Old Testament
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होशे 10:14 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
इस कारण तुम्हारे लोगों में हुल्लड़ उठेगा, और तुम्हारे सब गढ़ ऐसे नाश किए जाएँगे जैसा बेतर्बेल नगर युद्ध के समय शल्मन के द्वारा नाश किया गया; उस समय माताएँ अपने बच्चों समेत पटक दी गईं थी।
होशे 10:14 पद-दर-पद बाइबल टीका
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होशे 10:14 समानांतर पद और संबंधित वचन
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होशे 13:16 (HINIRV) »
सामरिया दोषी ठहरेगा, क्योंकि उसने अपने परमेश्वर से बलवा किया है; वे तलवार से मारे जाएँगे, उनके बच्चे पटके जाएँगे, और उनकी गर्भवती स्त्रियाँ चीर डाली जाएँगी।

उत्पत्ति 32:11 (HINIRV) »
मेरी विनती सुनकर मुझे मेरे भाई एसाव के हाथ से बचा मैं तो उससे डरता हूँ, कहीं ऐसा न हो कि वह आकर मुझे और माँ समेत लड़कों को भी मार डाले।

2 राजाओं 18:9 (HINIRV) »
राजा हिजकिय्याह के राज्य के चौथे वर्ष में जो एला के पुत्र इस्राएल के राजा होशे के राज्य का सातवाँ वर्ष था, अश्शूर के राजा शल्मनेसेर ने शोमरोन पर चढ़ाई करके उसे घेर लिया।
होशे 10:14 - पंक्तियों का संदर्भ और अर्थ
होशे के भाग में परमेश्वर के आलोचनात्मक संदेश में इस पद में नाशकारी दंड का भयावह चित्र उभरता है। उत्तरदायित्वहीन असत्य-व्यवहार और धर्मभीरुता के विरुद्ध चेतावनी के रूप में इस verse में नगरों के विनाश की भविष्यवाणी है, जब असत्य-राज्य और समाज के बीच शक्ति का गलत प्रयोग सामूहिक विवेक को पतन तक ले जाता है। यहां बतलाया गया है कि जातियाँ और लोग अपनी न crookedता के कारण तुरंत नाश के कगार पर पहुँच जाते हैं, जैसे शल्मन के युद्ध में बेतर्बेल नगरों का विनाश हुआ था।
केंद्रीय अर्थ
इस वाक्य में दो प्रमुख विचार एक साथ चलते हैं: (1) सामाजिक-राजनीतिक असमानता और पापी कर्म के कारण समस्त समुदाय पर एक ध्वंसकारी दंड टूट पड़ता है; (2) मातृमाताओं सहित बच्चों का भयावह तड़पना प्रकट होता है, जो नैतिक पतन के परिणामस्वरूप समाज के भीतर असुरक्षा और करुणाहीनता को दर्शाता है। यह केवल सैनिक विजय का चित्र नहीं, बल्कि व्यक्तियों के विश्वास-व्यवहार और सामाजिक संरचना के अंतःस्थ समाज पर मानवीय मानदंडों के टूटने की चेतावनी है।
ज्यादा गूढ़ तीन विषय
संबद्ध पवित्र ग्रंथ संदर्भ
- इशाया 1:23-24: सामाजिक अन्याय और पाप की गहराई पर प्रहार।
- यिर्मयाह 6:15: पाप के कारण नगरों का पचान और भाग जाना।
- निर्गमन 23:27: भगवान के विरुद्ध की गई कठोरता के परिणामस्वरूप भय और अस्थिरता का आना।
इन संदर्भों में एक सामान्य धारा है: पाप के कारण समाज में अस्थिरता, भय और निराशा बढ़ती है, और परमेश्वर justice का पालन करते हुए दण्ड देता है।
व्यावहारिक विचार
इस पाठ का एक अहम पाठ यह है कि धार्मिक व्यवस्था में केवल बाहरी पूजा पर्याप्त नहीं है; आचरण और सामाजिक न्याय में साधना आवश्यक है। जो लोग नीतिगत ढांचे में भी ईमानदारी नहीं रखते, वे अंततः सामाजिक बन्धनों के टूटने का सामना करेंगे। प्रतिज्ञाओं और कर्तव्यों के पालन से ही समुदाय को स्थिरता मिलती है, वरना भय और हाहाकार के दिन आते हैं।
छोटा सार
होशे 10:14 हमें याद दिलाता है कि जब समाज पाप और मिथ्या शासन की चपेट में आ जाता है, तब विनाश आना स्वाभाविक है—परिवार और समुदाय की रक्षा के लिए सत्य, न्याय और करूणा को पुनः स्थापित करना भी परमेश्वर की इच्छा है।
चिन्हित उद्धरण (public-domain commentators)
Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के समान विचारों में से संकल्पित बिंदु:
— Henry: “यह दायित्वहीन शासन और पाप के कारण ही नगर नष्ट होते हैं।”
— Barnes: “शहरों की यह तबाही पाप के साथ सख्त न्याय का संकेत है।”
— Clarke: “परित्राण न कर पाने पर परिवारों के टूटना और माताओं के साथ बच्चों की पीड़ा एक गम्भीर चेतावनी है।”
टिप्पणी-संरचना
यह पाठ न केवल ऐतिहासिक युद्ध-चित्रण है, बल्कि हर समय सामाजिक-नैतिक आचरण का माप-तोल है। जीवन के ठोस आधार—न्याय, करुणा, और परिवारिक कर्तव्य—की पुनः स्थापना परमेश्वर की महिमा के लिए है।