कभी खाली नहीं जाता।
आध्यात्मिक उद्देश्य पर एक छोटी-सी प्रार्थना
स्वर्गीय पिता, तूने अपने भविष्यवक्ताओं के द्वारा पवित्रशास्त्र में जो कुछ लिखा वह हमारी स्मृतियों के भीतर बनाये रखा है। कृपया मुझे तेरे वचन की संगति और पूर्णता को समझने में সহाय दे, ताकि मैं तुझे अधिक विश्वास, आशा, और प्रेम के साथ खोज सकूँ।