Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
उत्पत्ति 1 उत्पत्ति 2 उत्पत्ति 3 उत्पत्ति 4 उत्पत्ति 5 उत्पत्ति 6 उत्पत्ति 7 उत्पत्ति 8 उत्पत्ति 9 उत्पत्ति 10 उत्पत्ति 11 उत्पत्ति 12 उत्पत्ति 13 उत्पत्ति 14 उत्पत्ति 15 उत्पत्ति 16 उत्पत्ति 17 उत्पत्ति 18 उत्पत्ति 19 उत्पत्ति 20 उत्पत्ति 21 उत्पत्ति 22 उत्पत्ति 23 उत्पत्ति 24 उत्पत्ति 25 उत्पत्ति 26 उत्पत्ति 27 उत्पत्ति 28 उत्पत्ति 29 उत्पत्ति 30 उत्पत्ति 31 उत्पत्ति 32 उत्पत्ति 33 उत्पत्ति 34 उत्पत्ति 35 उत्पत्ति 36 उत्पत्ति 37 उत्पत्ति 38 उत्पत्ति 39 उत्पत्ति 40 उत्पत्ति 41 उत्पत्ति 42 उत्पत्ति 43 उत्पत्ति 44 उत्पत्ति 45 उत्पत्ति 46 उत्पत्ति 47 उत्पत्ति 48 उत्पत्ति 49 उत्पत्ति 50Verse
उत्पत्ति 28:1 उत्पत्ति 28:2 उत्पत्ति 28:3 उत्पत्ति 28:4 उत्पत्ति 28:5 उत्पत्ति 28:6 उत्पत्ति 28:7 उत्पत्ति 28:8 उत्पत्ति 28:9 उत्पत्ति 28:10 उत्पत्ति 28:11 उत्पत्ति 28:12 उत्पत्ति 28:13 उत्पत्ति 28:14 उत्पत्ति 28:15 उत्पत्ति 28:16 उत्पत्ति 28:17 उत्पत्ति 28:18 उत्पत्ति 28:19 उत्पत्ति 28:20 उत्पत्ति 28:21 उत्पत्ति 28:22



उत्पत्ति 28:21 पर टिप्पणी — यदि परमेश्वर मेरा संरक्षण करे
इस वचन में याकूब अपनी यात्रा के दौरान परमेश्वर के साथ अपने दायित्व और उसकी सुरक्षा की आशा व्यक्त करता है। वह सोच रहा है कि अगर वह कुशल-क्षेम से अपने पिता के घर लौट आये तो यह संकेत होगा कि यहोवा उसका परमेश्वर ठहरेगा। यह वचन उसकी आस्था का एक ठोस वचन है: परमेश्वर के साथ संसारिक या पारिवारिक सुरक्षित-स्थान की अपेक्षा उसका मन उसकी रक्षा और आशीष के भरोसे से जुड़ता है।
पाठ के संदर्भ में पंक्तियाँ
चक्र-वृत्त में उत्पत्ति के अध्याय 28 में याकूब का पुरानी विश्वासी अनुभव और उसकी दुआ-संबंधी प्रतिक्रिया उभरती है। वह अपने दक्षिण-पूर्वी पथ-निर्देशन के बाद फिर से अपने परिवार और घर की ओर जाते हुए यह प्रेरणा पाता है कि अगर वह लौट आये और जीवन-सत्य में स्थिर रहे, तो परमेश्वर उसका रक्षक होगा। यह एक व्यक्ति-आत्मिक निर्णय है जो जीवन के मार्ग में परमेश्वर के समागम की मांग करता है।
मुख्य आध्यात्मिक पाठ
अनुशासनात्मक तुलनात्मक दृष्टिकोण
यह विचारणीय पूर्वसूचना अन्य धर्मग्रंथों में भी पाई जाती है जहां व्यक्ति अपने उद्धारकर्ता के साथ स्थिर संबंध की कल्पना करता है। बाइबल में ऐसे क्षण बारम्बार मिलते हैं जब परमेश्वर के साथ एक स्थायी संबंध की इच्छा जीवन के सुरक्षित मार्ग की कुंजी बन जाती है।
कठोर अनुप्रयोग
क्रॉस-रेफरेंस (संक्षेप)
1) उत्पत्ति 32:26–28 — संघर्ष और आशीष के दृश्य में याकूब का वह अनुरोध, परमेश्वर के साथ स्थायी संबंध की दिशा सूचित करता है। यह दर्शाता है कि आशीर्वादी मिलना तब ही संभव है जब आदमी परमेश्वर से अभिन्न हो जाए।
2) निर्गमन 33:14 — परमेश्वर कहता है, “मेरा Presence तुम के साथ है; और मैं तुम्हें विश्राम दूँगा।” यह प्रेरित करता है कि सुरक्षा और शांति परमेश्वर की उपस्थिति में है।
3) राजाओं 8:57 — प्रभु अपने लोगों के साथ उस समय भी बना रहता है जब वे विपदाओं के बीच हों; यह प्रतिज्ञा विश्वास की पुष्टि है कि परमेश्वर हमारी रक्षा है।
संक्षेप निष्कर्ष
याकूब का संकल्प—“यदि मैं कुशल क्षेम से लौट आऊँ; तो यहोवा मेरा परमेश्वर ठहरेगा”—एक सरल, परन्तु गहरा विश्वास-पत्र है। यह आज भी याद दिलाता है कि जीवन के हर मोड़ पर परमेश्वर के साथ संबंध बनाए रखना ही सही सुरक्षा की कुंजी है। हमारा प्रत्येक कदम उसी उम्मीद में हो कि परमेश्वर हमारे साथ है और हमारा घर-परिवार, हमारी यात्रा, और हमारा कर्म उसे समर्पित हो जाए।
उद्धृत किये गए लेखक-उद्धरण (यदि उपलब्ध): Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के स्पष्ट अनुच्छेदों के अनुसार, परमेश्वर के साथ विश्वास और सुरक्षा का यह आशीर्वाद उनके Commentary में बार-बार बताये जाते हैं। (ध्यान दें: नीचे के पंक्तियों में उनके सन्निकट विचारों का सन्दर्भ संक्षेप में सम्मिलित है; पूर्ण उद्धरणों को यहाँ संक्षेपित किया गया है।)