Old Testament
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आमोस 3:14 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
जिस समय मैं इस्राएल को उसके अपराधों का दण्ड दूँगा, उसी समय मैं बेतेल की वेदियों को भी दण्ड दूँगा, और वेदी के सींग टूटकर भूमि पर गिर पड़ेंगे।
आमोस 3:14 पद-दर-पद बाइबल टीका
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आमोस 3:14 समानांतर पद और संबंधित वचन
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2 राजाओं 23:15 (HINIRV) »
फिर बेतेल में जो वेदी थी, और जो ऊँचा स्थान नबात के पुत्र यारोबाम ने बनाया था, जिस ने इस्राएल से पाप कराया था, उस वेदी और उस ऊँचे स्थान को उसने ढा दिया, और ऊँचे स्थान को फूँककर बुकनी कर दिया और अशेरा को फूँक दिया।

होशे 10:5 (HINIRV) »
सामरिया के निवासी बेतावेन के बछड़े के लिये डरते रहेंगे, और उसके लोग उसके लिये विलाप करेंगे; और उसके पुजारी जो उसके कारण मगन होते थे उसके प्रताप के लिये इस कारण विलाप करेंगे क्योंकि वह उनमें से उठ गया है।

होशे 10:14 (HINIRV) »
इस कारण तुम्हारे लोगों में हुल्लड़ उठेगा, और तुम्हारे सब गढ़ ऐसे नाश किए जाएँगे जैसा बेतर्बेल नगर युद्ध के समय शल्मन के द्वारा नाश किया गया; उस समय माताएँ अपने बच्चों समेत पटक दी गईं थी।
अर्थ का सीधा सार
आमतौर पराम्स 3:14 में कहा गया है कि जब दण्ड इस्राएल के अपराधों पर लागू होगा, तब बेतेल के वेदी-स्थलों की भी दण्ड होगी; वेदी के सींग टूटकर भूमि पर गिर पड़ेंगे। यह दण्ड और बाध्यता की imagery का संकेत है कि भगवान का न्याय national worship पर भी प्रभाव डालता है और जगह-जगह असंतुलन उजागर होता है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
जो अध्याय और पाठ सामने है, Amos एक नबी है जो उत्तर-छोर के इस्राएल में व्याप्त अशान्ति और पाखण्ड पर चोट करता है। वह यहूदियों के लिए एक जागरूकता वाला संदेश देता है—कि परमेश्वर न्याय के बिना अपने लोगों को क्षमा नहीं करेगा। बेतेल, एक प्रमुख पूजा के केंद्र के रूप में जाना गया, जहाँ वेदी और धार्मिक रीति-रिवाजों का उपहास नहीं; यहाँ दण्ड का संकेत यह दर्शाता है कि बाहरी प्रदर्शन बनिस्बत आंतरिक पवित्रता के, ईश्वर के न्याय के सामने अस्थिर होते हैं।
व्याख्यात्मक विचार
छोटे thematic बिंदु
अन्य अन्वय-पाठ (Cross-references) और संक्षिप्त स्पष्टीकरण
1) योशेवा 6 के प्रसिद्ध नगर-उद्धरणের समानता: ईश्वर के निर्णयों में देव-स्थापना और लोक-विश्वास के बीच का संतुलन स्पष्ट होता है; भ्रमित पूजा-योजना हो तो परिणाम भी परमेश्वर-न्याय से जुड़ते हैं।
2) यशाय 1:11-15 का संपर्क: धार्मिक कर्मकांड और पाप के बीच दूरी को उजागर करता है—आखिरकार आस्थागत आह्वान नैतिक सुधार पर है, न कि बाहरी क्रियाओं पर।
3) मत्ती 23:25-28: बाहरी नैतिकता के साथ आंतरिक पवित्रता को मजबूत करने का निर्देश देता है—यह भी Amos के संदेश के साथ संगत है कि ईश्वर दिखावे से अधिक दिल की चांदनी देखता है।
संक्षिप्त व्यावहारिक निष्कर्ष
हम अपने समय में भी देखें कि धार्मिक क्रिया-कलाप तब तक मूल्यहीन हैं जब वे सामाजिक समता, नैतिक व्यवहार और ईश्वर-केन्द्रित जीवन से अनुपस्थित हों। बाहरी गरिमा के बजाय एक सच्चे दिल की वफादारी और न्याय-संवर्धन ही ईश्वर की चाहत है।
टिप्पणी नोट: इस पाठ में Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के सार्वजनिक-डायरेक्ट शब्द यदि उपलब्ध हों, तो ठीक वहाँ उद्धृत किए गए हैं; नीचे उद्धृत पूर्ण-रीति से यह चेतावनी दी जाती है कि छोटे अनुच्छेदों में उनके विचार संक्षेप में समाहित हैं।