भजन संहिता 139:17 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

मेरे लिये तो हे परमेश्‍वर, तेरे विचार क्या ही बहुमूल्य हैं! उनकी संख्या का जोड़ कैसा बड़ा है!

भजन संहिता 139:17 पद-दर-पद बाइबल टीका

भजन संहिता 139:17 का अर्थ

मेरे लिये तो हे परमेश्‍वर, तेरे विचार क्या ही बहुमूल्य हैं! उनकी संख्या का जोड़ कैसा बड़ा है!

संदर्भीय पृष्ठभूमि

भजन 139 एक व्यक्तिवादी दुआ है जिसमें दाता परमेश्वर की गायन-चरित्र के बारे में विचार प्रस्तुत करते हुए उसे अपनी सीमाओं के भीतर जागरूकता से अनुभूत करते हैं। विभूति-स्वरुप परमेश्वर हर जगह मौजूद है—पहचान, निगरानी और संरक्षण के साथ। उपरोक्त पंक्ति उस व्यापक परिप्रेक्ष्य को संक्षेप में बताती है: परमेश्वर के अद्भुत विचार और योजनाएँ हमारे सामने कितनी बहुमूल्य और गहरी हैं, जिन्हें गिनना संभव नहीं।

व्याख्यात्मक अवलोकन

- परमेश्वर की स्मृति और ज्ञान का प्रत्यक्ष अनुभव: कवि यह स्वीकार करता है कि परमेश्वर हर चीज जानता है—सिर्फ बाहरी क्रिया-कलाप नहीं, बल्कि विचार और मनोभाव भी।

- মূল্য और मूल्यांकन: विचारों की “बहुमूल्यता” दर्शाती है कि परमेश्वर के ज्ञान में मानव जीवन के हर सुक्ष्म पहलू का मूल्य है।

- गणना की सीमा: पृथ्वी-समय के भीतर मनुष्य की संभावनाएँ सीमित हो सकती हैं, परन्तु परमेश्वर की योजना अनंत है।

interpretive observations (संक्षेप)

  • ईमानदारी भरी आत्म-स्वीकृति: कवि परमेश्वर के ज्ञान के सामने अपने भीतर के सच को मानते हैं—स्वीकार करते हैं कि परमेश्वर हर एक विचार को भी देखता है।
  • आत्मिक सुरक्षा का आश्वासन: भगवान के विचार बहुमूल्य हों तो यह सुरक्षित भरोसा देता है कि हमारे जीवन का मार्ग वही संभालते हैं।
  • आत्म-उत्साह का आयाम: ज्ञात विचारों की व्यापकता से व्यक्ति का दैविक डींग मारना नहीं, बल्कि परमेश्वर के साथ एक गहरी जुड़ाव का अनुभव होता है।

छोटे thematic सूची

  1. परमेश्वर का हरक्षण ज्ञान
  2. हमारी सोच और उसकी कीमत
  3. दायरे से परे परमेश्वर की योजना

related passages (cross-references) और संक्षिप्त व्याख्या

1) भजन 139:1-4 — परमेश्वर हमारे हर क्रिया और विचार से परिचित रहते हैं; यह स्थापना इस पंक्ति के आधार को बनाती है कि विचार भी उनके ज्ञान में आते हैं।

2) रोमियों 11:33-34 — परमेश्वर की गूढ़ योजना और गहराई की असीमता पर ध्यान केंद्रित करता है, जहाँ उसकी योजनाओं को समझना मनुष्य के लिए कठिन है।

3) मत्ती 6:25-34 — सांसारिक चिन्ताओं पर नियंत्रण और परमेश्वर की देखरेख पर विश्वास, यह दिखाता है कि प्रभु की देखरेख में जीवन की चिंता कैसे कम करनी चाहिए।

प्रायोगिक takeaway

हम अपने विचारों, निर्णयों और जीवन के मार्गों को परमेश्वर के प्रकाश में लाने की ओर अग्रसर हों। वह हर विचार के पीछे भी है और हमें निश्छल प्रेम, सुरक्षा और मार्गदर्शन देते हैं। जब हम उसकी बहुमूल्य विचारों को महत्व देते हैं, तो हमारा आचरण अधिक जागरूक, उदार और भरोसेमंद बनता है।

नोट्स

इस पंक्ति के प्रबल अर्थ के लिए Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के तात्त्विक संकेतकों से यह निर्मित ब्रह्मसार अर्थ है। हर टिप्पणीकार ने परमेश्वर के ज्ञान की सीमा-रहितता और व्यक्तिगत सम्बद्धता को उभारा है. (उल्लेखित उद्धरण: उनके किसी विशिष्ट वाक्यों के पूर्ण पाठ यहाँ नहीं दिए गए हैं।)

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

भजन संहिता 139:17 समानांतर पद और संबंधित वचन

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क्योंकि यहोवा की यह वाणी है, कि जो कल्पनाएँ मैं तुम्हारे विषय करता हूँ उन्हें मैं जानता हूँ, वे हानि की नहीं, वरन् कुशल ही की हैं, और अन्त में तुम्हारी आशा पूरी करूँगा।

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क्योंकि यहोवा कहता है, मेरे विचार और तुम्हारे विचार एक समान नहीं है, न तुम्हारी गति और मेरी गति एक सी है। (रोम. 11:33)

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