भजन संहिता 40:5 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

हे मेरे परमेश्‍वर यहोवा, तूने बहुत से काम किए हैं! जो आश्चर्यकर्मों और विचार तू हमारे लिये करता है वह बहुत सी हैं; तेरे तुल्य कोई नहीं! मैं तो चाहता हूँ कि खोलकर उनकी चर्चा करूँ, परन्तु उनकी गिनती नहीं हो सकती।

भजन संहिता 40:5 पद-दर-पद बाइबल टीका

भजन संहिता 40:5 पर टिप्पणी — आश्चर्य और अकथ गिनती

मुख्य निष्कर्ष: प्रिय स्पष्टता यह है कि परमेश्वर के maravison और अनदेखे कार्यों की गिनती हमारी समझ से परे है, परन्तु उनका महिमामय काम हमारे विश्वास में स्थिर करते हैं। भक्ति में यह पद कहता है कि तूने कितने आश्चर्यकर्म घटित किए, और इन अकल्पनीय घटनाओं की पूरी गिनती हमारे लिए संभव नहीं; फिर भी जो कुछ भी किया गया है, वह अनंत पराक्रम और प्रेम का प्रमाण है।

भंगिमा और साहित्यिक संदर्भ

यह भजनकार के अनुभव से भरा उद्घोष है—एक व्यक्ति जो ईश्वर के कार्यों से अभिभूत है और उनके विशाल करुणा-कार्य को स्मरण कर, उनके ज्ञान की गहराई के सामने निर्बल महसूस करता है। “हे मेरे परमेश्वर यहोवा” से आरम्भ है, जो एक सग़ठनात्मक इष्ट-आह्वान है; यह संबोधन केवल सत्ता का उद्घोष नहीं, बल्कि भागीदारी की इच्छा भी दर्शाता है—भक्त अपने प्रभु के साथ गहरे संवाद में है।

बैकिंग संदर्भ के अनुसार यह पद स्तोत्र-संग्रह के बीच की रौशनी है जो इतिहास-यात्रा के समयों में भरोसे की स्थिरता देता है: परमेश्वर ने कितने चमत्कार और विचार, जो हमारे लिए उपलब्ध कराए, वे अत्यंत हैं; इनकी गिनती न हो सके, यह दर्शाता है कि कोई भी मानव गणना इस महान कार्य का प्रकटीकरण नहीं कर सकती।

धर्मशास्त्रीय महत्त्व

इस पद से सीख मिलती है कि ईश्वर की क्रिया-व्याप्ति केवल इतिहास-विशेष से नहीं, बल्कि उनके सतत प्रेम-कार्य से बनती है। हम उनके कामों को सूचीबद्ध नहीं कर सकते, परन्तु विश्वास में उनके प्रावर्तक करुणा और संरक्षण को स्मरण कर सकते हैं। यह संदेश स्वर्गीय संदर्भ में भी मिलान करता है कि ईश्वर की योजना हर पीढ़ी के लिए नवीन है, और उसकी योजनाओं की गिनती कभी समाप्त नहीं होती।

क्रॉस-रेफरेंसेस (संभावित संदर्भ-संयोजन)

  • हन्ना 2:11 — ईश्वर के चमत्कार जीवन में आनंद बनाते हैं; यह उद्धार के समारोह का संकेत देता है।
  • मरकुस 5:41 — यीशु की चमत्कारिक क्रिया लोगों के दिलों में विश्वास जगाती है; प्रति चमत्कार एक गहराई का उद्घाटन है।
  • रोमियों 11:33 — उसकी गहरी योजनाओं की गिनती मानवीय समझ से परे है; गूढ़ कार्यों के पन्ने अनन्त हैं।

इन संदर्भों से स्पष्ट होता है कि परमेश्वर के कार्य कभी पूर्ण रूप से समझ में नहीं आते, पर वे विश्वास को पुष्ट करते हैं, और उनके मार्गों में सहज विश्वास बनता है।

आत्मिक प्रश्न (Reflection prompts)

  • क्या आप वर्तमान परिस्थितियों में उन चमत्कारिक कार्यों की स्मृति कर सकते हैं जिन्हें आपने देखा है या अनुभव किया है?
  • आप किस तरह से ईश्वर के असीम गुणों के सामने दीन-हृदय रहते हैं और उनके कामों के लिए कृतज्ञता दिखाते हैं?

अनुच्छेद निष्कर्ष

भजन 40:5 यह स्मरण कराता है कि ईश्वर की योजनाएं और कार्य ऐसे विशाल हैं जो मानव गणना से बाहर हैं। फिर भी उनके विचार और चमत्कार हमारे साथ रहते हैं, ताकि हमारा विश्वास दृढ़ हो और हमारी दुआओँ में नया आश्वासन मिले। संपूर्ण संसार में ईश्वर के अद्भुत करुणा के सामने हम नम्र रहते हुए, उसकी बड़ी योजना के भागीदार बनें।

छोटे संदर्भ-आधार

यह पंक्ति Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke जैसे सार्वजनिक डोमेन टिप्पणीकारों के टुकड़ों के सार से प्रेरणा लेकर नया संकलन है। इनके संकेतकों में यह पाया गया है कि परमेश्वर के चमत्कार और विचार गिनती से बाहर हैं, पर उनकी महिमा और प्रेम का प्रभाव बारम्बार अनुभव किया जा सकता है।

कई पाठकों के लिए यह पंक्ति ईश्वर के महान कार्यों की गिनती करने की कोशिश से आगे बढ़कर, उनके अनंत प्रेम और योजना के प्रति विश्वास को गहराती है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

भजन संहिता 40:5 समानांतर पद और संबंधित वचन

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