Old Testament
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होशे 10:4 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
वे बातें बनाते और झूठी शपथ खाकर वाचा बाँधते हैं; इस कारण खेत की रेघारियों में धतूरे के समान दण्ड फूले फलेगा।
होशे 10:4 पद-दर-पद बाइबल टीका
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होशे 10:4 समानांतर पद और संबंधित वचन
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आमोस 6:12 (HINIRV) »
क्या घोड़े चट्टान पर दौड़ें? क्या कोई ऐसे स्थान में बैलों से जोते जहाँ तुम लोगों ने न्याय को विष से, और धर्म के फल को कड़वे फल में बदल डाला है?

होशे 4:2 (HINIRV) »
यहाँ श्राप देने, झूठ बोलने, वध करने, चुराने, और व्यभिचार करने को छोड़ कुछ नहीं होता; वे व्यवस्था की सीमा को लाँघकर कुकर्म करते हैं और खून ही खून होता रहता है।*

होशे 10:4 पर व्याख्या का केंद्रीय बिंदु
यहोवा के निकट निस्तेज आचरण और असत्य-प्रतिज्ञाओं के कारण सिंहावलोकन में निष्कर्ष यह निकलता है कि लोग वे धर्मपूर्ण कृतियाँ करते दिखते हैं, पर उनका हृदय धोखे में है। यह पद दिखाता है कि बाहरी परिश्रम और वाचा-बांधना भीतर की प्रवृत्ति से टकराती है जब तक सत्यापन और परिवर्तन न हो। परिणामस्वरूप, उनका खेत-फसल, खेती-बाड़ी सब प्रकार धतूरे के समान विनष्ट हो जाते हैं क्योंकि कर्म-उत्साह खोट से निहित होता है।
रचनात्मक संदर्भ के भीतर पाठ का स्थान
होशे की किताब में इस श्लोक के पीछे कुल मिलाकर इस विचार का प्रवाह है: ईश्वर के साथ टूटे संबंध और असत्य-आचरण के कारण समाज में न्याय और उपकार घटता है। “वे बातें बनाते” और “झूठी शपथ खाकर वाचा बाँधते हैं”—यह स्पष्ट कर देता है कि धर्म के नाम पर दिखावा तथा प्रतिबद्धता का भेद अब तक रहा है। परन्तु ईश्वर इस ढोंग को नहीं बर्दाश्त करते; वे उसकी जड़ को उजागर करते हैं ताकि वास्तविक परिवर्तन आये।
धार्मिक महत्व
यह श्लोक दिखाता है कि आराधना के प्रतीक केवल आचरण नहीं बदलते; यह दिल की हालत का परिणाम है। जब सामाजिक व्यवहार dishonest हो, खेत-खलिहान जैसे व्यवस्थित कार्य भी दण्डित होते हैं, क्योंकि असत्य और भ्रष्टाचार से जीवन के सभी क्षेत्र गड़बड़ा जाते हैं। 하나님 के नजदीक सत्यता, एकता और निष्कपटता आवश्यक हैं ताकि जीवन के सभी हिस्से ईमानदारी से पले-बढ़े।
कुरेशी या पवित्र ग्रंथों के साथ संबंध
- कड़े शब्दों में भाग-धर्म के स्पष्ट दुष्परिणाम। यह होशे की बहनों-भाइयों के लिये एक चेतावनी है कि बाहरी धार्मिकता से अधिक आंतरिक परिवर्तन आवश्यक है।
- अन्य जगहों पर ईश्वर न्याय करता है जब समाज असत्य और घूसखोरी में डूब जाता है; यह क्रमशः सामाजिक नीतियों और व्यक्तिगत नैतिकता पर प्रभाव डालता है।
- पवित्र शास्त्र के कई भाग सत्य-हृदयता और कर्म-निष्ठा के ऊपर केंद्रित हैं; यह श्लोक इन विचारों को एक उन्नत दृश्य देता है।
आत्म-चिंतन के लिए प्रश्न
संक्षिप्त निष्कर्ष
होशे 10:4 हमें याद दिलाता है कि धार्मिक आचरण यदि मन और हृदय से सच नहीं है, तो उसके सभी आडंबर नष्ट होने लगते हैं। ईश्वर सच seeking कराते हैं—यह केवल शब्द नहीं, बल्कि जीवन के हर क्षेत्र में प्रकट होता है।
पठनीय cross-references और संक्षिप्त व्याख्या
- अन्याय और धोखे के कारण व्यवहार-क्षय: नीतिवचन 11:1 जैसे पाठ संदेश की गूँज देता है कि निष्पक्षता ही पूर्ण आशीर्वाद का आधार है।
- दिल की परिवर्तनशीलता और सच्चे दिल से आराधना: मत्यु 22:37-38 में प्रेम के दो मूलभूत नियम दिल-समझ में उतरते हैं।
- सत्य और जीवन की शक्ति: Yशायाह 56:11 जैसे उद्धरण यह स्पष्ट करते हैं कि जब नेता और समाज प्रतिज्ञाओं में असत्य बोलते हैं, तब नैतिकता गिरती है।
महत्वपूर्ण उद्धरण केवल Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke से उपलब्ध संकेतिक पंक्तियाँ हैं: “They make a gain of the word” — Matthew Henry के यथार्थ टिप्पणी शैली में, यदि उपलब्ध हों।