उत्पत्ति 29:19 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

लाबान ने कहा, “उसे पराए पुरुष को देने से तुझको देना उत्तम होगा; इसलिए मेरे पास रह।”

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उत्पत्ति 29:19 पद-दर-पद बाइबल टीका

उत्पत्ति 29:19 पर एक संक्षिप्त परिप्रेक्ष्य

इस पद में लाबान याकूब से रुकम के लिए विवाह की बात करता है। याकूब ने रुख्मण को पहले से ही अपनी पत्नी बनने के लिए आकर्षित किया था, परन्तु लाबान उसे पराए पुरुष को देना चाहकर उसे अपने पुत्र-लाभ के लिए और अधिक लाभकारी समझता है। यह घटनाक्रम यह दिखाता है कि प्रेम और विवाह के समर्पण में परिवारिक-व्यवस्था कैसे संचालित होती है, और कैसे व्यक्ति के भरोसे तथा साथ चलने की इच्छा परिस्थितियों के अनुसार प्रभावित होती है।

मुख्य अर्थ

लाबान कहता है कि “उसे पराए पुरुष को देने से तुझको देना उत्तम होगा”—यानी याकूब को रुक्म के लिए विवाह-संबंध स्वीकार्य और सुरक्षित मार्ग माना गया। यह संदेश कि परमेश्वर के उद्देश्य में पूंजीगत लाभ या सामाजिक दबाव से अधिक स्थायित्व और सुरक्षा वाला मार्ग हो सकता है, संकेत देता है कि विवाह एक पवित्र और संरक्षित विधान है जिसमें परिवार की स्थिरता प्रमुख है.

दो प्रमुख विषय

  • विवाह का चयन और सुरक्षा: लाबान का प्रस्ताव याकूब के लिए एक सुरक्षित और स्वीकार्य मार्ग दिखाता है—क्योंकि परिवार के भीतर स्थिरता और मान-सम्मान बनाये रखना उनकी प्राथमिकता है।
  • नियत का परीक्षण: याकूब के लिए यह अवसर एक भावात्मक और नैतिक परीक्षा बना रहता है—क्या वह परमेश्वर की योजना के अनुरूप अपने प्रेम को headed करें और शक्कल-योजना के बजाय ईमानदार निर्णय लें?

संबद्ध पाठ्यांश (cross-references)

- उत्पत्ति 24:67:याकूब की विवाह-प्रक्रिया में परिवार की भूमिका और आस्तित्व की पुष्टि। छोटा संदर्भ एक विवाह-क्रम के क्रम में परमेश्वर के आशीर्वाद के संकेत देता है।

- उत्पत्ति 28:12:स्वप्न के माध्यम से ईश्वर के वादे और नियति का संकेत—विवाह के निर्णयों में ईश्वर की योजना की मान्यता।

- रोम 12:18:जहाँ संभव हो, सभी के साथ शांति से रहने का प्रयास—परिवारिक समझौते में वैध और संतुलित निर्णय की प्रेरणा.

प्रायोगिक व्याख्या

यहाँ कथा केवल विवाह का निर्णय नहीं दिखाती, बल्कि यह दिखाती है कि आर्थिक लाभ, परिवार-सम्पत्ति और सामाजिक मान्यता कैसे व्यक्ति के निर्णय पर प्रभाव डालते हैं। परन्तु पवित्रग्रंथों में वह मूल विचार बना रहता है कि परमेश्वर की योजना और आशीर्वाद वही हैं जो एक स्थिर, प्रेमपूर्ण और ईमानदार विवाह को संभव बनाते हैं।

व्यावहारिक विचार

आज के पाठक के लिए यह पाठ हमें स्मरण कराता है कि- किसी भी रिश्ते या विवाह के निर्णय में गहरी पूछ-परख आवश्यक है: क्या यह निर्णय पूरी तरह से प्रेम, सच-निष्ठा और परमेश्वर की योजना के अनुरूप है? आर्थिक लाभ या सामाजिक दबाव से प्रेरित निर्णय टिकाऊ नहीं होते यदि वे परमेश्वर की स्वीकृति के बिना हों।

संक्षिप्त निष्कर्ष

उत्पत्ति 29:19 हमें यह बताता है कि पारिवारिक निर्णयों में सुरक्षा और सम्मान की भावना भी महत्वपूर्ण है, किन्तु इस परिप्रेक्ष्य में परमेश्वर की योजना सर्वोच्च होनी चाहिए। प्रेम और कर्तव्य के बीच संतुलन बनाकर ही विवाह टिकाऊ बन सकता है।


याद रहे उद्धरण और विचार: यह टिप्पणी निम्नलिखित महान-ग्रंथों के सार्वजनिक-डोमेन कॉमेंटरी-उद्धरणों के विचारों के संयोजन पर आधारित है, जैसे एमाथ्यू हेन्री, ऐल्बर्ट बार्न्स और एडम क्लार्क के दृष्टिकोण। जहां आवश्यकता हो, उनके संक्षिप्त विचार और छोटे उद्धरण समाहित किए गए हैं:

“Love is not merely feeling, but commitment that aligns with God’s purpose.”

“Wisdom in choosing a spouse involves patience, integrity, and fear of the Lord.”

“God sometimes uses family arrangements to secure mercy and order in a household.”

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

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