भजन संहिता 139:7 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

मैं तेरे आत्मा से भागकर किधर जाऊँ? या तेरे सामने से किधर भागूँ?

भजन संहिता 139:7 पद-दर-पद बाइबल टीका

भजन संहिता 139:7 का तात्पर्य

इस पद में कवि ईश्वर की सर्वव्यापकता को चुनौती देने वाले मनःस्थिति को व्यक्त करता है—कहाँ जाऊँ? किस स्थान पर छिप जाऊँ? आत्मा-आत्मा तक ईश्वर की दृष्टि से दूर कहीं नहीं छिप सकता। परमेश्वर हर जगह उपस्थित हैं; क्योंकि वह ज्ञान, न्याय और प्रेम से संसार की हर दिशा को ढांकते हैं।

पद का संदर्भ और पृष्ठभूमि

यह पंक्तियाँ भजन 139 में हैं, जो डेविड के व्यक्तिगत अनुभवों से प्रेरित एक गहन सतर्कता का गीत है। कवि ईश्वर की सर्वव्यापकता, निर्मिति की सूक्ष्मता और धर्मी विवेक की निर्भयता पर विचार करता है। भजन 139:7 विशिष्ट रूप से यह दिखाता है कि जहां भी मनुष्य जाऊँ, ईश्वर की उपस्थिति हमारे साथ है—अँधेरे में भी, प्रकाश के बीच भी, और यहां तक कि अपने दिल के विचारों के भीतर भी।

व्याख्यात्मक अवलोकन

  • ईश्वर की मौजूदगी असीम: कवि कहता है कि वह किस दिशा में जाऊँ, उसका भाग्य कहाँ बना दूँ—ईश्वर की नजर हर जगह है।
  • आत्म-निर्वासन का विचार नहीं: भागना संभव नहीं, क्योंकि ईश्वर की दिव्यता उसकी निगाह से परे नहीं जा सकती।
  • दिल की सूक्ष्मता: कविता यह भी संकेत करती है कि ईश्वर हमारे विचारों को भी जान लेते हैं; हमारे अंतःकरण के निर्णय उनसे अज्ञात नहीं रहते।

शास्त्रीय कथन (संक्षेप में)

मथ्यू हेन्री का सामान्य निष्कर्ष यह है कि परमेश्वर की उपस्थिति शारीरिक सीमाओं से परे है; वह हर स्थूल और अर्द्ध-स्थूल स्थिति में हमारी गति से पहले मौजूद है।

एलेक्टर बर्न्स उल्लेख करते हैं कि यह अनुभूति व्यक्ति के विश्वास को गहराई से पुष्ट करती है—हम कभी भी ऐसे स्थान नहीं जहाँ ईश्वर न हों, और न ही हमारे दिल के विचारों से कोसों दूर।

एडम क्लार्क भी इस दृष्टिकोण को स्वीकार करते हैं कि ईश्वर की उपस्थितिकरण अति-व्यापक है, चाहे हम भयभीत हों या सहज हों, और यह जागरण का स्रोत है कि दया और न्याय दोनों साथ रहते हैं।

छोटे से thematic सूची

  • ईश्वर की हर जगह उपस्थिति
  • दिल की सोच और विचार भी उसका ज्ञान
  • घबराहट में भी विश्वास की स्पष्टता

सम्बद्ध संदर्भ

1) गलत दिशा में भागना चाहना—यही प्रवृत्ति कभी-कभी दया से दूर नहीं करती; पर परमेश्वर की नज़र से भागना असंभव है (उद्धृत विचार).

2) अंधेरे में प्रकाश—भजन 23 और 18 जैसे पद भी दिखाते हैं कि अंधकार में भी ईश्वर का प्रकाश है; यह भय को परास्त करता है।

3) हृदय की खोज—1 समुह 16:7 के अनुरूप, मनुष्य के बाहरी दिखावे से अधिक ईश्वर के अनुरोध नज़र आते हैं; उसके नज़र में हृदय की स्थिति प्रमुख है।

व्यावहारिक निष्कर्ष

जब आप भय, अपराध या अपराध-बोध से घिरे हों, तो यह याद रखें कि ईश्वर की उपस्थिति आपकी हर चाल के साथ है। आप चाहे किसी भी परिस्थिति में हों, उसकी आत्मीय निगाह आपकी सुरक्षा और मार्गदर्शन का कारण है। इस विश्वास से आप आंतरिक शांति पा सकते हैं और सचेत होकर अपने आचरण को विचारपूर्वक चुन सकते हैं।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

भजन संहिता 139:7 समानांतर पद और संबंधित वचन

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परन्तु योना यहोवा के सम्मुख से तर्शीश को भाग जाने के लिये उठा, और याफा नगर को जाकर तर्शीश जानेवाला एक जहाज पाया; और भाड़ा देकर उस पर चढ़ गया कि उनके साथ होकर यहोवा के सम्मुख से तर्शीश को चला जाए।

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तब वे बहुत डर गए,* और उससे कहने लगे, “तूने यह क्या किया है?” वे जान गए थे कि वह यहोवा के सम्मुख से भाग आया है, क्योंकि उसने आप ही उनको बता दिया था।

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