उत्पत्ति 26:1 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

उस देश में अकाल पड़ा, वह उस पहले अकाल से अलग था जो अब्राहम के दिनों में पड़ा था। इसलिए इसहाक गरार को पलिश्तियों के राजा अबीमेलेक के पास गया।

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उत्पत्ति 26:1 पद-दर-पद बाइबल टीका

उत्पत्ति 26:1 पर रीडर-फ्रेंडली अवलोकन

इस Verse में गुजरात के पिता-आनंद के नाते इसहाक के समय की स्थिति दर्शाई गई है। अकाल की पुनरावृत्ति के बीच यह स्पष्ट होता है कि परमेश्वर की कृपा और भरोसा कैसे परीक्षणों के दौरान भी बनाए रहते हैं। पाठ में इसहाक को गरार के देश में जाना पड़ता है, ताकि परिवार की सुरक्षा और दिन-प्रतिदिन के निर्वाह के लिए मार्ग खुल सके। यह घटना हमें ईश्वर के वचन के प्रति आस्था और परिस्थितियों के अनुसार विचलित न होने की शिक्षा देती है।

पद का चिद्द-आत्मा में विश्लेषण

इसहाक, जो अब्राहम के वरदान के उत्तराधिकारी के रूप में आगे बढ़ रहे थे, कठिन समय में भी ईश्वर के वादे को याद रखते हैं। गरार के देश की राह प्रशस्त होती है, जब अकाल ने लोक-जीवन को प्रभावित किया। यह स्थिति हमें यह दिखाती है कि परमेश्वर के बुलावे में लगे रहने से ही आशीष के मार्ग खुलते हैं, भले ही आसपास के इशारे विपरीत क्यों न हों।

मुख्य आध्यात्मिक पाठ

  • धैर्य और विश्वासी आचरण: अकाल के दौरान भी इसहाक ने यात्रा चुनी और परमेश्वर के वादे पर विश्वास रखा।
  • नीति-निर्भरता बनाम आत्म-स्वार्थिता: प्रस्तुति एक संकेत है कि कठिन समय में निर्भय बने रहने से ही ईश्वर की योजना आगे बढ़ती है।

अन्यों पवित्र ग्रंथों के समानार्थीुसंधान

यहोवah के वादे के अनुरूप, इसहाक का गरार जाना—पद-पूर्व में अभिव्यक्त विश्वास और सुरक्षा का संकेत देता है। तुलना करें: कर्न या अन्य स्थानों पर भी संकट के समय परमेश्वर की देखरेख का अनुभव किया गया है; नीतिवचन में भी संकट के बीच धैर्य और मन के शांत रहने की शिक्षा मिलती है।

आचरण-निष्कर्ष (अनुप्रयोग)

- कठिन समय में भी परमेश्वर के वादों पर भरोसा बनाए रखें।

- उचित योजना और सुरक्षा के साथ आगे बढ़ें, पर अपने कदमों के पीछे प्रभु की योजना को मानें।

क्रॉस-रेफरेंसेस (संक्षिप्त उपयोग)

1) उत्पत्ति 12:1-3—अब्राहम के काल में भी परमेश्वर के प्रचार और संसर्ग के बारे में सूचना मिलती है; वादे के अनुरूप चलना आवश्यक है।

2) उत्पत्ति 39:2-3—परमेश्वर के साथ रहने पर विपरीत परिस्थिति में भी सफलता मिलती है; इसहाक का उदाहरण एकल नहीं, बल्कि भरोसे के आदर्श के रूप में प्रस्तुत है।

3) भजन 27:14—धैर्य और आत्मविश्वास बनाए रखने की प्रेरणा देती है कि प्रभु के समय पर भरोसा रखें।

निष्कर्ष

उत्पत्ति 26:1 हमें दिखाता है कि अकाल जैसी कठिन परिस्थितियाँ भी ईश्वर की सामर्थ्य और वफादारी के प्रकाश को कम नहीं करतीं। इसहाक ने गरार के देश में जाना चुना ताकि परमेश्वर के वादे के अनुरूप परिवार का वर्तन और सुरक्षा बनी रहे। यह पाठ हमें यह सिखाता है कि विश्वास में स्थित रहने से ही जीवन के हर नये चरण में ईश्वर की योजना आकार लेती है।

सूत्र-संदर्भ: Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke से आवश्यक संक्षिप्त उद्धरण जो उपलब्ध हों, नीचे दिए गए हैं:

“... (उद्धरण उपलब्ध होने पर उद्धृत)”

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

उत्पत्ति 26:1 समानांतर पद और संबंधित वचन

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उस देश में अकाल पड़ा: इसलिए अब्राम मिस्र देश को चला गया कि वहाँ परदेशी होकर रहे क्योंकि देश में भयंकर अकाल पड़ा था।

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अब्राहम के मरने के पश्चात् परमेश्‍वर ने उसके पुत्र इसहाक को जो लहैरोई नामक कुएँ के पास रहता था, आशीष दी*।

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उन दिनों में ऐसा हुआ कि अबीमेलेक अपने सेनापति पीकोल को संग लेकर अब्राहम से कहने लगा, “जो कुछ तू करता है उसमें परमेश्‍वर तेरे संग रहता है;

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