Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
निर्गमन 1 निर्गमन 2 निर्गमन 3 निर्गमन 4 निर्गमन 5 निर्गमन 6 निर्गमन 7 निर्गमन 8 निर्गमन 9 निर्गमन 10 निर्गमन 11 निर्गमन 12 निर्गमन 13 निर्गमन 14 निर्गमन 15 निर्गमन 16 निर्गमन 17 निर्गमन 18 निर्गमन 19 निर्गमन 20 निर्गमन 21 निर्गमन 22 निर्गमन 23 निर्गमन 24 निर्गमन 25 निर्गमन 26 निर्गमन 27 निर्गमन 28 निर्गमन 29 निर्गमन 30 निर्गमन 31 निर्गमन 32 निर्गमन 33 निर्गमन 34 निर्गमन 35 निर्गमन 36 निर्गमन 37 निर्गमन 38 निर्गमन 39 निर्गमन 40



निर्गमन 3:15 का संक्षिप्त संदर्भ और अर्थ
इस पद में परमेश्वर मूसा से पहले यह स्पष्ट कर देते हैं कि उन्होंने इस्राएल के निवासियों को उद्धार के लिए क्यों भेजा है। वह अपने नाम को बार-बार स्मरण कराने की माँग नहीं कर रहे, बल्कि अपने संरक्षण, वाचा और पवित्र-परिणाम की निरंतरता को प्रमाणित कर रहे हैं। यह उद्घोष दिखाता है कि ईश्वर का नाम इतिहास-चक्र में स्थाई है और उसकी आत्मीय सत्ता को पीढ़ी-दर-पीढ़ी स्वीकारना है।
महत्वपूर्ण केंद्रीय अर्थ
ईश्वर अपने अभिमान-रहित प्रेम के साथ मौलिक नाम-उद्धार देता है: “यही मेरा नाम सदा रहेगा और पीढ़ी-पीढ़ी में मेरा स्मरण इसी से हुआ करेगा।” यह नाम-प्रकटन बताते हैं कि परमेश्वर स्वयं को इतिहास के लिए खोलते हैं—बचाने वाले, विश्वासी और नियम-निर्नायक के रूप में। साथ ही पहले वचनों, अब्राहम, इसहाक और याकूब के साथ किए गए वादों की निरंतरता को भी पुष्ट करता है।
तीन प्रमुख विषय
संबद्ध आयतन और क्रॉस-रेफरेंसे
यहाँ तीन दृष्टांत हैं जो पाठ के साथ जुड़ते हैं, बिना पूर्ण पद उद्धृत किए:
परिशिष्ठ टिप्पणी: ये क्रॉस-रेफरेंसेज़ संकेत देती हैं कि परमेश्वर का नाम और श्रद्धा-आधार उसकी पहचान का मूल है; यहूदी-ख़ास तौर पर परमेश्वर की पवित्रता और वादों के पालन के प्रति विभागित दृष्टिकोण को बनाए रखते हैं।
व्यावहारिक विचार
संক্ষिप्त निष्कर्ष
निर्गमन 3:15 परमेश्वर की घोषणा है कि वह स्वयं को पूर्वजों के परमेश्वर के रूप में पहचानते हैं और उन पवित्र नामों के द्वारा इतिहास से जुड़ते हैं। यह हमारी आस्था को याद दिलाता है कि हमारे उद्धार की योजना और स्मरण शक्ति परमेश्वर के नाम-आधार से संचालित है, जो सदा के लिए मान्य है।
उद्धृत पंक्तियाँ (संशोधित संक्षेप): Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के सन्निकट विचारों की संयुक्त व्याख्या में, यह स्पष्ट किया गया है कि परमेश्वर का नाम स्थिर है, और पूर्वजों के साथ किए गए वादे—यही स्मरण—आगे चलकर इस्राएल के लिए उद्धार की ऊर्जा बनते हैं।
महत्वपूर्ण उद्धृतियाँ (संक्षेप): यदि उपलब्ध हों, तो Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के सटीक छोटे उद्धरण नीचे दिए जा सकते हैं—परन्तु पूर्ण टेक्स्ट नहीं।