उत्पत्ति 10:1 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

नूह के पुत्र शेम, हाम और येपेत थे; उनके पुत्र जल-प्रलय के पश्चात् उत्‍पन्‍न हुए: उनकी वंशावली यह है।

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उत्पत्ति 10:1 पद-दर-पद बाइबल टीका

उत्पत्ति 10:1 का संक्षिप्त संदर्भ और संदर्भ-संदेश

यह वाक्य नूह के पुत्र शेम, हाम और येपेत के, पृथ्वीभर के पुनः बसेरे और संचार-वृत्ति की शुरुआत देता है। जल-प्रलय के पश्चात इन तीनों के उत्तराधिकार में मानववंश की विविध शाखाओं के रूप में नई वंशावली बनती है, जो परमेश्वर के विश्व फैलाव और जातीय विविधता की योजना को दर्शाती है।

मुख्य भावार्थ

कथा यह बताती है कि जिन तीनों भाइयों के पुत्र हुए, वे क्रमशः पृथ्वी के अलग-अलग क्षेत्रीय समाजों के प्रवर्तक बने। इससे एक साथ यह भी स्पष्ट होता है कि देव-निर्जन बनाम नया संसार—पूर्व-प्रलय और बाद के संसार के बीच एक नया अनुशासन और सुसंगति स्थापित होनी है।

दो-तीन मुख्य विषय

  • विश्वव्यापी वंशावली का आरम्भ: मानवीय समुदायों का विभाजन और पृथ्वी के विभाजन की तैयारी।
  • नया संसार बनाम पुरानी व्यवस्था: जल-प्रलय के बाद मानव इतिहास का पुनर्निर्माण और परमेश्वर की योजना का क्रमशः पुनः उद्घाटन।
  • आश्रय और कृपा का क्रम: प्रत्येक शाखा के लिए आने वाले वर्षों में परमेश्वर की सुरक्षा और आदर्श व्यवहार की मार्गदशना।

संदर्भित आयतों के साथ सम्बन्ध

लम्बी परिधियों में यह पाठ अन्य वंशावली-विधान से जुड़ता है—जैसे उत्पत्ति 9 में परमेश्वर के आशीष-नीति और आकाश-भूमि के नियमों की पुनरावृत्ति। साथ ही नीति-निर्देशन के संदर्भ में उत्पत्ति 11 के कराहते बंधन और भाषा-संहार से जुड़े चित्र स्पष्ट होते हैं कि विविधता के साथ भी एक मानवीय परिवार एक परमेश्वर-निर्दिष्ट मार्ग पर बढ़ता है।

व्यावहारिक विचार

हर क्षेत्रीय वंशावली एक संकेत है कि परमेश्वर मानवता को फैलाने, विविध बनाने और एक-एक समुदाय के भीतर विश्वास को बढ़ाने की योजना में है। हमें अपने जीवन में यह देखना चाहिए कि कैसे हमारा कार्य और व्यवहार दूसरों के साथ विविधताओं को सम्मानित कर एक सामान्य मानवीय आधार बनाते हैं।

छोटे-से विचार-विमर्श (संदर्भ-नोट्स)

यह पाठ एकत्रित रूप से मानवता के विविध इतिहास की ओर इशारा करता है—जो भविष्य में एशिया, यूरोप, अफ्रीका, और आदि में विकसित होती सामाजिक-धार्मिक परंपराओं के लिए चिह्न बनती है।

संक्षिप्त समापन

उत्पत्ति 10:1 एक आधार है कि पृथ्वी पर विविध जन-जातियाँ कैसे क्रमशः उभरती हैं और कैसे भगवान की निीति सभी देशों के बीच एक साझा इतिहास की रचना करती है।

क्रॉस-रेफरेंसेस

सरल लिंक-योग्य संदर्भ: उत्पत्ति 9 (आशीष और प्रत्यक्ष मार्गदर्शन), उत्पत्ति 11 (भाषा-बंधन और विविधता का चित्र), घटित इतिहास के लिए दृढ़ मानवीय सम्बन्ध।

नोट: इस commentary में Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के किसी भी विशिष्ट संक्षेप-उद्धरण प्रकाशन-उद्धरण के सटीक छोटे वाक्यों का प्रयोग आवश्यक होने पर केवल शाब्दिक रूप से लिया गया है। नीचे उद्धृत उद्धरण तभी शामिल किए जायेंगे जब स्पष्ट रूप से उपलब्ध हों।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

उत्पत्ति 10:1 समानांतर पद और संबंधित वचन

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आकाश और पृथ्वी की उत्पत्ति का वृत्तान्त यह है कि जब वे उत्‍पन्‍न हुए अर्थात् जिस दिन यहोवा परमेश्‍वर ने पृथ्वी और आकाश को बनाया।

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उत्पत्ति 6:9 (HINIRV) »
नूह की वंशावली यह है। नूह* धर्मी पुरुष और अपने समय के लोगों में खरा था; और नूह परमेश्‍वर ही के साथ-साथ चलता रहा।

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उत्पत्ति 5:1 (HINIRV) »
आदम की वंशावली यह है। जब परमेश्‍वर ने मनुष्य की सृष्टि की तब अपने ही स्वरूप में उसको बनाया। (मत्ती 1:1, 1 कुरि. 11:7)

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