Old Testament
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होशे 12:8 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
एप्रैम कहता है, “मैं धनी हो गया, मैंने सम्पत्ति प्राप्त की है; मेरे किसी काम में ऐसा अधर्म नहीं पाया गया जिससे पाप लगे।” (प्रका. 3:17)
होशे 12:8 पद-दर-पद बाइबल टीका
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होशे 12:8 समानांतर पद और संबंधित वचन
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प्रकाशितवाक्य 3:17 (HINIRV) »
तू जो कहता है, कि मैं धनी हूँ, और धनवान हो गया हूँ, और मुझे किसी वस्तु की घटी नहीं, और यह नहीं जानता, कि तू अभागा और तुच्छ और कंगाल और अंधा, और नंगा है, (होशे 12:8)

भजन संहिता 62:10 (HINIRV) »
अत्याचार करने पर भरोसा मत रखो, और लूट पाट करने पर मत फूलो; चाहे धन सम्पत्ति बढ़े, तो भी उस पर मन न लगाना। (मत्ती 19:21-22, 1 तीमु. 6:17)

व्यवस्थाविवरण 8:17 (HINIRV) »
और कहीं ऐसा न हो कि तू सोचने लगे, कि यह सम्पत्ति मेरे ही सामर्थ्य और मेरे ही भुजबल से मुझे प्राप्त हुई।
होशे 12:8 में आत्म-मुष्किल दृष्टिकोण और आत्म-विश्वास पर सचेतन टिप्पणी
यह वचन हमें यह दर्शाता है कि परमेश्वर हर उस मनुष्य के दिल की गहराई देखता है जो अपने धन-सम्पत्ति और आत्म-गौरव पर निर्भर होकर अपने पापों को ढक लेता है। होशे के समय इस्राएल की राजधानी और उत्तर राज्य में आस्था के साथ-साथ सामाजिक असंतुलन भी बढ़ रहा था। एप्रैम कहता है कि वह धनी है, और उसने सम्पत्ति प्राप्त की; परअधर्म का पाप वह आदतन नहीं मानता। यह उद्धरण संदर्भित करता है कि धन के गर्व, आत्म-समाधान और ईश्वर-निष्ठा के प्रति उदासीनता से कैसे परमेश्वर की दृष्टि फिसलती है।
पार्श्व भूमि: मूल संदर्भ और संदेश
होशे नबी के इस भाग में ईश्वर के संकेत स्पष्ट हैं: आर्थिक सम्पन्नता के साथ-साथ आत्म-गौरव और धार्मिक दिखावापन प्रमुख पाप बन जाते हैं जब वे नैतिकता और सत्य की जगह दिखावे पर टिकते हैं। एप्रैम कह रहा है कि वह धनइज़्त और सफलताओं के कारण धर्म और न्याय को नहीं धोता, परन्तु वास्तविक रूप से उसकी पाप-लिप्तता उसे मोक्ष-योजना से दूर कर देती है। इसी प्रकार परमेश्वर बार-बार चेतावनी देता है कि आर्थिंक सफलता भौतिकतावाद बनकर नश्वर व्यवस्था के भीतर असत्यान्वेषण करती है।
मुख्य संदेश और देवत्वीय नैतिकता
इस पाठ का केंद्र यह है कि आत्म-धन्यता और धन-निष्ठा से परमेश्वर का प्रेम और वचन-निष्ठा खो जाती है। जो प्रचलित विश्वास में धन पर गर्व करता है, वही दूसरों के साथ अन्याय और दबाव डालकर अपने लाभ के लिए नियमों का उल्लंघन कर सकता है। इसलिए सच्ची धार्मिकता न केवल बाहरी रूपरेखा है, बल्कि दिल की ईमानदारी, निष्ठा और न्यायप्रिय जीवन है।
वचन-समर्थन: समझौते की पुनरावृत्ति
नीचे के तीन बिंदु पाठ के साथ संगत समझ देते हैं:
क्रॉस-रेफरेंसेस और संकष्त विचार
इन सम्बन्धित पदों से यह सिद्धांत पुष्ट होता है:
इन सम्बन्धों से स्पष्ट है कि धन की प्राप्ति को पाप नहीं माना जा सकता, परन्तु उसका सही उपयोग और ईश्वर के साथ प्रेम की प्राथमिकता कितनी महत्त्वपूर्ण है।
चर्च-चिंतन और देववाणी
इस अध्याय का एक सरल, पर गहरा संदेश यह है: सत्यापित धार्मिकता तब है जब धन-चक्र के रूप में आत्म-आडंबर न हो परन्तु hearts को ईश्वर के सामने खुला, दयालु और न्यायप्रिय रखा जाए। यदि धन हमें स्व-नियंत्रण और नम्रता से दूर कर दे, तो वह आशीर्वचन नहीं बल्कि प्रतिबंध बन जाता है।
संक्षिप्त devotional reflection
हम में से प्रत्येक के लिए यह प्रश्न है: क्या मेरी सफलता और संपत्ति मेरे विश्वास की अगुवाई करते हैं, या मैं धन के पीछे अपने ईश्वर-समर्पण को खो देता हूँ? परमेश्वर उसे देख लेता है जो दिल से समर्पित होकर न्याय और दया को पकड़ता है, चाहे उसकी स्थिति कैसी भी हो। आज के दिन अपने हृदय का आकलन करें: क्या धन, प्रसिद्धि या सुरक्षा मुझे ईमानदारी से परमेश्वर के पास नहीं दे पाती?
उद्धरण नोट: यह व्याख्या Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक-डोमेन संकेतों के स्वर से संयुक्त है; जहाँ भी क्लासिक शब्दावली बतौर संकेत मिलती है, वहाँ उससे मेल किया गया है।