उत्पत्ति 29:1 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

फिर याकूब ने अपना मार्ग लिया, और पूर्वियों के देश में आया।

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उत्पत्ति 29:1 पद-दर-पद बाइबल टीका

उत्पत्ति 29:1 पर टिप्पणी

पद का संदर्भ कथा-धारा में याकूब की यात्रा की दिशा को रेखांकित करता है जब वह पूर्वियों के देश की ओर बढ़ता है। यह प्रसंग अब्राहम के वंशज के रूप में याकूब की यात्रा-यात्रा का एक भाग है, जिसकी परिणति उसे लहेड के पास पहुँचाती है, जहां उसकी दुल्हन के लिए नियत यात्रा शुरू होती है। यह छाप इस बात की पुष्टि करती है कि परमेश्वर के वादे और योजनाएँ क्रमबद्ध गति से आगे बढ़ती रहती हैं, चाहे पुरुषों की चाल-चालनियाँ कैसी भी हों।

मुख्य अर्थ

यह वचन बताता है कि याकूब ने अपना मार्ग जारी रखा और पूर्वियों के देश में पहुँच गया। यह एक प्रगति-चिह्न है: पिता-धर्मी विविधता के साथ परमेश्वर के आशीर्वाद के पथ पर यात्रा करना। पूर्वी क्षेत्र अधिकतर सभ्यता के केंद्रों के रूप में दिखते हैं, जहां यात्रियों को अवसरों और चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। इसका आशय यह है कि सफलता या उद्देश्य की पूर्ति तब संभव है जब ईश्वर के निर्देशों के अनुसार कदम बढ़ाए जाएँ।

कुंजी विषय (2–3)

  • यात्रा और धैर्य: याकूब की यात्रा निरंतरता संकेत करती है कि परमेश्वर के वादे के लिए धैर्य और दृढ़ता ज़रूरी है।
  • आशीर्वाद की दिशा: पूर्वियों के देश में पहुँचना भविष्य की योजना के अनुसार एक कदम-चालित क्रम है, जो परमेश्वर के वचन के अनुरूप है।
  • नयी मंज़िलों की प्रतीक्षा: हर यात्रा नए अवसरों और जवाबदेही को जन्म देती है, जैसे याकूब के जीवन में समय-समय पर परिवर्तन आते हैं।

संबद्ध पाठ

– हिनिर्व अनुवाद में यह दृश्य जैकब के पथ-निर्देशन को सरल बनाता है, जो आगे उसकी योजना के अनुसार चलता है।

– उत्पत्ति 28:10–22 में याकूब के poursuiving सपनों और जन्म-यात्रा की प्रेरणा मिलती है।

– उत्पत्ति 32:3–21 में याकूब की मिलन-यात्रा और पारिवारिक आशीर्वाद के संदर्भ मिलते हैं।

इन संदर्भों से स्पष्ट होता है कि परमेश्वर की योजना इतिहास के हर चक्र में क्रमानुसार खुलती है, और व्यक्ति के अनुभव उसे आगे बढ़ाते हैं।

व्यावहारिक विचार

हम भी अपनी जीवन-यात्रा में तबाही-भरे क्षणों के बीच विश्वास बनाए रखें। चाहे मार्ग कितना ही कठिन क्यों न लगे, परमेश्वर के वादे सच रहते हैं, और हमें-guide करते हैं। धैर्य और ईमानदारी से कदम बढ़ाने पर ही जीवन की नई मंज़िलें खुलती हैं।

संक्षिप्त निष्कर्ष

उत्पत्ति 29:1 हमें यह याद दिलाता है कि परमेश्वर के वचन के अनुसार यात्रा जारी रखना—भले ही राह जटिल हो—आशीर्वाद और आगे की योजना की दिशा तय करता है। इस प्रवाह में हर कदम एक विश्वासी को परमेश्वर के वादे के निकट ले जाता है।

पुनर्प्रकाशित परामर्श

याकूब के अनुभव से प्रेरित होकर पाठक यह देख सकता है कि destination नहीं, बल्कि मार्ग में आस्था और ईश्वर के मार्गदर्शन की संपूर्णता महत्वपूर्ण है।

कृपया ध्यान दें: नीचे उद्धृत स्रोतों में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke से मिलते-जुलते विचारों के संक्षिप्त संकेत दिए गए हैं; यदि किसी टिप्पणीकार के स्पष्ट शब्द सीधे उद्धृत हों तो वे नीचे संकेतित होंगे।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

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और जब-जब इस्राएली बीज बोते तब-तब मिद्यानी और अमालेकी और पूर्वी लोग उनके विरुद्ध चढ़ाई करके

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इसके बाद सब मिद्यानी और अमालेकी और पूर्वी इकट्ठे हुए, और पार आकर यिज्रेल की तराई में डेरे डाले।

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याकूब अराम के मैदान में भाग गया था; वहाँ इस्राएल ने एक पत्‍नी के लिये सेवा की, और पत्‍नी के लिये वह चरवाही करता था।

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