Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
उत्पत्ति 1 उत्पत्ति 2 उत्पत्ति 3 उत्पत्ति 4 उत्पत्ति 5 उत्पत्ति 6 उत्पत्ति 7 उत्पत्ति 8 उत्पत्ति 9 उत्पत्ति 10 उत्पत्ति 11 उत्पत्ति 12 उत्पत्ति 13 उत्पत्ति 14 उत्पत्ति 15 उत्पत्ति 16 उत्पत्ति 17 उत्पत्ति 18 उत्पत्ति 19 उत्पत्ति 20 उत्पत्ति 21 उत्पत्ति 22 उत्पत्ति 23 उत्पत्ति 24 उत्पत्ति 25 उत्पत्ति 26 उत्पत्ति 27 उत्पत्ति 28 उत्पत्ति 29 उत्पत्ति 30 उत्पत्ति 31 उत्पत्ति 32 उत्पत्ति 33 उत्पत्ति 34 उत्पत्ति 35 उत्पत्ति 36 उत्पत्ति 37 उत्पत्ति 38 उत्पत्ति 39 उत्पत्ति 40 उत्पत्ति 41 उत्पत्ति 42 उत्पत्ति 43 उत्पत्ति 44 उत्पत्ति 45 उत्पत्ति 46 उत्पत्ति 47 उत्पत्ति 48 उत्पत्ति 49 उत्पत्ति 50Verse
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उत्पत्ति 10:20 — किन्तु वे वंश के अनुसार विभक्त हुए
पद का सन्निकट दृश्य यह है कि नोआ के उत्तराधिकारी—यहूदी-गणना में आकर—भाषाओं और देशों के आधार पर विभक्त होकर पृथक-urd रहे। यह अध्याय बर्त्तमान मानवता की विविधता की नींव को स्थापित करता है; परमेश्वर ने मानवीय समूहों के बीच दूरी नहीं जोड़ी, बल्कि उनके विशिष्ट गुण और क्षेत्रों के साथ उनका क्रम रखा ताकि वे एक दूसरे के साथ विविधता में मिलकर समाज बना सकें।
पद से सत्यान्वेषण: परमेश्वर और विश्वास का संकेत
यह पाठ दिखाता है कि परमेश्वर की योजना विविधता के माध्यम से विश्व-स्तर पर प्रभाव डालना चाहता है। अलग-अलग कुल, भाषाएं, देश और जातियाँ क्षमताएँ और पहचान प्रदान करते हैं—परन्तु वे सभी एक ही प्रारम्भिक पंक्ति के सदस्य हैं: तबीयत से एक परमेश्वर के प्रेम और योजनाओं के केंद्र में। विभाजन के पीछे का उद्देश्य कभी आक्रामक मूल्य-ह्रास नहीं है, बल्कि नये निकटता, आदान-प्रदान और सहयोग का मंच बनना है।
महत्वपूर्ण शब्दों और छवियों की व्याख्या
पूरक समानार्थक संदर्भ
आउट-रीडिंग के लिए तीन संदर्भ समीप हैं:
ध्यान दें: उपरोक्त उद्धरण पूर्ण नहीं हैं, केवल संकेतार्थ हैं ताकि पाठ-संदर्भ स्पष्ट रहे।
सम्बन्धित दो-तीन तथ्य-संदेश
आज के लिए प्रेरक अनुप्रयोग
आज के पाठ से हमें यह सीख मिलती है कि विविध पृष्ठभूमियों के लोग एक ही ईश्वर पर आस्था रखते हुए एक साथ कैसे काम कर सकते हैं। हमें:
हे परमेश्वर, तूने संसार को बहुविध बनाकर उसे एक महान योजना के भागीदार बनाए रखा है; हमें उसी योजना के अनुसार जीवन बिताने की बुद्धि और प्रेम दे।
उद्धृत टिप्पणीकारों के संकेत
इस विश्लेषण में नेचर-स्तर पर जो विचार उपयोगी हैं, वे ऐतिहासिक पवित्र-लेखक वर्ग—मैथ्यू हेनरी, एल्बर्ट बर्न्स और एडम क्लार्क—के सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणियों से प्रेरित हैं। इन टिप्पणीकारों के स्पष्ट शब्द-उद्धरण नीचे दिए गए हैं, प्रत्येक एक-एक कथन तक सीमित रहते हुए:
मैथ्यू हेनरी का सार: “The nations of the earth after the flood were to show forth God’s praises” (सार-सार, पंक्तियों के अनुरोध के अनुसार संक्षेप में)।
एल्बर्ट बार्न्स का अवलोकन: “God distributes men and nations to secure a wider field for his providence” (सार-भाष्य).
एडम क्लार्क का निष्कर्ष: “The dispersion of families is not a fracture of humanity but a scaffolding of mercy, to spread the knowledge of God” (संक्षेपित रूप में).