Old Testament
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होशे 10:7 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
सामरिया अपने राजा समेत जल के बुलबुले के समान मिट जाएगा*।
होशे 10:7 पद-दर-पद बाइबल टीका
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होशे 10:7 समानांतर पद और संबंधित वचन
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होशे 10:3 (HINIRV) »
अब वे कहेंगे, “हमारे कोई राजा नहीं है, क्योंकि हमने यहोवा का भय नहीं माना; इसलिए राजा हमारा क्या कर सकता है?”

1 राजाओं 21:1 (HINIRV) »
नाबोत नाम एक यिज्रेली की एक दाख की बारी शोमरोन के राजा अहाब के राजभवन के पास यिज्रेल में थी।

2 राजाओं 17:4 (HINIRV) »
परन्तु अश्शूर के राजा ने होशे के राजद्रोह की गोष्ठी को जान लिया, क्योंकि उसने सो नामक मिस्र के राजा के पास दूत भेजे थे और अश्शूर के राजा के पास वार्षिक भेंट भेजनी छोड़ दी; इस कारण अश्शूर के राजा ने उसको बन्दी बनाया, और बेड़ी डालकर बन्दीगृह में डाल दिया।
होशे 10:7 का अर्थ और संदर्भ
मूल संदेश यह है: समाज और राज्य-व्यवस्था के崩न के कारण ईश्वर की करुणा और न्याय एक साथ प्रकट होते हैं; जो लोग सत्ता-प्रतिष्ठा के भरोसे रहते हैं, वे तेजी से नष्ट हो सकते हैं और उनके राज भी जल में बनावटी बुलबुलों की तरह मिट जाते हैं।
संदर्भ-पृष्ठभूमि
होशे की किताब में इस्तीना-युग की असंतुलित आस्थाओं के बीच ईश्वर का संदेश है कि इस्राएल के उत्तर-राज्य (यहूदा के विपरीत) में पाप के कारण सामाजिक-धार्मिक ढांचा ढह रहा है। होशे में रस्साकार साक्षात्कार और प्रतीकात्मक शब्दावली सत्ता-स्वार्थ, विदेशी पूजा और सामाजिक अन्याय के विरुद्ध चेतावनी देती है। यहां “सामरिया” (राजधानी) एक प्रमुख प्रतीक है, जो धार्मिक-राजनीतिक भ्रष्टाचार का प्रतिनिधित्व करती है।
विश्लेषणात्मक विचार
मुख्य अनुभाग — 3 प्रमुख निष्कर्ष
संयुक्त Cross-References (संक्षेप में)
1) होशे 13:8-9 — ईश्वर की गहन चिंता, परन्तु उठावना भी; चेतावनी से परिवर्तन की उम्मीद जुड़ी है।
2) असलम 31:3 — राजाओं का शासन मानव-सीमा के भीतर नहीं, परमेश्वर के संरक्षण पर टिके रहने का महत्व।
3) यिर्मयाह 7:4 — बाहरी मंदिर-पवित्रता के पीछे असली आत्मा-निष्ठा की ताकीद।
चूंकिभिन्न कृतवाक्य से एकीकृत निष्कर्ष
यह निश्चय हो कि सामरिया और उसके राजा के जलते बुलबुले एक चेतावनी हैं: शक्ति, धन और राजनीति के सामाजिक ढांचे कितने भी शालिन क्यों न दिखें, यदि उनके भीतर ईश्वर के आने वाले न्याय के अनुरूप परिवर्तन नहीं है, तो वे मिट जाएंगे। परमेश्वर का ट्रेस-खोजी साक्षात्कार वही है जिसे होशे ने पंक्तिबद्ध किया है: वास्तविक सुरक्षा वही है जो नैतिकता, धर्म-सत्य और समुदाय के पुनरुद्धार में निहित हो।
संक्षिप्त बातचीतात्मक निष्कर्ष
1) सत्ता के भरोसे निर्भर रहने के बजाय अपनी आंतरिक आस्था और न्याय-निष्ठा मजबूत करें।
2) सामाजिक-धार्मिक जीवन में पवित्रता और सच-उद्धार के मानदंडों का पुनर्सृजन करें।
3) कठिन समय में परमेश्वर के वचनों पर टिके रहें; वही स्थिर और भरोसेमंद प्रकाश देता है।
सूचनात्मक नोट: इस टिप्पणी में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के प्रवचनों के कुछ संहितागत विचार संकेतनात्मक रूप से शामिल हैं, पर पूर्ण उद्धरण नहीं दिए गए हैं ताकि मौलिक भाषिक प्रवाह बना रहे।