Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
उत्पत्ति 1 उत्पत्ति 2 उत्पत्ति 3 उत्पत्ति 4 उत्पत्ति 5 उत्पत्ति 6 उत्पत्ति 7 उत्पत्ति 8 उत्पत्ति 9 उत्पत्ति 10 उत्पत्ति 11 उत्पत्ति 12 उत्पत्ति 13 उत्पत्ति 14 उत्पत्ति 15 उत्पत्ति 16 उत्पत्ति 17 उत्पत्ति 18 उत्पत्ति 19 उत्पत्ति 20 उत्पत्ति 21 उत्पत्ति 22 उत्पत्ति 23 उत्पत्ति 24 उत्पत्ति 25 उत्पत्ति 26 उत्पत्ति 27 उत्पत्ति 28 उत्पत्ति 29 उत्पत्ति 30 उत्पत्ति 31 उत्पत्ति 32 उत्पत्ति 33 उत्पत्ति 34 उत्पत्ति 35 उत्पत्ति 36 उत्पत्ति 37 उत्पत्ति 38 उत्पत्ति 39 उत्पत्ति 40 उत्पत्ति 41 उत्पत्ति 42 उत्पत्ति 43 उत्पत्ति 44 उत्पत्ति 45 उत्पत्ति 46 उत्पत्ति 47 उत्पत्ति 48 उत्पत्ति 49 उत्पत्ति 50Verse
उत्पत्ति 6:1 उत्पत्ति 6:2 उत्पत्ति 6:3 उत्पत्ति 6:4 उत्पत्ति 6:5 उत्पत्ति 6:6 उत्पत्ति 6:7 उत्पत्ति 6:8 उत्पत्ति 6:9 उत्पत्ति 6:10 उत्पत्ति 6:11 उत्पत्ति 6:12 उत्पत्ति 6:13 उत्पत्ति 6:14 उत्पत्ति 6:15 उत्पत्ति 6:16 उत्पत्ति 6:17 उत्पत्ति 6:18 उत्पत्ति 6:19 उत्पत्ति 6:20 उत्पत्ति 6:21 उत्पत्ति 6:22



उत्पत्ति 6:5—शाखा-निर्णय के पीछे का हृदय
सीधे शब्दों में कहा जाए तो यह कहा गया है कि परमेश्वर ने देखा: मनुष्यों की बुराई पृथ्वी पर बढ़ती जा रही है और उनके मन के विचार निरंतर बुरे ही होते हैं।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
उत्पत्ति 6 अध्याय कृष्ण-पंथ से पहले के समय का चित्रण करता है, जब पृथ्वी धन्य-भंग और दुष्कर्म से आगे बढ़ चुकी थी। नूह के समय से पहले के मानव-समष्टि का आचरण ईश्वर के विरुद्ध था। इस आयाम में देव-सम्बन्धी असंतोष, सामाजिक अन्याय और नैतिक पतन स्पष्ट रूप से उभरते हैं। यह verse बताता है कि नवजात भ्रष्टाचार के बाहरी परिणाम के साथ ही विचार-प्रधान नैतिक गिरावट भी है, जो परमेश्वर के हृदय को दुख देती है।
विश्लेषणात्मक बिंदु
धार्मिक प्रकार-स्थान (Cross-references) और त्वरित स्पष्टीकरण
सूक्ष्म दार्शनिक निष्कर्ष
यह वाक्य केवल कहता नहीं, बल्कि चेतावनी देता है कि आंतरिक विचारों की दिशा, बाहरी क्रिया से पहले तय होती है। परमेश्वर की दृष्टि में भलाई और बुराई का निर्धारण हमारे हृदय के प्रेरणास्रोत पर निर्भर है, न कि केवल हमारे कर्मों पर।
छोटा व्यावहारिक निष्कर्ष
हम अपने विचारों पर निरंतर निगरानी रखें, क्योंकि परमेश्वर मन की स्थिति से ही व्यवहार का मूल्यांकन करते हैं। प्रभु के साथ_registry-निष्ठा बनाए रखना हमारे दैनिक निर्णयों में महत्त्वपूर्ण है: पवित्रता के लिए प्रार्थना करें, और अपने विचारों को सत्य, प्रेम और सत्य के अनुसार परिवर्तन की मांग करें।
उद्धृत पंक्तियाँ (प्रमुख टिप्पणीकारों से चयनित सार)
Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke जैसे अग्रिम भाग्योदय-पूर्व टिप्पणीकारों के संकेतार्थ नीचे सम्मिलित हैं:
Henry: "The imaginations of the thoughts of the heart are continually evil." (संक्षेप सार)
Barnes: "The wickedness of man is such that it extends to the very purposes and thoughts of the mind." (अनुवादित सार)
Clarke: "God saw that the wickedness of man was great in the earth." (सार)
नोट: ऊपर उल्लेखित उद्धृत भाग केवल संक्षेपात्मक सार हैं; पूर्ण पाठ सीधे उद्धरणों में उपलब्ध है।