Old Testament
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होशे 12:2 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
यहूदा के साथ भी यहोवा का मुकद्दमा है, और वह याकूब को उसके चालचलन के अनुसार दण्ड देगा; उसके कामों के अनुसार वह उसको बदला देगा।
होशे 12:2 पद-दर-पद बाइबल टीका
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होशे 12:2 समानांतर पद और संबंधित वचन
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मीका 6:2 (HINIRV) »
हे पहाड़ों, और हे पृथ्वी की अटल नींव, यहोवा का वाद विवाद सुनो, क्योंकि यहोवा का अपनी प्रजा के साथ मुकद्दमा है, और वह इस्राएल से वाद-विवाद करता है।

होशे 4:1 (HINIRV) »
हे इस्राएलियों, यहोवा का वचन सुनो; इस देश के निवासियों के साथ यहोवा का मुकद्दमा है। इस देश में न तो कुछ सच्चाई है, न कुछ करुणा और न कुछ परमेश्वर का ज्ञान ही है। (प्रका. 6:10)

यशायाह 10:6 (HINIRV) »
मैं उसको एक भक्तिहीन जाति के विरुद्ध भेजूँगा, और जिन लोगों पर मेरा रोष भड़का है उनके विरुद्ध उसको आज्ञा दूँगा कि छीन-छान करे और लूट ले, और उनको सड़कों की कीच के समान लताड़े।
होशे 12:2 पर टिप्पणी – हिंदी अध्ययन
इस खंड में योरोशेपला (होशे) भविष्यवक्ता उस मजबूत सच की ओर संकेत करते हैं कि Yahweh यहूदियों के चाल-चलन का न्याय करेगा। यहोवा का मुकद्दमा यहूदाओं के साथ है; वे जो चाल-चलन अपनाते हैं, वही परिणाम भी उनके सामने आते हैं। यह संदेश गहराई से उनकी आत्मा, धार्मिक आचरण और सामाजिक व्यवहार पर चोट करता है, ताकि वे वास्तविकता में ईश्वर के सामने लौटें और पवित्रता से जीवन जीएं।
पद का संदर्भ और पाठ-परिचय
होशे 12:2 का पाठ यहूदियों के इतिहास-चालित व्यवहार की स्थिर आलोचना है। यह बताता है कि यहोवा हर समय उनकी चाल-चलन के अनुसार दण्ड देता है, और यह दण्ड उनके कर्मों के अनुसार बदला जाता है। इस प्रकार, भक्ति के दिखावे के पीछे के वास्तविक चरित्र, उन परिस्थितियों पर रोशनी डालता है जो परमेश्वर के साथ स्पष्ट ईमानदारी की मांग करते हैं।
मुख्य आध्यात्मिक पाठ
अन्य बाइबल पाठों से सम्बन्ध
यह विचारधारा बाइबल के अन्य हिस्सों के साथ संगत है, जैसे:
संयोग-विहीन नहीं, ये सभी स्थान यह इंगित करते हैं कि प्रभु अपने लोग सही ढंग से व्यवहार करें, अन्यथा दण्ड और परिवर्तन दोनों का सामना करना पड़ता है.
व्यावहारिक अनुप्रयोग
कथन की समेकित व्याख्या
यह पाठ बताता है कि परमेश्वर इस दुनिया के भीतर प्रत्येक व्यक्ति के कर्मों से परिचित है। यहूदा का इतिहास दिखाता है कि धार्मिकता के रूप दिखाने से अधिक महत्वपूर्ण है अंतरात्मा की प्रवृत्ति—जो प्रेम, सत्य और न्याय से भरी हो। “चाल-चलन के अनुसार दण्ड” एक ऐसी व्यवस्था है जिसमें हर क्रिया का एक परिणाम जुड़ा होता है; यह न्याय की वास्तविक प्रकृति है, न कि केवल बहस-मुकाबले का तात्कालिक परिणाम।
संदर्भ-नोट्स
यहां उद्धृत प्रमुख विचार, मैथ्यू हेनरी, एल्बर्ट बार्न्स और एडम क्लार्क की सार्वजनिक-डायरेक्ट टिप्पणियों से मिले संकेतों के अनुरूप है, पर हमने उन्हें संक्षेप में समाहित किया है ताकि पाठक सरलता से समझ सकें।
संक्षिप्त सार
होशे 12:2 हमें यीशू के समय से पहले यहूदियों के आचरण पर तीखा आभास कराता है: उनका धार्मिक प्रदर्शन यदि वास्तविक नैतिक परिवर्तन के साथ नहीं है, तो यहोवा उसका दंड दे सकता है। ईमानदारी, सत्य और नैतिक जीवन वही मार्ग हैं जिनसे परमेश्वर की कृपा सदा बनती है।