उत्पत्ति 26:21 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

फिर उन्होंने दूसरा कुआँ खोदा; और उन्होंने उसके लिये भी झगड़ा किया, इसलिए उसने उसका नाम सित्ना रखा।

पिछला पद
« उत्पत्ति 26:20

उत्पत्ति 26:21 पद-दर-पद बाइबल टीका

क्यों यह वाक्य महत्व रखता है

उत्पत्ति 26:21 में याकूब के समय फिर से कुआँ खोदे जाने की घटना हमें यह याद दिलाती है कि परमेश्वर के वरदान के लिए धैर्य और सतत प्रयास आवश्यक हैं। जब हमारे सम्बंध और हित क्षेत्र संघर्षों से घिरे हों, तब भी ईश्वर अपनी योजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए मार्ग बनाते रहते हैं। यह व verse बताती है कि सफलता कभी भी एक क्षण की बात नहीं, बल्कि निरंतर विश्वास और प्रार्थना से आती है।

संक्षिप्त पृष्‍ठभूमि

यह कथा पृष्ठभूमि देती है: इज्राइलियों के बिन-झगड़े के समय भी कुंए एक दूसरे से छीन लिए जाते थे, क्योंकि पानी का स्रोत जीवन के लिए अत्यावश्यक था। इस कथा में याकूब और उसके पुत्रों के बीच सिद्र के स्थान पर भी झगड़ा होता है, और सित्ना नामक कुएँ का नामकरण होता है—“झगड़े का स्थान।” यह स्पष्ट करता है कि संसारिक संघर्ष कितने भी प्रयास करें, परमेश्वर के उद्देश्य कमजोर नहीं होते; वह उन कठिनाइयों में भी मार्ग दिखाते हैं।

मुख्य संदेश

- बाधाओं के बीच भी सत्यापन और धैर्य से आगे बढ़ना चाहिए।

- जीवन के अधिकांश कार्य सामाजिक परिवेश और अधिकारों के संघर्ष से गुज़रते हैं, परन्तु परमेश्वर उन हर असयमों के बावजूद अपनी योजना को आगे बढ़ाते हैं।

- कुओँ के विवाद में भी पिता-पुत्र के रिश्ते और समुदाय के साथ भागीदारी का महत्व उभरता है।

व्याख्यात्मक सूत्र

याकूब का परिवार जहाँ पहले एक स्थान पर रहता था, वहाँ पानी के स्रोत के लिए दबदबा और वितरण के कारण टकराव बढ़े। सित्ना का नामकरण इस तथ्य को दर्शाता है कि मानव-स्वार्थ पानी की दौड़ में भी टकराव पैदा कर सकता है, परन्तु ईश्वर का समर्थन और पुरानी परंपराओं के साथ जुड़ना शांति और स्थिरता को बनाए रखता है।

क्रॉस-रेफरेंस (संदर्भ) और संक्षिप्त स्पष्टीकरण

  • यहोशू 18:3-7 — जमीन और जल के अधिकार नेत्रित करते हैं; यह संकेत देता है कि प्रजा के साथ कानूनी और सामाजिक सुदृढ़ता परमेश्वर के राज्य के साथ नज़दीकी से जुड़ती है।
  • यहोवा के बन्धन का आशय — जल का स्रोत जीवन का प्रतीक है; कुएँ विवाद में देखा गया है कि ईश्वर के उद्देश्य के लिए एकता और साझा लाभ कैसे संभव हो सकता है।
  • यशायाह 58:11 — परमेश्वर के मार्गदर्शन में निरंतरता और दिशा मिलती है; कठिनाइयों के बीच भी ईश्वर एक मार्ग बनाते हैं।

हला-हला (डेवोटेशनल) विचार

अगर हम अपने संबंधों में “सित्ना” जैसे अनुभवों से जूझते हैं—यानी हर निर्णय पर विवाद और खींचतान—तो भी ईश्वर उस स्थिति में भी काम करते हैं ताकि हम सत्य, ईमानदारी, और साझा लाभ को बढ़ावा दें। यह कथा हमें सिखाती है कि धैर्य और समुदाय के लिए शुभ विचार, न केवल व्यक्तिगत लाभ, बल्कि पूरे समाज के लिए बेहतर परिणाम ला सकते हैं।

कथन-बिंदु

1) विवाद के बीच भी जीवन के स्रोत के लिए प्रयास जारी रहने चाहिए।

2) समुदाय-निर्माण के मूल्य को कम नहीं आँकना चाहिए; एकता से ही समाधान निकलता है।

3) प्रभु की योजना में कठिनाइयों के बावजूद मार्ग बनते हैं, यदि हम विश्वास में रहें।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

उत्पत्ति 26:21 समानांतर पद और संबंधित वचन

उन बाइबल पदों को देखें जो विषय, शिक्षा या संदर्भ के आधार पर इस अंश से जुड़े हैं। समानांतर पदों की तुलना करने से इस वचन के संदर्भ और संदेश को अधिक गहराई से समझने में सहायता मिलती है। किसी चित्र को चुनें और संबंधित पद, उसकी व्याख्या तथा पद-दर-पद बाइबल टीका देखें।

एज्रा 4:6 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
एज्रा 4:6 (HINIRV) »
क्षयर्ष के राज्य के आरम्भिक दिनों में उन्होंने यहूदा और यरूशलेम के निवासियों का दोषपत्र उसे लिख भेजा।

HINIRV बाइबल की पुस्तक चुनें