Old Testament
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होशे 12:5 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
यहोवा, सेनाओं का परमेश्वर, जिसका स्मरण यहोवा नाम से होता है।
होशे 12:5 पद-दर-पद बाइबल टीका
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होशे 12:5 समानांतर पद और संबंधित वचन
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निर्गमन 3:15 (HINIRV) »
फिर परमेश्वर ने मूसा से यह भी कहा, “तू इस्राएलियों से यह कहना, 'तुम्हारे पूर्वजों का परमेश्वर, अर्थात् अब्राहम का परमेश्वर, इसहाक का परमेश्वर, और याकूब का परमेश्वर, यहोवा, उसी ने मुझको तुम्हारे पास भेजा है। देख सदा तक मेरा नाम यही रहेगा, और पीढ़ी-पीढ़ी में मेरा स्मरण इसी से हुआ करेगा।' (मत्ती 22:32, मरकुस 12:26)

उत्पत्ति 28:16 (HINIRV) »
तब याकूब जाग उठा, और कहने लगा, “निश्चय इस स्थान में यहोवा है; और मैं इस बात को न जानता था।”

उत्पत्ति 32:30 (HINIRV) »
तब याकूब ने यह कहकर उस स्थान का नाम पनीएल* रखा; “परमेश्वर को आमने-सामने देखने पर भी मेरा प्राण बच गया है।”
होशे 12:5 का पवित्र प्रसंग: यहोवा सेनाओं का परमेश्वर
पद का तात्पर्य यह है कि यहोवा वह परमेश्वर है जो शक्तिशाली सेनाओं का प्रभु है और जिसकी स्मृति “यहोवा नाम से” होती है; यानी उसका नाम उनके उद्धार और प्रति-आवाज़ के कदमों के साथ जुड़ा है। होशे के समय इस स्मरण से स्पष्ट होता है कि ईश्वर सिर्फ व्यक्तिगत हित से नहीं, बल्कि सम्पूर्ण राष्ट्र के चंचल व्यवहार के विषय में भी सचेत रहते हैं।
ईश्वर के बारे में जो पाठ दिखाता है
यहोवा सेनाओं का परमेश्वर होना बताता है कि वह गतिविधिशील, क्रियाशील और कानून के पालनकर्ता हैं। वह अविनाशी शक्ति और न्याय दोनों के स्रोत हैं, और उनका स्मरण और नाम आदर के साथ जुड़ा है। यह बताता है कि उनका स्मरण केवल स्मारक नहीं, बल्कि कर्मों की गवाही है—जहाँ वे अपने लोगों के साथ मार्गदर्शन और दया दिखाते हैं, वहाँ उनका नाम प्रतिष्ठित रहता है।
मुख्य शब्दावली और imagery
संवद्ध पवित्रग्रंथ
इस विचार का पार्श्व-आधार अन्य जगहों पर मिलता है जहाँ יהוה के नाम की महिमा और उसकी शक्ति के साथ उनका ऐहिक व्यवहार वर्णित है—जैसे उद्धार के समय उनके नाम का स्मरण और उनकी पवित्रता को मानना। उल्लेखनीय क्रॉस-रेफरेंस नीचे दी गयी हैं:
पूर्वक और आज कैसे लागू करें
आज के संदर्भ में यहोवा का स्मरण हमें सीख देता है कि हमारी आशा केवल मानवीय शक्ति पर नहीं, बल्कि परमेश्वर के पूर्ण अधिकार पर है। अपने जीवन के निर्णयों में हम उसे मूर्त शस्त्र-शक्ति के रूप में नहीं, बल्कि भरोसे के स्रोत के रूप में स्मरण करें। कठिन समय में भी उसका नाम प्रशस्त करें—यही असली विश्वास की पहचान है।
संक्षिप्त संयुक्त निष्कर्ष
यहोवा सेनाओं का परमेश्वर होना एक साथ शक्ति और ईमानदारी की गारंटी है। “यहोवा नाम से” स्मरण उसका रिश्ता-संकेत है—हमारे जीवन के हर आचरण में उसका पवित्र नाम एक प्रमाण बनकर चलता है।
एतिहासिक टिप्पणी से उद्धरण (संक्षेप)
माथ्यू हेनरी (Matthew Henry) ने कहा है कि परमेश्वर का नाम स्मरण एक चेतावनी है कि हम उसके विधान से विमुख न हों और उसकी कृपा के साथ जीवन को संचालित करें; अल्बर्ट बार्न्स (Albert Barnes) ने भी इसे यह दर्शाया है कि उसकी प्रतिष्ठा और स्मरण उनके लोगों के जीवन में न्याय-प्रभाव डालते हैं; एडम क्लार्क (Adam Clarke) ने इस प्रकार समझाया कि “यहोवा नाम से” स्मरण से एक पवित्र और विश्वसनीय पहचान बनती है।
नोट: नीचे दिये गए तीन छोटा cross-refs ऐसे हैं जो पाठ के साथ दिखते हैं—यद्यपि पूर्ण-वाक्य नहीं दिखते:
यहोवा नाम के साक्ष्य के कुछ संदर्भ: यशायाह 42:8; भजन 20:7; याकूब 49:25 (एवं संबद्ध पाठार्थ)