उत्पत्ति 26:35 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

और इन स्त्रियों के कारण इसहाक और रिबका के मन को खेद हुआ।

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उत्पत्ति 26:35 पद-दर-पद बाइबल टीका

उत्पत्ति 26:35 का प्रचारार्थ व्याख्या (HINIRV)

पद में कहा गया है: “और इन स्त्रियों के कारण इसहाक और रिबका के मन को खेद हुआ।” यह घटना इसहाक के समय के परिवारिक तनाव और वैवाहिक संबंधों की संवेदनशीलता को उजागर करती है। परमेश्वर के चुने हुए वंश को सुरक्षित रखने की योजना के बीच घरेलू परिवेश में आए दुख और द्वंद्व दिखते हैं। शाप-स्वरूप नहीं, बल्कि मानवीय कमजोरियाँ, भय और दबावों के कारण यह खेद उत्पन्न होता है—जब परिवार के निर्णय दूसरे परंपरागत समझ-बूझ से टकराते हैं।

केंद्रीय विचार

यह पद दिखाता है कि इतिहास के ठोस मोड़ पर भी दम्पत्ति के बीच कैसे मतभेद, असंतोष या चिंता उभर सकती है, परन्तु परमेश्वर की वाणी और वंश का लाभनिष्ठ उद्देश्य बना रहता है। इसहाक और रिबका के लिए यह समय, उनका सन्तुलन और विश्वास की परीक्षा का था; वे अपने पुत्रों को समान रूप से स्वीकारने के प्रयास में थे, जबकि नतीजे में दोनों पलों के बीच संतुलन बनाए रखना कठिन था।

मुख्य विषय (2–3)

  • परिवारिक तनाव और निर्णय: भूमि-आधारित व्यवहारिक दबावों में भी बंधुओं के बीच पारिवारिक सहयोग कैसे बना रहे, यह एक प्रेरक प्रश्न है।
  • विश्वास और योजना का संतुलन: परमेश्वर की वाणी ज्ञात होते समय भी इंसानी मन दुविधा में रहता है; इसहाक-रिबका के अनुभव में विश्वास और समझ का सामंजस्य खोजा गया।
  • नैतिक उत्तरदायित्व: पति-पत्नी के रिश्ते में एक-दूसरे के विचारों का सम्मान और समझदारी की भूमिका का विचार बना रहता है।

संदर्भित आयतन (Cross-references)

1) उत्पत्ति 25:28-34 — यहोवah के अगले वंशसूत्र के भीतर पुत्र-प्रतिद्वंद्विता और जन्म-पूर्व आह्लाद से भरी घटनाओं को समझाने में मदद करता है।

2) उत्पत्ति 27:41-45 — यहाँ पर पिता-आवंटन और पुत्र-क्रोध के संदर्भ मिलते हैं, जो परिवारिक निर्णयों पर प्रभाव डालते हैं।

3) जमाने के नैतिक पाठ: गलातियों के बीच, परमेश्वर की योजना के अनुसार सुधार और समाधान कैसे संभव हो, इसका संकेत मिलता है।

व्यावहारिक विचार

घरेलू जीवन में तनाव के समय प्रेम और विश्वास के सूत्र पर टिके रहना चाहिए। जैसे इसहाक और रिबका ने अपने बेटों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की, वैसे ही आज भी माता-पिता को अपने बच्चों के प्रति निष्पक्षता, साहचर्य और तीसरे पक्ष की समझ को बनाए रखना चाहिए। प्रेरणा यह है कि त्रुटियाँ होते हुए भी परमेश्वर की इच्छा प्रथम आनी चाहिए—यही परिवार की स्थिरता का आधार बनता है।

संक्षिप्त निष्कर्ष

इसहाक और रिबका के मन को खेद हुआ, पर यह स्मरण कराता है कि परमेश्वर की योजना मानव सीमाओं के ऊपर है। संघर्ष के दौरान भी विश्वास और संवाद से मार्ग निकलता है, और परिवार के लिए आगे बढ़ने का रास्ता खुलता है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

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फिर रिबका ने इसहाक से कहा, “हित्ती लड़कियों के कारण मैं अपने प्राण से घिन करती हूँ; इसलिए यदि ऐसी हित्ती लड़कियों में से, जैसी इस देश की लड़कियाँ हैं, याकूब भी एक को कहीं ब्याह ले, तो मेरे जीवन में क्या लाभ होगा?”

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