Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीहोशे 12:12 बाइबल पद की व्याख्या
होशे 12:12 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
याकूब अराम के मैदान में भाग गया था; वहाँ इस्राएल ने एक पत्नी के लिये सेवा की, और पत्नी के लिये वह चरवाही करता था।
होशे 12:12 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
होशे 12:12 समानांतर पद और संबंधित वचन
उन बाइबल पदों को देखें जो विषय, शिक्षा या संदर्भ के आधार पर इस अंश से जुड़े हैं। समानांतर पदों की तुलना करने से इस वचन के संदर्भ और संदेश को अधिक गहराई से समझने में सहायता मिलती है। किसी चित्र को चुनें और संबंधित पद, उसकी व्याख्या तथा पद-दर-पद बाइबल टीका देखें।

उत्पत्ति 31:41 (HINIRV) »
बीस वर्ष तक मैं तेरे घर में रहा; चौदह वर्ष तो मैंने तेरी दोनों बेटियों के लिये, और छः वर्ष तेरी भेड़-बकरियों के लिये सेवा की; और तूने मेरी मजदूरी को दस बार बदल डाला।

उत्पत्ति 29:18 (HINIRV) »
इसलिए याकूब ने, जो राहेल से प्रीति रखता था, कहा, “मैं तेरी छोटी बेटी राहेल के लिये सात वर्ष तेरी सेवा करूँगा।”

उत्पत्ति 27:43 (HINIRV) »
इसलिए अब, हे मेरे पुत्र, मेरी सुन, और हारान को मेरे भाई लाबान के पास भाग जा;
होशे 12:12 पर आधारीत टिप्पणी
पद का संदर्भ होशे के ऐतिहासिक-आध्यात्मिक पृष्ठभूमि में आता है, जहाँ ईश्वरीय विवेक और इस्राइल की अस्थिर-भक्ति की तस्वीर को विवाह-बंधन और परिवार के प्रतीक के साथ जोड़ा गया है। होशे ने इस्राइल की करतूतों को याकूब के पूर्वजन्म के समय की घटनाओं से मिलाकर कहा है, ताकि यह उद्घोषणा हो कि परमेश्वर का मोह और न्याय उनपर समान रूप से लागू होता है। इस वाक्य में याकूब के व्यवहार का उल्लेख है, जो अराम के मैदान की कथा के संदर्भ में है—जहाँ वह एक पत्नी के लिए सेवा कर रहा था और पत्नी के लिए वह चरवाही करता था।
मुख्य अर्थ
होशे 12:12 में कथन एक स्मरणीय तुलना देता है: ईश्वर ने अपने चयनित लोगों के साथ जो निष्ठा, वादे और प्रेम दिखाने ली—theo, उसे वे अक्सर तोड़ते रहे। याकूब के घटनाक्रम से संकेत मिलता है कि ऐतिहासिक पथ में जब इस्राएल वैधता और सामाजिक-धर्मिक उत्तरदायित्व से भटकते हैं, तब परमेश्वर की देखरेख और न्याय अवश्य काम करते हैं। यह पाठ पुनः स्मरण कराता है कि परमेश्वर के उद्धार-यात्रा के साथ कर्तव्य और विश्वास का मेल अनिवार्य है, न कि बाहरी धर्म-क्रिया ही पर्याप्त मानी जाए।
महत्वपूर्ण विचार (तीन मुख्य विषय)
अन्य प्रचलित टिप्पणियाँ (सार-संकलन)
यह छंद सामान्यतः यह बताने के लिये उद्धृत किया गया है कि इस्राएल की पहचान, जो वाचा-बंध के भीतर है, उसकी सच्ची स्थिति क्या है। पारंपरिक व्याख्या में यह दिखता है कि ऐतिहासिक-भू-भूमि और व्यक्तिगत आचरण दोनों में अस्थिरता है, परन्तु धर्मी न्याय और दया का नियम वही है जो परमेश्वर के संबंधों को पुनः स्थापित कर सकता है।
संदर्भगम/क्रॉस-रेफरेंसेस
छोटे-बड़े दोनों कालखंडों में यह विचार मिलता है कि परमेश्वर पुकारता है, परन्तु मानवीय अवकाश और निष्ठाहीनता के बावजूद वह सुधार की राह खोलता है।
व्यावहारिक विचार
हम आजके जीवन में निम्न बातों पर विचार करें: - अपने कर्तव्यों और विश्वास में संतुलन बनाए रखें: आस्था केवल धार्मिक क्रिया नहीं, बल्कि रोज़मर्रा के जीवन-नैतिकता में दिखनी चाहिए। - दया और न्याय में संतुलन: दूसरों के साथ सावधानी और करुणा के साथ व्यवहार करें, ताकि व्यक्तिगत और सामाजिक जीवन में परमेश्वर की शांति बनी रहे। - पुनः लौटने का प्रयत्न: कभी-कभी गिरावट के बाद भी सुधार की राह खोली जाती है; अपेक्षा और विश्वास बनाये रखें।
संक्षिप्त समापन
याहूशे के इस भाग में हमें दिखाया गया है कि परमेश्वर की वाचा और प्रेम कभी समाप्त नहीं होते, परन्तु पाप और अविश्वास से जटिल स्थितियाँ भी उभर सकती हैं। इसमें एक प्रेरक संदेश है: अपनी आस्था को कर्म-रूप में ढालना; और कठिन समय में भी ईश्वर के साथ भरोसा नहीं छोड़ना।
कृपया ध्यान दें: नीचे उद्धृत/संग्रहित पवित्र-कनिष्ठ टिप्पणियों का स्रोत सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणीकारों से है और पाठ का मूलतः शाब्दिक उद्धरण होने पर भी, पूर्ण verses नहीं दिए गए हैं।