Old Testament
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उत्पत्ति 6:18 का हिंदी टीका (HINIRV)
पाद: "परन्तु तेरे संग मैं वाचा बाँधता हूँ; इसलिए तू अपने पुत्रों, स्त्री, और बहुओं समेत जहाज में प्रवेश करना।" यह वाचा परमेश्वर की महती योजना का भाग है जिसे परमपिता ने नूह से कहा। दृष्टि यह है कि संसार के पतन के बीच भी परमेश्वर अपनी प्रतिज्ञाओं के अनुसार एक सुरक्षित योजना बनाते हैं। यह वादा न सिर्फ एक व्यक्तिगत बचाव का है, बल्कि कुल मिलाकर मानव-समुदाय के लिए उद्धार की राह है; नूह और उनके घराने के लिए एक निर्दिष्ट मार्ग निर्धारित किया गया है ताकि वे पृथ्वी पर आगे बढ़ सकें।
मुख्य अर्थ
यह वचन दो तरह के तत्त्वों को जोड़ता है: एक तर्ज़े से, परमेश्वर से नूह पर भरोसा और उसकी प्रभु-चयनिता; दूसरे तर्ज़े से, बचाव के लिए स्पष्ट निर्देश कि कौन-कौन जहाज में प्रवेश करे। यह दिखाता है कि ईश्वर की योजनाएँ आदि-आसान नहीं, पर वे अच्छी तरह परस्पर-सम्बद्ध हैं। नूह को स्पष्ट नहीं केवल व्यक्तिगत सुरक्षा मिलती है, वरन् उसका घर-परिवार भी उद्धार में साथ है—यानी समुदायिक उत्तरदायित्व और आश्रय।
2-3 प्रमुख विषय
अनुक्रमित पाश्चात्य व्याख्या के संकेत
फरिश्तों के साथ अधिष्ठान और बड़े निर्णयों में नूह की भूमिका पर टिप्पणी करते हुए प्रसिद्ध भक्त-पूर्व commentators देखते हैं कि परमेश्वर ने न केवल उसे बचाने के लिए आदेश दिया, बल्कि परिवार के सभी सदस्य के साथ निष्कर्षात्मक भागीदारी बंधी—यह परिवार की एकता और आस्था का संदेश देता है।
संबंधित पवित्र ग्रंथ
कई पासेज़ इस प्रकार की सुरक्षा और विश्वास के साथ संबंध रखते हैं:
व्यावहारिक विचार
हम किस प्रकार अपने परिवार के लिए ईश्वर की वाचा पर टिके रहते हैं? यदि हम अपने घरवालों के लिए स्पष्ट मार्ग निर्धारित करें—आस्था के साथ—तो हमारा जीवन भी उन रास्तों पर चल सकता है जो परमेश्वर ने चुने हैं। यह छोटे-छोटे निर्णयों में भी विश्वास प्रदर्शित करने का अवसर है: घर की सुरक्षा, नैतिकता, और विश्वास की शिक्षा।
संक्षिप्त निष्कर्ष
उत्पत्ति 6:18 में परमेश्वर नूह से उसकी वाचा की पुष्टि करते हैं और बताते हैं कि कैसे वह और उसका परिवार एक साझा उद्धार-द्वार के भीतर प्रवेश करें—यही यह वचन का सार है: विश्वास के साथ निर्देशित जीवन, परिवार की एकता, और ईश्वर की बचाव-योजना का भाग बनना।
क्रॉस-रेफरेंसेस (संक्षिप्त)
1) उ. 7:1—परमेश्वर का कहने पर नूह को अस्तित्व-यात्रा के लिए तैयार रहना।
2) प्रस्थान 12:3—परिवारिक आशीष और संरक्षण का पोषण।
3) रोम 4:16—विश्वास से सीधे जुड़ाव और परिवार-समुदाय की सुरक्षा।