भजन संहिता 40:6 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

मेलबलि और अन्नबलि से तू प्रसन्‍न नहीं होता तूने मेरे कान खोदकर खोले हैं। होमबलि और पापबलि तूने नहीं चाहा*।

भजन संहिता 40:6 पद-दर-पद बाइबल टीका

भजन संहिता 40:6 – अर्थ का प्रत्यक्ष सार

इस वचन में कहा गया है कि परमेश्वर कर्म-कटौती के बाहरी प्रकार से प्रसन्न नहीं होते; न ही मेलबलि, हार-हार, होमबलि आदि रीतियों से उनका आशीर्वाद मिलता है। ईश्वर ने चेतावनी दी है कि उन्होंने हमारे कान खोदकर खोल दिए हैं; अर्थात वह हमारे हृदय और विवेक को देखना चाहते हैं, न कि केवल बाहरी धर्म-उल्लास।

संदर्भ पृष्ठभूमि

भजन लेखक यह बताता है कि दास-प्रभु के सामने केवल बाहरी धार्मिक कर्म पर्याप्त नहीं हैं; उनका ईश्वर सिंचित हृदय चाहिए। इस काल में याजकों और भक्तों के लिए बलि-बलि, होमबलि आदि रीति-रिवाज सामान्य थे, परन्तु परमेश्वर ने उनसे यह कहा कि उनकी आस्था और अनुशासन हटकर आन्तरिक विश्वास पर निर्भर होनी चाहिए।

व्याख्यात्मक टिप्पणियाँ

  • कान खोलना: यह शीर्षक संकेत करता है कि प्रभु ने हमारे कान खोल दिये हैं ताकि हम उसकी इच्छा को सुनें और समझें; केवल外 बाहरी कर्म नहीं।
  • होमबलि और पापबलि: ये प्राचीन बलियों के प्रकार हैं जिन्हें श्रद्धालु समय-समय पर अर्पित करते थे। यहाँ यह दिखता है कि पारंपरिक दान से नहीं, बल्कि नम्रता, सत्य और भक्ति से परमेश्वर प्रसन्न होते हैं।

थीमेटिक सार

संदर्भ-क्रॉस-रेफरेंस

1) कुरिन्थियों की पहली पत्री 13:1-3 में लिखा है कि प्रेम के अभाव में बाहरी कर्म की महता निरर्थक है; यह दृश्य इस भजन के संदेश को नई रोशनी देता है कि प्रेम और सत्य परमेश्वर की इच्छा है।

2) भूगोल-धर्मशास्त्र में दान-बलि के महत्व को समझाते समय परमेश्वर ने कहा कि मैं तुम्हारा सिंह-बलि नहीं चाहता; मेरा भय और विश्वास चाहिए, जो आंतरिक परिवर्तन से आता है।

3) हास्य-आत्मा के साथ सत्य का जीवन: बाहरी रीतियाँ तब मूल्यवान होती हैं जब उनके पीछे ईमानदार जीवन और अनुशासन हो।

व्यावहारिक निष्कर्ष

हम अपने दिन-प्रतिदिन के आचरण में देखें कि क्या हम बाह्य कर्मों को प्राथमिकता देकर अपने हृदय की स्थिति को छिपाते तो नहीं? परमेश्वर से वास्तविक संबंध के लिए हमारे मन का उड़न-तश्तरी, मनोयोग, और सत्य-प्रेम आवश्यक हैं। दैनिक प्रार्थना, नीति-नियम के साथ विनम्रता, और परोपकार से जीवन का दर्पण साफ होता है।

संयुक्त टिप्पणी का संक्षेप

Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के दृष्टिकोण में मिलते-जुलते संदेश हैं कि बाहरी बलियाँ तब तक उद्धार नहीं देतीं जब तक हृदय में ईमानदारी, विश्वास और प्रेम की धार न हो। यदि कोई बाहरी कर्म कर रहा हो पर भीतर से निष्कृय और अहंकारी हो, तो यह ईश्वर की इच्छा के अनुरूप नहीं है। इस पंक्ति में यह सुसंगत संकेत है कि परमेश्वर को कान-खोलकर सुनना और आपके जीवन में सत्य की सरलता को अपनाना अधिक स्वीकार्य है।

उद्धृत संदेश: इस अध्याय के अभिवचन में “कान खोदकर खोले हैं” जैसा विचार Matthew Henry के सामान्य व्याख्या-प्रचलन से मेल खाता है—कि ईश्वर हृदय की वास्तविक स्थिति देखता है, बाहरी कर्म से नहीं।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

भजन संहिता 40:6 समानांतर पद और संबंधित वचन

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यहोवा यह कहता है, “तुम्हारे बहुत से मेलबलि मेरे किस काम के हैं? मैं तो मेढ़ों के होमबलियों से और पाले हुए पशुओं की चर्बी से अघा गया हूँ; मैं बछड़ों या भेड़ के बच्चों या बकरों के लहू से प्रसन्‍न नहीं होता।

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इसी कारण मसीह जगत में आते समय कहता है, “बलिदान और भेंट तूने न चाहा, पर मेरे लिये एक देह तैयार किया।

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शमूएल ने कहा, “क्या यहोवा होमबलियों, और मेलबलियों से उतना प्रसन्‍न होता है, जितना कि अपनी बात के माने जाने से प्रसन्‍न होता है? सुन, मानना तो बलि चढ़ाने से और कान लगाना मेढ़ों की चर्बी से उत्तम है। (मर. 12:32,33)

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