रोमियों 1:22 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

वे अपने आप को बुद्धिमान जताकर मूर्ख बन गए, (यिर्म. 10:14)

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रोमियों 1:22 पद-दर-पद बाइबल टीका

रोमियों 1:22 पर टिप्पणी (HINIRV)

सीधे शब्दों में अर्थ: वे अपने आप को बुद्धिमान समझते हैं, परन्तु वास्तव में वे मूर्ख बन गए हैं। उनकी prétended बुद्धिमत्ता आत्म-आश्वासन और मानवीय सोच तक सीमित है, जो परमेश्वर के मन्तव्य से विरुद्ध है।

पृष्ठभूमि और संदर्भ

प्रेषित पौलुस रोम में मिस्र-व्यवस्था के कारण पुराने युग के पाप-चक्र को उजागर करते हैं: मानवता ने ईश्वर के प्रकाश को अस्वीकार कर अपनी सोच को उच्च मान लिया, फिर परिणामस्वरूप वे अविवेकपूर्ण और मूर्खतापूर्ण व्यवहार में फंस गए। यह वाक्य रोमियों 1:22 में उन लोगों पर लागू होता है जो ज्ञान-विज्ञान के नाम पर ईश्वर के रहस्य को पहचानने की जगह अपनी कल्पना को सच मानते हैं।

व्याख्यात्मक अवलोकन

- “खुद को बुद्धिमान जताकर”: यहाँ बुद्धिमत्ता अपने नैतिक और आध्यात्मिक संदर्भ में मापा गया है। सांसारिक ज्ञान ईश्वर के स्रोत से अलग मोड़ ले सकता है जब वह प्रभु के उद्देश्य को केंद्रित नहीं रखता।

- “मूर्ख बन गए”: यह परिणाम है जब मानव नैतिक स्पष्टता खो देता है; ज्ञान-सरहद की अवहेलना से वास्तविक समझ घट जाती है और रीति-रिवाज, स्वार्थ, या तर्क-वितर्क से लोगों के कर्म गिर जाते हैं।

थीमेटिक सार

  1. मानवीय ज्ञान के दिखावे के पीछे वास्तविक दिव्यता से विमुखता।
  2. स्व-उच्चतम मूल्यांकन से मिलने वाला आत्म-विश्वास वास्तविक विवेक को धूमिल करता है।
  3. ईश्वर के प्रकाश के स्थान पर मानव-तर्क का चयन होते ही जीवन-सार गिर सकता है।

अन्यroud संदर्भ और उनके अर्थ

- यिर्मयाह 10:14 में मूर्तिपूजा के अहंकार की तुलना में परमेश्वर के ज्ञान की नाजुकता दिखती है; यह बताता है कि मानव मूर्तियों के बनावटी ज्ञान पर निर्भर होकर वास्तविक विवेक से दूर हो जाता है।

- रोमियों 1:20-21 में प्रकृति की रचना से आदरणीय ज्ञान के संकेत मिलते हैं; परन्तु मनुष्य ने उसे दबा दिया और अपने विवेक को विकृत किया।

छोटी व्यावहारिक दिशा

  • अपने ज्ञान की सीमाओं को पहचानें और ईश्वर के प्रकाश के अनुरूप सोचने का सतर्क प्रयास करें।
  • ज्ञान और विज्ञान की सेवा में भी नम्रता बनाए रखें, ताकि प्रभु के वचन से विमुख न हों।

प्रमुख उद्धरण उपयोग

यहां आवश्यक रूप से सीधेMatthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के पूर्ण उद्धरण नहीं दिए जा रहे हैं, परन्तु उनकी धारणा से प्रेरित व्याख्या ने इस पाठ के संगत अर्थ को पुख्ता किया है: बुद्धिमत्ता के दिखावे के भीतर नैतिक विवेक की कमी को उजागर करना, और ईश्वर की ओर से सत्य को प्राथमिकता देना।

संयुक्त निष्कर्ष

रोमियों 1:22 का तात्पर्य यह है कि मानव अपनी तर्क-शक्ति को सर्वोपरि मानकर ईश्वर के सच को खारिज कर देता है। वास्तविक बुद्धिमत्ता वह है जो ईश्वर के प्रकाश, His will, और प्रेम पर आधारित हो। अतः प्रार्थना में, हमें स्वयं के तर्क पर नहीं, बल्कि परमेश्वर के ज्ञान पर टिके रहने की चाहत होनी चाहिए.

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

रोमियों 1:22 समानांतर पद और संबंधित वचन

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