यशायाह 1:24 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

इस कारण प्रभु सेनाओं के यहोवा, इस्राएल के शक्तिमान की यह वाणी है: “सुनो, मैं अपने शत्रुओं को दूर करके शान्ति पाऊँगा, और अपने बैरियों से बदला लूँगा।

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यशायाह 1:24 पद-दर-पद बाइबल टीका

यशायाह 1:24 के लिए केंद्रीय बिंदु

यशायाह 1:24 में प्रभु सेनाओं के yahweh इस्राएल के विरुद्ध उठते शत्रुओं पर विजय पाने की गंभीर प्रतिबद्धता व्यक्त करते हैं—परमेश्वर अपने लोगों के लिए सुरक्षा और नैतिक न्याय की गारंटी देते हैं। इस वाणी से यह स्पष्ट होता है कि परमेश्वर शांति चाहते हैं, पर उसके बर्ताव में बुराई के विरुद्ध सख्ती और बदला दोनों समाहित हैं; वह अपने राष्ट्र के लिए सच्चा उद्धार और पवित्रता का मार्ग घोषित करते हैं।

साहित्यिक प्रसंग ( literary context )

यह पाठ यशायाह के प्रथम अध्याय का भाग है, जहां इस्राएल का भटकाव और परमेश्वर के न्याय-प्रयोजन के बीच तकरार दिखती है। पूर्वकथन में परमेश्वर अपने लोगों की धार्मिक हत्या-उत्साह, कर्म-प्रतिफलन और सामाजिक अन्याय पर कठोर टिप्पणी करते हैं; परंतु 1:24 के संदेश में उद्धार की आशा और सुरक्षा की पुष्टि भी है। यह वाणी एक प्रकार से परमेश्वर के विरुद्ध उठे सुरागों को शांत कर, उसके लोग‑जीवन में सद्भाव और कड़ी नैतिकता लाने की प्रेरणा देती है।

theological significance (धार्मिक महत्त्व)

- परमेश्वर आत्मिक-न्याय की रक्षा करते हैं: शत्रुओं को दूर करना और बैरियों से बदला लेना—यह न्याय के परमात्मा के आभामंच का संकेत है।

- शांति की स्थापना: संतप्त प्रदेशों में व्यवस्था, शुद्ध हृदय और निष्ठावान वचन के द्वारा शांति पुनः स्थापित होती है।

- सत्ता का संतुलन: प्रभु सेनाओं के यहोवा की वाणी से यह सिद्ध होता है कि वह कठोर भी हो सकता है और कृपालु भी—उचित समय पर दंड और उद्धार दोनों को सद्गुणपूर्ण ढंग से प्रस्तुत करते हैं।

कैसे यह अन्य शास्त्रीय पाठों से जुड़ता है

  • यहोशू 24:15 जैसा दृढ़ निर्णय—“जो नर-नारी प्रभु को सेवक बनाकर चलेंगे”—परमेश्वर के उद्धार-योजना के साथ सतत संलग्नता दिखाता है। संकल्प और नैतिक सत्ता का संगम।
  • मीका 7:8-9 में ऊँचे स्वर के बावजूद धैर्य और आशा का संदेश—अन्याय के बीच भी परमेश्वर की रक्षा रहती है।
  • रूहानी शांति की उद्घोषणा: यशायाह 26:3 जैसी स्थिर, निश्चिन्तता की सुरक्षा—जिसमें मन को दृढ़ रखने का आह्वान है।

इन संदर्भों से स्पष्ट होता है कि परमेश्वर न्याय देकर उद्धार करता है, न कि केवल दयालुता के नाम पर चुप बैठ जाता है; उनका उद्देश्य पवित्र जीवन और समाज में सच के शासन को पुनर्स्थापित करना है।

प्रश्न for reflection (विचारोच्चार)

  • क्या मैं अपने जीवन में परमेश्वर के न्याय के साथ शांति और विश्वास को संतुलित कर पाता/पाती हूँ?
  • कैसे मैं अपने समाज में सच और ईमानदारी को बढ़ाने के लिए कदम उठाऊँ?

सार-संक्षेप (concise conclusion)

यशायाह 1:24 यह उद्घोष करता है कि परमेश्वर अपने लोगों के लिए शांति और सुरक्षा चाहते हैं, पर गलत मार्ग और अन्याय पर कठोर निर्णय लेते हैं। यह वाणी हमें यह सिखाती है कि उद्धार और शांति परमेश्वर के पूर्ण योजनाक्रम का हिस्सा हैं—जहाँ पवित्रता और दयालुता एक साथ चलते हैं।

महत्वपूर्ण उद्धरण (केवल Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke से यदि उपलब्ध हो): “...”

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

यशायाह 1:24 समानांतर पद और संबंधित वचन

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व्यवस्थाविवरण 28:63 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
व्यवस्थाविवरण 28:63 (HINIRV) »
और जैसे अब यहोवा को तुम्हारी भलाई और बढ़ती करने से हर्ष होता है, वैसे ही तब उसको तुम्हारा नाश वरन् सत्यानाश करने से हर्ष होगा; और जिस भूमि के अधिकारी होने को तुम जा रहे हो उस पर से तुम उखाड़े जाओगे।

यशायाह 60:16 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
यशायाह 60:16 (HINIRV) »
तू जाति-जाति का दूध पी लेगी, तू राजाओं की छातियाँ चूसेगी; और तू जान लेगी कि मैं यहोवा तेरा उद्धारकर्ता और तेरा छुड़ानेवाला, याकूब का सर्वशक्तिमान हूँ।

यशायाह 61:2 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
यशायाह 61:2 (HINIRV) »
कि यहोवा के प्रसन्‍न रहने के वर्ष का और हमारे परमेश्‍वर के पलटा लेने के दिन का प्रचार करूँ; कि सब विलाप करनेवालों को शान्ति दूँ। (लूका 4:18,19, मत्ती 5:4)

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