Old Testament
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होशे 10:9 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
हे इस्राएल, तू गिबा के दिनों से पाप करता आया है; वे उसी में बने रहें; क्या वे गिबा में कुटिल मनुष्यों के संग लड़ाई में न फँसें?
होशे 10:9 पद-दर-पद बाइबल टीका
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होशे 10:9 समानांतर पद और संबंधित वचन
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होशे 9:9 (HINIRV) »
वे गिबा के दिनों की भाँति अत्यन्त बिगड़े हैं; इसलिए वह उनके अधर्म की सुधि लेकर उनके पाप का दण्ड देगा।

उत्पत्ति 8:21 (HINIRV) »
इस पर यहोवा ने सुखदायक सुगन्ध पाकर सोचा, “मनुष्य के कारण मैं फिर कभी भूमि को श्राप न दूँगा, यद्यपि मनुष्य के मन में बचपन से जो कुछ उत्पन्न होता है वह बुरा ही होता है; तो भी जैसा मैंने सब जीवों को अब मारा है, वैसा उनको फिर कभी न मारूँगा।

उत्पत्ति 6:5 (HINIRV) »
यहोवा ने देखा कि मनुष्यों की बुराई पृथ्वी पर बढ़ गई है, और उनके मन के विचार में जो कुछ उत्पन्न होता है वह निरन्तर बुरा ही होता है। (भज. 53:2)
होशे 10:9 पर टिप्पणी
पद से स्पष्ट होता है कि इजराइल ने गिबा के दिनों से ही पाप के सिलसिले को नहीं छोड़ा है और उसी में उलझे रहते हैं। गिबा के स्थल का उल्लेख यहाँ एक चेतावनी के तौर पर है कि पाप पथ से दूर हटना उनके लिए संभव नहीं हुआ, और परिणामस्वरूप वे दण्ड के अधीन रहे। पूर्व में गिबा के घटनाक्रमों से यह संकेत मिलते हैं कि आचरण का सतत तिरस्कार परमेश्वर की करुणा के विरुद्ध होता है।
मुख्य अर्थ
इस पवित्र वचन में होशे prophet यह दर्शाते हैं कि इस्राएल पर लम्बे समय से पाप का प्रभाव है, विशेषकर पाप के एक ही चाल में बार-बार फँसना। “गिबा के दिनों से पाप करता आया है” से यह तात्पर्य है कि वे पहली बार से ही गलत मार्ग पर चले हैं और अब तक उसका निराशाजनक क्रम चलता आ रहा है। यहाँ गिबा का संदर्भ केवल एक शहर नहीं, बल्कि मनुष्य की दिमागी और नैतिक समर्पण के पथ पर स्थिर रहने के प्रतीक के रूप में है।
दो-तीन प्रमुख विषय
पश्चाताप और संदर्भ पंछी
- होशे के ग्रंथ में दो अन्य प्रमुख संदर्भों से मिलता-जुलता संदेश है कि इज़राइल को उनका असल भाग खोया नहीं है, परन्तु वे अपने परमेश्वर के साथ फिर से संलग्न हो सकते हैं यदि वे अपने पाप से मुड़ जाएँ।
- अन्य अध्यायों में पवित्रता और सत्य के प्रति वफ़ादारी की वकालत है, जो बताती है कि पाप के विरुद्ध दृढ़ता से खड़े होना पथ-निर्देशन में बदलाव लाता है।
व्यावहारिक विचार
हम किस प्रकार अपने दैनिक जीवन में जड़ें ग़लत आदतों से उखाड़ते हैं? यह पंक्ति बताती है कि सतत जाँच-प्रतिबिंब और परमेश्वर की इच्छा के अनुसार आचरण का पुनःनिर्धारण ही उद्धार की कुंजी है। यदि हम अपने स्वार्थी प्रवृत्तियों या अदल-बदल कर चुके विश्वासघाती रवैये से उबरना चाहते हैं, तो नये मनोदृष्टि के साथ पवित्रता की ओर कदम उठाने की आवश्यकता है।
क्रॉस-रेफरेंसेज (संक्षेप)
- फिरोज़– होशे से मिलते-जुलते संकेत: परमेश्वर की करुणा और न्याय के बीच संतुलन बनाते हुए, पाप से मुक्ति ही उद्धार का रास्ता है।
- अन्य भविष्य-वाणी से जुड़ाव: पाप के क्रम के विरुद्ध आचरण को नवीनीकृत करने की अपील; विश्वासयोग्यता और धर्म-पालन में मजबूती।
नोट: यहाँ क्रॉस-रेफरेंसेज में दिये गए पाठ के पूर्ण उद्धरण नहीं दिए गए हैं; संदर्भ के अनुरूप शब्दों का संक्षेपण प्रस्तुत किया गया है।
संक्षिप्त निष्कर्ष
होशे 10:9 एक कठोर तथ्य प्रस्तुत करता है—पाप की आदत इज़राइल के इतिहास में गहराई तक प्रवेश कर चुकी है। परंतु साथ ही यह स्मरण कराता है कि वही परमेश्वर है जो पाप को चाक-चौबंद तरीके से पकड़ता है और यदि दया के साथ आत्म-निवृत्ति न हो, तो दण्ड भी अवश्य आएगा। इस संदेश से प्रेरणा मिलती है कि पाप के घूंघट से निकलकर सत्य और विश्वास की राह पर चलना संभव है—पर यह मन की सच्ची परिवर्तन पर ही निर्भर है।
उद्धरण के लिए Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के सटीक छोटे उद्धरण आवश्यक हो तो बताइए; यहाँ संक्षेप में ही पाठ का सार दिया गया है।