Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
यिर्मयाह 1 यिर्मयाह 2 यिर्मयाह 3 यिर्मयाह 4 यिर्मयाह 5 यिर्मयाह 6 यिर्मयाह 7 यिर्मयाह 8 यिर्मयाह 9 यिर्मयाह 10 यिर्मयाह 11 यिर्मयाह 12 यिर्मयाह 13 यिर्मयाह 14 यिर्मयाह 15 यिर्मयाह 16 यिर्मयाह 17 यिर्मयाह 18 यिर्मयाह 19 यिर्मयाह 20 यिर्मयाह 21 यिर्मयाह 22 यिर्मयाह 23 यिर्मयाह 24 यिर्मयाह 25 यिर्मयाह 26 यिर्मयाह 27 यिर्मयाह 28 यिर्मयाह 29 यिर्मयाह 30 यिर्मयाह 31 यिर्मयाह 32 यिर्मयाह 33 यिर्मयाह 34 यिर्मयाह 35 यिर्मयाह 36 यिर्मयाह 37 यिर्मयाह 38 यिर्मयाह 39 यिर्मयाह 40 यिर्मयाह 41 यिर्मयाह 42 यिर्मयाह 43 यिर्मयाह 44 यिर्मयाह 45 यिर्मयाह 46 यिर्मयाह 47 यिर्मयाह 48 यिर्मयाह 49 यिर्मयाह 50 यिर्मयाह 51 यिर्मयाह 52



यिर्मयाह 24:6 — तत्कालीन संदर्भ और इसका गहरा संदेश
पद के संदर्भ में प्रभु के दर्शन हमें भविष्य के भरोसे की एक दृढ़ तस्वीर दिखाते हैं। यिर्मयाह की दिनचर्या के भीतर देश के दो समूह दिखते हैं: एक अच्छा और एक बुरा—यह एक दृढ़ निश्चय का संकेत है कि परमेश्वर हर परिस्थिति में अपने लोगों के साथ व्यवहार करते हैं। यह पद विशेष रूप से उन लोगों के लिए आश्वासन है जो परमेश्वर की वचन-bद्धता पर टिके रहते हैं।
पद का मूल आशय: परमेश्वर की कृपा और स्थायित्व
यह पाठ बताता है कि परमेश्वर अपने चुने हुए लोगों पर करुणा, कृपा और निरन्तर संरक्षण का वादा करते हैं। “कृपादृष्टि” और “लौटा आना” जैसे भाव प्रेम और पुनःस्थापना की आशा को उभारते हैं। यह उन प्रवचनों के अनुरूप है जहाँ परमेश्वर यह दर्शाते हैं कि वे अपने लोगों को भटकन के बावजूद भी नहीं छोड़ते; वे उन्हें उखाड़ कर डालना नहीं चाहते, बल्कि उन्हें बनाते और लगाते रखना चाहते हैं।
गहरे शब्दों की व्याख्या
Related cross-references (संयुक्त मार्ग)
1) यूहन्ना 10:28–29: प्रभु अपने आप को देकर हमें अनथक सुरक्षा प्रदान करते हैं—हमें कभी न छोड़ना। यह तात्पर्य है कि परमेश्वर के हाथ में हमारे बचाव का भरोसा अडिग रहता है।
2) इक़िस 37:14: पुनर्स्थापना और जीवन के पुनःस्थापन के चित्र हमें बतलाते हैं कि परमेश्वर मृत-सीमित नहीं रहते; वे अपने कर्मों से नई उम्मीद बनाते हैं।
3) होता एक स्मरण: रोम 11:29—परमेश्वर की कृपा से किया गया बुलावा कभी निरस्त नहीं होता; जो अभी है वही भविष्य में भी स्थिर रहता है।
इन संदर्भों में स्पष्ट है कि परमेश्वर की कृपा पुनःस्थापना, बनाये रखना और नष्ट न कर पाने की उसकी योजना से जुड़ी है।
पढ़ाई के लिए अपेक्षित शब्द-चिह्न
यिर्मयाह के पाठ के भीतर यह संदेश उभरता है कि विश्वास में स्थिर रहने से जीवन में परिवर्तन आते हैं। मंच पर यह संकेत है कि परमेश्वर अपने लोगों के साथ किए गए वादों के प्रति ईमानदार हैं और उनकी भलाई को नहीं छोड़ते।
आज के जीवन में आवेदन
लेखन-आधार और उद्धरण
इस टिप्पणी की प्रेरणा कभी-कभी क्लासिक व्याख्यों से मिलती है, जिनमें उनके स्वर और विचार स्पष्ट रूप से प्रतिध्वनित होते हैं। नीचे एक संक्षिप्त उद्धरण उल्लेखित है (यदि उपलब्ध हो):
“परमेश्वर की कृपा उन पर बनी रहती है; वे दूर नहीं रहते, बल्कि उनके बीच लौटकर आते हैं।”
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सूक्ष्म निष्कर्ष
यिर्मयाह 24:6 से संकेत मिलता है कि परमेश्वर विश्वासयोग्यों के लिए सुरक्षित, समृद्ध और पुनःस्थापित जीवन की राह बनाते हैं। कृपा, पुनःस्थापना, और निरन्तर समर्थन—ये तीनों मिलकर विश्वासियों के लिए एक ठोस आशा का आधार बनाते हैं।