उत्पत्ति 28:1 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

तब इसहाक ने याकूब को बुलाकर आशीर्वाद दिया, और आज्ञा दी, “तू किसी कनानी लड़की को न ब्याह लेना।

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उत्पत्ति 28:1 पद-दर-पद बाइबल टीका

उत्पत्ति 28:1—आशीर्वाद देने का ठहराव और निषेध

परिस्थिति का परिचय: इसहाक ने याकूब को बुलाकर आशीर्वाद दिया, और आज्ञा दी, “तू किसी कनानी लड़की को न ब्याह लेना।” यह क्षण याकूब के भविष्य की दिशा तय करने वाला है। इस समय इसहाक का आशीर्वाद वह संदेश है जो पिता की जड़ता और वंश की पावनता की पूर्ति की मांग करता है, ताकि पानी में फूट नहीं बल्कि धारा प्रवाहित बनी रहे।

ईश्वर या विश्वास के बारे में पाठ से जो स्पष्ट होता है

इसोहन की पर actually, इस वाक्य में पिता का संरक्षण और धर्मशास्त्रीय विरासत के प्रति परिवार की जिम्मेदारी उजागर होती है। ईश्वर के विषय में संदेश यह है कि वंशानुशासन और पवित्र विवाह-छवि परमेश्वर की योजनाओं के अनुसार संचालित होते हैं। आशीर्वाद का उद्देश्य आश्वासन और पवित्र चिह्न रखना है ताकि भविष्य में भी परमेश्वर की वादा-प्रतिज्ञा संचालित रहे।

मुख्य शब्दों और चित्रों की स्पष्ट व्याख्या

– कनानी लड़की: यहाँ कनानी विवाह से परहेज एक चिह्न है, जो हमारे समय में भी विश्वासी के लिए अलगाव और पवित्र बन्धन की महत्ता दर्शाता है। यह केवल जातीय नहीं, बल्कि धार्मिक मिलन की दृष्टि से एक चेतावनी है।

– आशीर्वाद देना: पिता का आशीर्वाद वह संस्थापक ऊर्जा है जो आने वाली पीढ़ी को मार्गदर्शित करती है। यह आशीर्वाद परमेश्वर की कृपा को धरातल पर चित्रित करने का माध्यम है।

संबद्ध प्रवचन (cross-references) और संक्षेप स्पष्टीकरण

  • यहोशू 24:15 – विश्वास के साथ एक समान्य निर्णय से जीवन भर के मार्ग का निर्धारण।
  • भजन 112:1–2 – पितृत्व और वंशानुशासन की पुण्य भूमिका में आशीर्वाद का प्रभाव।
  • याकूब 1:17 – हर अच्छा उपहार और सम्पूर्ण उत्तम उपहार परमेश्वर से आता है; रची-बसी धारणाओं के पीछे उसका दिलस्थ नहीं है।

पवित्र ग्रंथों के साथ सम्बन्ध और स्पष्ट सार

यह वचन यह संकेत देता है कि विश्वासयोग्यता और परमेश्वर की योजना के अनुसार विवाह-संस्कार को बनाए रखना आवश्यक है। यह याकूब के भाग्य की सुरंग में एक धार्मिक मोड़ है, जो आगे उसके जीवन को प्रभावित करेगा।

आज के संदर्भ में व्यवहारिक अनुप्रयोग

– परिवार के भीतर पवित्रता बनाये रखना: पारिवारिक आशीर्वाद और धार्मिक मान्यताओं की सुरक्षा से ही मानव जीवन में स्थिरता आती है।

– विवाह की नीतियाँ: माता-पिता की बुद्धिमत्ता और बच्चे के लिए एक धर्मसंचालित विकल्प की अहमियत समझना।

– ईश्वर की वाचा के अनुरूप निर्णय: अपने फैसलों में परमेश्वर की योजना को पहली प्राथमिकता देना और अनावश्यक भटकाव से बचना।

सूक्त उद्धरण (सूचनात्मक संदर्भ)

मार्थो कॉलेंट, एलबर्ट बार्न्स और एडम क्लार्क के सार्वजनिक डॉमेन टिप्पणीकारों के विचार मिलते हुए, यह पंक्ति जीवन-यात्रा की दिशा बताती है: पुत्र के लिए पवित्र आशीर्वाद और पारिवारिक नैतिकता का संरक्षण ईश्वर के नियंत्रण के भीतर है।

नोट: यहाँ हमने इस पंक्ति के संकायों के लिए सीधे पूर्ण ग्रंथ के उद्धरण नहीं दिए हैं, परन्तु हेन्ड्स ऑफ़ चॉमिन्गर्स के प्रमुख निष्कर्षों के अनुरूप विचार समाहित हैं।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

उत्पत्ति 28:1 समानांतर पद और संबंधित वचन

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और मुझसे आकाश और पृथ्वी के परमेश्‍वर यहोवा की इस विषय में शपथ खा*, कि तू मेरे पुत्र के लिये कनानियों की लड़कियों में से, जिनके बीच मैं रहता हूँ, किसी को न ले आएगा।

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सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर तुझे आशीष दे, और फलवन्त कर के बढ़ाए, और तू राज्य-राज्य की मण्डली का मूल हो।

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फिर रिबका ने इसहाक से कहा, “हित्ती लड़कियों के कारण मैं अपने प्राण से घिन करती हूँ; इसलिए यदि ऐसी हित्ती लड़कियों में से, जैसी इस देश की लड़कियाँ हैं, याकूब भी एक को कहीं ब्याह ले, तो मेरे जीवन में क्या लाभ होगा?”

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