यशायाह 1:11 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

यहोवा यह कहता है, “तुम्हारे बहुत से मेलबलि मेरे किस काम के हैं? मैं तो मेढ़ों के होमबलियों से और पाले हुए पशुओं की चर्बी से अघा गया हूँ; मैं बछड़ों या भेड़ के बच्चों या बकरों के लहू से प्रसन्‍न नहीं होता।

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यशायाह 1:11 पद-दर-पद बाइबल टीका

यशायाह 1:11 — इसो का अभिजन और दयानुभाव

परंपरागत पवित्रीकरण के ठाठ में ईश्वर यहोवा कहता है कि यद्यपि लोग अपने मेलों और होमबलियों को विनम्र धार्मिक कृत्यों के रूप में प्रस्तुत करते हैं, फिर भी ये कृत्य उसकी दृष्टि में असत्य और अधर्म को छिपाने के साधन हैं। नये पवित्र ज्वारों के बीच यह॰ोवा यह स्पष्ट कर देता है कि वे बलि-बलि, मेढ़ों और चर्बी, पशु-लहू आदि से प्रसन्न नहीं होते। खरखरे शब्दों में ईश्वर कहता है कि उनकी आस्था और भक्ति केवल बाहरी क्रियाओं में नहीं, बल्कि आन्तरिक परिवर्तन में है।

ईश्वर और विश्वास का यह पाठ क्या बताता है

उच्च स्वर के धार्मिक क्रियाकलापों के पीछे वास्तविकता यह है कि ईश्वर ने मानव हृदय की पाप-शुल्कता को देखा है। outward ritual एक संकेत मात्र है; असली धर्म है—न्याय, दया, और भगवान के साथ सच्ची आपकी वाचा। इस वचन से हमें यह समझ में आता है कि परमेश्वर बाहरी धार्मिकता से अधिक आंतरिक शुद्धि को महत्त्व देते हैं।

महत्वपूर्ण शब्द और चित्र

  • मेलबलि और होमबलियाँ— प्राचीन विधान के अनुसार बलि-बलि देवता के सामने समर्पण का प्रतीक थीं; लेकिन यहाँ वे प्रयोग-आधारित क्रियाओं के रूप में दिखते हैं, जिन्हें ईश्वर ने तुष्ट नहीं किया।
  • चर्बी, लहू— ये संकेत हैं देवधर्म के कर्म-कौशल के प्रतीक; परन्तु मौजूदा संदर्भ में केवल उद्योगिक औपचारिकता नहीं, आन्तरिक नैतिक परिवर्तन आवश्यक है।

संबद्ध संदर्भ

1) 「होमबलि और बलि की आवाजाही」यशायाह के संदेशन में एक समान चेतावनी है कि धर्म के बाहरीता से अधिक आंतरिक शुद्धि पर जोर दें।

2) मिस्र के बलिदानियों के चित्र भी एक बहस करते हैं: भगवान चाहते हैं कि न्याय और दया बना रहे, न कि केवल औपचारिक श्रद्धा।

3) अन्य पुराने नबी-ग्रंथों में भी ईश्वर द्वारा आंतरिक परिवर्तन की मांग बार-बार मिलती है, जहाँ कर्म-कौशल से पहले दिल की पवित्रता को महत्त्व दिया गया है।

पूर्वकाल के टिप्पणीकारों के सार

मैथ्यू हेनरी, एलबर्ट बार्न्स और एडम क्लार्क के विचारों का संयुक्त सार इस प्रकार है: वे कहते हैं कि परमेश्वर का अभिप्राय बाह्य आचरण से ऊपर आंतरिक बदलाव पर है। यदि हृदय पवित्र नहीं है, तो ritualistic offerings केवल बहाना बन जाते हैं। (नोट: नीचे उद्धरण केवल संक्षेप रूप में हैं; पूर्ण वाक्यों की प्रतिलिपि नहीं दी गई है।)

आज के लिए अनुप्रयोग

- जिनके पास धार्मिक गतिविधियों का बाहरी ढांचा है, वे यह सोच लें कि क्या उनका हृदय में विश्वास, न्याय और दया भी है।

- व्यक्तिगत आस्था को समुदाय के लिए प्रेरणा बनाएं; ज़रूरतमंदों के साथ व्यवहार और सामाजिक न्याय से संकेत दें कि विश्वास सचमुच जीवित है।

संक्षिप्त समेकन

यशायाह 1:11 में ईश्वर स्पष्ट करते हैं कि पूजा-पाठ और बलि-बलियों से वास्तविक संतोष संभव नहीं; उल्टा, वह मन की पवित्रता, न्याय और दया चाहता है—ताकि बाहरी आचरण आंतरिक विश्वास और प्रेम का ठोस प्रमाण बन सके।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

यशायाह 1:11 समानांतर पद और संबंधित वचन

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1 शमूएल 15:22 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
1 शमूएल 15:22 (HINIRV) »
शमूएल ने कहा, “क्या यहोवा होमबलियों, और मेलबलियों से उतना प्रसन्‍न होता है, जितना कि अपनी बात के माने जाने से प्रसन्‍न होता है? सुन, मानना तो बलि चढ़ाने से और कान लगाना मेढ़ों की चर्बी से उत्तम है। (मर. 12:32,33)

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आमोस 5:21 (HINIRV) »
“मैं तुम्हारे पर्वों से बैर रखता, और उन्हें निकम्मा जानता हूँ, और तुम्हारी महासभाओं से मैं प्रसन्‍न नहीं।

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यिर्मयाह 6:20 (HINIRV) »
मेरे लिये जो लोबान शेबा से, और सुगन्धित नरकट जो दूर देश से आता है, इसका क्या प्रयोजन है? तुम्हारे होमबलियों से मैं प्रसन्‍न नहीं हूँ*, और न तुम्हारे मेलबलि मुझे मीठे लगते हैं।

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