उत्पत्ति 26:12 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

फिर इसहाक ने उस देश में जोता बोया, और उसी वर्ष में सौ गुणा फल पाया*; और यहोवा ने उसको आशीष दी,

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उत्पत्ति 26:12 पद-दर-पद बाइबल टीका

उत्पत्ति 26:12 का महत्त्व और संदर्भ

इस पद का संदेश यही नहीं कि इसहाक ने खेती से धनुष बनाए, बल्कि यह दिखाता है कि परमेश्वर की आशीष विश्वसनीय खेती और धीरता पर कैसी निविष्ट होती है। यह दया के साथ कर्म करने की प्रार्थना-योग्यता, दृढ़ विश्वास और परमेश्वर की प्रतिज्ञाओं के साथ सहभागिता का उदाहरण है। इसहाक ने जैसे खेत जोते, वैसे ही परमेश्वर ने उसी वर्ष उसे सौ गुणा फल दिया—यह आश्वासन कि वह रामबाण नहीं, बल्कि समय-सारिणी के भीतर निरंतर आशीष देता है।

पारंपरिक संदर्भ में मूल संदर्भ

यह अध्याय पूर्वजों के बारिश-ख़तरे और भूमि-प्राप्ति के अवसरों के बीच आता है। इसहाक, जो अब्राहम का पुत्र है, उसे परमेश्वर का वचन प्राप्त है कि उसकी जाति भूमि-जगत में भरी-भरी होगी और đất उनकी होगी। इस घटना में खेती का प्रयास और परमेश्वर की प्रतिफल—दोनों एक साथ दिखते हैं। यह दर्शाता है कि ईश्वर के निर्देशों के अनुसार मेहनत करने पर आशीष स्वतः आती है, भले ही बाहरी परिस्थितियाँ विपरीत क्यों न हों।

मुख्य संदेश

  • विश्वास के साथ श्रम करना परमेश्वर की आशीष को आमंत्रित करता है।
  • धन और सफलता परमेश्वर की कृपा का परिणाम है, हमारी योग्यता का प्रमाण नहीं।
  • आत्मिक निर्भरता पर जोर: परमेश्वर का आशीर्वाद सही और समय पर मिलता है जब हम उसे ही महत्व दें।

धर्मशास्त्रीय अनुशीलन

यह दृश्य हमारे विश्वास के यात्रा-पथ पर प्रेरणा देता है कि छोटी-सी शुरुआत भी परमेश्वर की कृपा से बड़े परिणाम दे सकती है। साथ ही, यह शिक्षा देता है कि सुरक्षा सिर्फ संपत्ति से नहीं, बल्कि परमेश्वर के अनुसार जीवनयापन से मिलती है।

क्रॉस-रेफरेंसेस (संकेत मात्र, संपूर्ण पद नहीं)

- भूखे-प्यासे के बीच भरोसा रखने पर परमेश्वर की आशीष: प्रेरित 4:36-37 के समान, जहां विशिष्ट अवसर पर ईश्वर का वरदान दिखता है।

- विश्वास के कारण आशीष की वृद्धि: यूहन्ना 15:5 की आत्म-संबंधित शिक्षा में दृढ़ सम्बन्ध का महत्व।

- परमेश्वर की प्रतिज्ञाओं के अनुरूप कर्म करना: रोम 11:6 के अलंकार से जुड़ाव।

व्यावहारिक अनुप्रयोग

1) अपने पूरक-परिस्थितियों में धीर-हेतु आस्था बनाए रखें और मेहनत से प्रयास करते रहें।

2) आशीष को एक भय से नहीं, एक उत्तरदायित्व के रूप में देखें; ईश्वर के मार्गदर्शन में अपनी खूबियों का उपयोग करें।

निष्कर्षा-आत्म-चिंतन

उत्पत्ति 26:12 यह स्मरण कराता है कि परमेश्वर की आशीष, विश्वास और मेहनत के संगम से आती है। यदि हम जीवन के हर क्षेत्र में परमेश्वर को सर्वोपरि मानते हैं और अपने कर्मों को उसकी आज्ञाओं के अनुसार ढालते हैं, तो समय स्वयं हमें फल-फूल दे देगा।

संक्षिप्त उद्धरण (public-domain से संबंधित)

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उत्पत्ति 26:12 समानांतर पद और संबंधित वचन

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उत्पत्ति 26:3 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
उत्पत्ति 26:3 (HINIRV) »
तू इसी देश में रह, और मैं तेरे संग रहूँगा, और तुझे आशीष दूँगा; और ये सब देश मैं तुझको, और तेरे वंश को दूँगा; और जो शपथ मैंने तेरे पिता अब्राहम से खाई थी, उसे मैं पूरी करूँगा।

उत्पत्ति 24:1 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
उत्पत्ति 24:1 (HINIRV) »
अब्राहम अब वृद्ध हो गया था और उसकी आयु बहुत थी और यहोवा ने सब बातों में उसको आशीष दी थी।

मरकुस 4:8 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
मरकुस 4:8 (HINIRV) »
परन्तु कुछ अच्छी भूमि पर गिरा; और वह उगा, और बढ़कर फलवन्त हुआ; और कोई तीस गुणा, कोई साठ गुणा और कोई सौ गुणा फल लाया।”

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