Old Testament
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आमोस 9:15 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
मैं उन्हें, उन्हीं की भूमि में बोऊँगा, और वे अपनी भूमि में से जो मैंने उन्हें दी है, फिर कभी उखाड़े न जाएँगे,” तुम्हारे परमेश्वर यहोवा का यही वचन है।
आमोस 9:15 पद-दर-पद बाइबल टीका
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आमोस 9:15 समानांतर पद और संबंधित वचन
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यिर्मयाह 24:6 (HINIRV) »
मैं उन पर कृपादृष्टि रखूँगा और उनको इस देश में लौटा ले आऊँगा; और उन्हें नाश न करूँगा, परन्तु बनाऊँगा; उन्हें उखाड़ न डालूँगा, परन्तु लगाए रखूँगा।

यहेजकेल 37:25 (HINIRV) »
वे उस देश में रहेंगे जिसे मैंने अपने दास याकूब को दिया था; और जिसमें तुम्हारे पुरखा रहते थे, उसी में वे और उनके बेटे-पोते सदा बसे रहेंगे; और मेरा दास दाऊद सदा उनका प्रधान रहेगा।

यशायाह 60:21 (HINIRV) »
तेरे लोग सब के सब धर्मी होंगे; वे सर्वदा देश के अधिकारी रहेंगे, वे मेरे लगाए हुए पौधे और मेरे हाथों का काम ठहरेंगे, जिससे मेरी महिमा प्रगट हो। (प्रका. 21:27, इफि. 2:10, 2 पत. 3:13)
आमोस 9:15 पर आधारभूत व्याख्या
परोपकारी सेवक Amos ने परमेश्वर के विरुद्ध पाप और न्याय के बीच एक स्पष्ट दृश्य बनाकर उद्धार की आशा को प्रकट किया है। Amos 9:15 वह वचन है जिसमें यह कहा गया है कि ईश्वर अपनी चुनी हुई भूमि पर उन्हें पुनः बसा देगा और उनकी धरती फिर कभी उजाड़ नहीं होगी। यह वचन दया, उद्धार और पुनर्स्थापन के परम ऐतिहासिक सार को प्रस्तुत करता है—प्रभु का सर्वोच्च संकल्प उनकी बातों के अनुसार पूरा होता है और उनका वंशज राहुल नहीं, बल्कि उनकी भूमि वापस दे दी जाती है। यह प्रसंग तब है जब इस्राएली विपत्ति के बाद आशाजनक भविष्य की प्रतीक्षा कर रहे थे; पर परमेश्वर का वचन उनके लिये स्थिर और मजबूत आशा बनकर आता है।
मुख्य भावार्थ
कम शब्दों में कहें तो, यह वचन दो आशाओं को एक साथ जोड़ता है: भूमि का संरक्षण और दयाभाव की पुनर्रचना। परमेश्वर कहता है कि वे अपनी किस्मत से नहीं उखाड़े जाएंगे, बल्कि उनके निवासी बने रहने के लिये उन्हें पुनः उन्नत किया जाएगा। यह भूमि-आधार पर आधारित जीवन का संकेत है—ईश्वर की वचन-प्रतिज्ञा उनके बीच स्थिर है और उनकी उपस्थिति उनके साथ है।
दो-तीन प्रमुख विषय
सामान्य क्रॉस-रेफरेंस
- यशाय्व 11:11-12: उद्धार और पुनर्स्थापन की एक समान धारा का संकेत देती है, जहाँ परमेश्वर लोगांे को फिर से इकट्ठा करते हैं।
- यिर्मयाह 30:18-22: दुःख के बाद भूमि का पुनर्निर्माण और लोगों का पुनः बसेरा।
- भजन 126:1-3: दुख के बाद स्मरणीय चमत्कारी वापसी की खुशी का वर्णन।
ये संदर्भ दिखाते हैं कि बारीकी से देखा जाए तो restoration का विषय पुराने नियम के भीतर स्थिर है—ईश्वर बनाम विनाश, फिर से बसना और उसकी महिमा का प्रदर्शन।
व्यावहारिक अनुप्रयोग
हमारे जीवन में भी कभी-कभी पर्यावरण, असफलताओं या दबावों से हमें उखाड़े जाने जैसा अनुभव होता है। इस वचन से प्रेरणा मिलती है कि विश्वास की आधारशिला स्थिर ہے: परमेश्वर का वचन कभी झूठा नहीं होता और वह अपने लोगों को सुरक्षित, फिर से बसाने की योजना बनाता है। आत्मिक धरातल पर, हमारी आस्था यह है कि कठिन समय के बाद भी ईश्वर हमें संभालकर रखेगा और हमारे जीवन में पुनर्स्थापन का मार्ग खोलेगा—यकीन और धैर्य के साथ।
संक्षिप्त समापन
आमोस 9:15 में बोया गया संदेश—प्रभु की भूमि, उनका निवास और उनकी प्रतिज्ञाओं का स्थायित्व—हमें यह सिखाता है कि परमेश्वर ने अपने लोगों के लिए एक सुरक्षित, पुनःस्थापित भविष्य तय किया है। जब वे अपने लिए चिह्नित क्षेत्र में रहते हैं, तब वह उन्हें कभी उखाड़े नहीं जाएगा।
संदेश समानार्थी उद्धरण (संक्षिप्त)
यदि आवश्यक हो तो ध्यान दें: Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के सार्वजनिक-डिबेट उद्धरणों में, वचन के आशय और आंदोलन पर उन्होंने यह साफ किया है कि restoration और permanence परमेश्वर के दिल में है और वह अपने लोगों को पुनः स्थापित करेगा।