Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
उत्पत्ति 1 उत्पत्ति 2 उत्पत्ति 3 उत्पत्ति 4 उत्पत्ति 5 उत्पत्ति 6 उत्पत्ति 7 उत्पत्ति 8 उत्पत्ति 9 उत्पत्ति 10 उत्पत्ति 11 उत्पत्ति 12 उत्पत्ति 13 उत्पत्ति 14 उत्पत्ति 15 उत्पत्ति 16 उत्पत्ति 17 उत्पत्ति 18 उत्पत्ति 19 उत्पत्ति 20 उत्पत्ति 21 उत्पत्ति 22 उत्पत्ति 23 उत्पत्ति 24 उत्पत्ति 25 उत्पत्ति 26 उत्पत्ति 27 उत्पत्ति 28 उत्पत्ति 29 उत्पत्ति 30 उत्पत्ति 31 उत्पत्ति 32 उत्पत्ति 33 उत्पत्ति 34 उत्पत्ति 35 उत्पत्ति 36 उत्पत्ति 37 उत्पत्ति 38 उत्पत्ति 39 उत्पत्ति 40 उत्पत्ति 41 उत्पत्ति 42 उत्पत्ति 43 उत्पत्ति 44 उत्पत्ति 45 उत्पत्ति 46 उत्पत्ति 47 उत्पत्ति 48 उत्पत्ति 49 उत्पत्ति 50



यथार्थ अर्थ-सार: उत्पत्ति 13:1
मुख्य बात यह है कि अब्राम अपनी पत्नी सारा के साथ और अपनी सारी संपत्ति लेकर कनान से मिस्र की ओर नहीं गया, बल्कि लूत को भी अपने साथ रखकर, कनान के दक्षिण देश में आ पहुंचा। इस वच्छर में कुल मिलाकर निर्णय, संस्थान और परिवार-बंधन का मिलाजुला चित्र उभरता है: अब्राम एक ईश्वरीय बुलाहट के साथ आगे बढ़ते हैं, पर उनके संसाधन और रिश्ते उनकी यात्रा के मार्ग-निर्देशन में प्रमुख भूमिका निभाते हैं।
पृष्ठभूमि और सन्दर्भ
पूर्वकथन में बतलाया गया है कि अब्राम (आब्राम) और लूत एक-दूसरे के साथ थे; अब्राम ने ईश्वर की वचनानुसार कनान के राष्ट्र-स्थल को अपने जीवन-यात्रा का लक्ष्य चुना। इस अध्याय के पहले भाग में यह भी संकेत मिलता है कि परिवार-सम्बन्धों के कारण उनके कदम समय-समय पर बदले गए, परंतु ईश्वर की आशीष उनके साथ बनी रही। 13 अध्याय क्रमानुसार भविष्य की संबन्धों और भू-राजनीति के एक संकेतक की तरह है, जहाँ क्षेत्र-चयन और प्रभु की योजना स्थिर रहती है।
interpretive observations
छोटा विषय-वाचन (थीमैटिक बिंदु)
क्रॉस-रेफरेंसेस (संक्षेप में, सन्दर्भ उद्धरण के रूप में)
यथार्थ प्रेरणा देने वाले अन्य बाइबल पाठ, जो इस घटना के साथ सम्बन्ध बनाते हैं, वे निम्न हैं:
संक्षिप्त व्यावहारिक निष्कर्ष
हमारे जीवन में निर्णय लेते समय अकसर संसाधन और सुरक्षा का विचार आता है, परन्तु ईश्वर की योजना के अनुसार मार्ग चुनना अधिक स्थिर एवं सुरक्षित होता है। परिवार के साथ चलना, विश्वासपूर्वक और ईमानदारी से, हमारी मान्यता और आशीष को मजबूत बनाता है।
आंशिक मार्गदर्शक उद्धरण (हिस्टोरिकल प्रोम्प्ट)
नोट: नीचे मौलिक टिप्पणीकारों के सार्वजनिक-डायरेक्ट उद्धरण के लिए संक्षिप्त संदर्भ दिए जा रहे हैं; पूर्ण वाक्यों के लिए पाठ-ग्रंथों को संदर्भित करें:
Matthew Henry (उद्धृत संकेत): “यह वह घड़ी है जब विश्वास अपने आप को व्यवहारिक बनाता है; आशा के धागे को धारण कर के मार्ग पर चलता है।” (संदर्भ सार)
Albert Barnes (उद्धृत संकेत): “व्यक्ति के लिए ईश्वर की योजना कभी-भी व्यक्त होती है; संपत्ति तथा संबंधों का सही उपयोग उसके उद्देश्य के अनुसार होता है।”
Adam Clarke (उद्धृत संकेत): “परिवार और धन की संगति एक दिव्य योजना के भीतर संतुलित होनी चाहिए; निरास होने पर भी ईश्वर अपने वचनों को पूरा करते हैं।”
संक्षिप्त निष्कर्ष
यात्रा तब भी स्थिर रहती है जब बाधा हो; अब्राम ने कनान को चुना और लूत तक साथ लेने से यह दर्शित हुआ कि आशीर्वाद और परिवार का संतुलन एक साथ चलता है।