उत्पत्ति 26:10 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

अबीमेलेक ने कहा, “तूने हम से यह क्या किया? ऐसे तो प्रजा में से कोई तेरी पत्‍नी के साथ सहज से कुकर्म कर सकता, और तू हमको पाप में फँसाता।

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उत्पत्ति 26:10 पद-दर-पद बाइबल टीका

मुख्य बिंदु

उत्तीर्ण प्रकरण में अविभाज्य तथ्य यह है कि दाऊद नहीं, बल्कि इज़राइल के encuentre में भीषण भय और नीति-संरचना के बीच परमेश्वर की प्रतिज्ञाओं के प्रति बाधाओं के बावजूद, अभिमीलेक का अपराध-भय और अबीमेलेक का सावधान-आह्वान दोनो एक साथ सामने आ जाते हैं। उत्पत्ति 26 में इस वच्ना-स्थिति से यह स्पष्ट होता है कि दासता के समय भी अल्लाह की दृष्टि से सच और पवित्रता समान रूप से महत्व रखती है, और मानव-पराध के विरुद्ध सत्य की सुरक्षा आवश्यक है।

साहित्यिक संदर्भ के अनुसार संरचना

यह उद्धरण अबीमेलेक के आशयभरे शब्दों में आता है जब वह याकूब से कहता है कि अगर उसने अपनी पत्नी को “पत्नी” के रूप में प्रस्तुत किया होता, तो यह प्रजा के लिए गलत परिणाम दे सकता था। कथा में यह एक नैतिक चेतावनी है कि न अपनी सुरक्षा के लिए झूठ बोलना और न ही गलत नीति से परमेश्वर के संरक्षण को खतरे में डालना उचित है। पतरों और दबावों के बीच याकूब ने कभी-कभी आत्म-उच्चारण और धोखे से बचना चाहा; यहाँ भी एक ठोस चेतावनी है कि सुरक्षा के लिए सच और पवित्रता ही सर्वोपरि है।

धार्मिक–औचित्य और सिद्धांत

यह वाक्यांश यह संकेत देता है कि परमेश्वर के चयनित व्यक्तियों के साथ reunión और सुरक्षा का संबंध नितांत ईमानदारी और निष्ठा पर है। अबीमेलेक के शब्दों में एक जिम्मेदारी की पेशकश है—अगर पत्नी की वजह से समाज में भ्रष्टाचार हो सकता था, तो सत्य और डर के साथ व्यवहार करना आवश्यक है। यह घटना यह भी बताती है कि ईश्वर अपने लोगों के साथ सहज-सुरक्षा के नियम नहीं तोड़ते; बल्कि वे अपने दूतों और प्रणालियों के द्वारा मार्गदर्शन करते हैं।

अनुवाद-आकृति और विद्यमान उद्धरण

यह संदर्भ HINIRV अनुवाद में है। अगर आप Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के स्पष्ट उद्धरणों की तलाश करें, तो वे इस प्रकार के नैतिक स्वर को पकड़ते हैं—धोखे के स्थान पर स्पष्ट और निर्दोष व्यवहार सुरक्षा का मार्ग है; और परमेश्वर की प्रतिज्ञाओं के पालन में सत्य ही सबसे बड़ा मार्गदर्शक है।

क्रॉस-रेफरेंसे

  • उत्पत्ति 12:13-14 — अहंकार और असत्य से बचना; परमेश्वर के द्वारा दी जा रही रक्षा के लिए सत्य की आवश्यकता।
  • प्रेरणा 12:9 — सत्य और विश्वास की स्थिरता; दुष्ट-युग में भी ईमानदारी की प्रतिष्ठा।
  • यहेोशू 2:11 — सत्य की खोज और विश्वास का मार्ग, जो समुदाय को सुरक्षित बनाता है।

ये संदर्भ बताते हैं कि सच बोलना और ईश्वर के संरक्षण के प्रति विश्वास एक ही धुरी पर चलते हैं, और प्रजा-कल्याण इस धुरी पर टिका है।

परिस्थितिजन्य प्रश्न

  • क्या आप समय-समय पर दबाव के कारण सत्य से भटक जाते हैं? कैसे परमेश्वर के मार्ग के अनुरूप निर्णय लिया जा सकता है?
  • क्या कभी आपने सुरक्षा के कारण सत्य से समझौता करने की कोशिश की है? उसके परिणाम कैसे रहे?
  • आपके जीवन में कौन से पल हैं जहाँ सत्य ही सबसे बड़ा सुरक्षा-साधन बना?

संक्षिप्त निष्कर्ष

उत्पत्ति 26:10 हमें याद दिलाता है कि परमेश्वर के बच्चों की सुरक्षा सत्य और निष्कपट नीति पर निर्भर है, न कि छल-कपट पर। अबीमेलेक के चेतावनी शब्द इस बात को स्पष्ट करते हैं कि भौतिक सुरक्षा भी परमेश्वर की ओर से आती है; और यदि हम गलती कर के सत्य से विचलित होते हैं, तो परिणाम में न केवल व्यक्तिगत पाप बनता है, बल्कि समुदाय को भी खतरा होता है। यीशु-आसमानी जीवन की राह में सत्य ही मार्गदर्शक है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

उत्पत्ति 26:10 समानांतर पद और संबंधित वचन

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तब फ़िरौन ने अब्राम को बुलवाकर कहा, “तूने मेरे साथ यह क्या किया? तूने मुझे क्यों नहीं बताया कि वह तेरी पत्‍नी है?

उत्पत्ति 20:9 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
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तब अबीमेलेक ने अब्राहम को बुलवाकर कहा, “तूने हम से यह क्या किया है? और मैंने तेरा क्या बिगाड़ा था कि तूने मेरे और मेरे राज्य के ऊपर ऐसा बड़ा पाप डाल दिया है? तूने मेरे साथ वह काम किया है जो उचित न था।”

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