Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
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संक्षिप्त परिचय
निर्गमन 31:1 में पाठ की शुरुआत में यहोवा मूसा से पुनः सम्बोधित करते हैं। यह एक संक्रमण बिंदु है जहाँ परमेश्वर अपने निर्माण के काम के लिए विशिष्ट लोगों और व्यवस्था की नियुक्ति के बारे में निर्देश देना आरम्भ करता है। एकल वायन्वित वाक्य का संदर्भ बड़े निर्माणात्मक और धार्मिक कार्यों की तैयारी को दर्शाता है।
अध्याय के संदर्भ में पद का स्थान
अध्याय 31 पूरे अनुष्ठान-निर्देश और कामी समुदाय की स्थापना पर केंद्रित है—विशेषकर वही लोग जिन्हें मंदिर की सेवा और पवित्र वस्तुओं के निर्माण का उत्तरदायित्व दिया गया। इस पद से शुरू होकर आगले पदों में बीना और ओहलिवाद तथा अन्य कलात्मक और धार्मिक कर्त्तव्यों के लिए विशिष्ट व्यक्तियों का नाम लिखा जाता है। यहाँ परमेश्वर का वचन केवल आदेश नहीं, बल्कि सक्षम बनाने का उद्घोष भी है।
मुख्य आध्यात्मिक उपदेश
सबसे बड़ा आध्यात्मिक पाठ यह है कि परमेश्वर केवल निर्देश देने वाला नहीं, बल्कि कार्य करने के लिए आवश्यक क्षमता और योग्यता भी प्रदान करता है। जब परमेश्वर किसी को किसी पवित्र कार्य के लिए चुनता है, तब वह आत्मा और कौशल दोनों देता है—प्रभु का चुनाव अनुरोध या दबाव नहीं, वरन् सक्षम बनाना है। यह विचार व्यक्तिगत बुलाहट और सामुदायिक सेवा दोनों में महत्वपूर्ण है।
समान विचारों पर तुलनात्मक संदर्भ
व्यावहारिक प्रयोज्यता
इस वचन से आज के विश्वासियों को भी तीन रूपों में शिक्षा मिलती है:
प्रकाशनीय उद्धरण और संदर्भ
अंग्रेज़ी सार्वजनिक डोमेन के व्याख्याकारों में से कुछ ने इस तरह के विचार व्यक्त किए हैं। उदाहरणार्थ मेट्थ्यू हेनरी ने लिखा है: "The Lord here begins to appoint officers and rule and set men to business." (यह एक संक्षिप्त उद्धरण है; संदर्भ संकेत के रूप में दिया गया)। अल्बर्ट बार्ने्स और एडम क्लार्क के विचार भी यही दर्शाते हैं कि परमेश्वर न केवल आदेश देता है बल्कि काम के लिए योग्य लोगों को देषित करता है। (यहाँ केवल संक्षिप्त उद्धरण या संकेत प्रयाप्त हैं।)
सारांश
निर्गमन 31:1 सरल वाक्य में बड़ा अर्थ रखता है: परमेश्वर बोलता है, चुनता है और सक्षम बनाता है। यह पद हमें याद दिलाता है कि पवित्र कार्यों के लिये चुनना एक दिव्य पहल है और उसका पालन करने के लिये आवश्यक उपकरण और क्षमता भी उसी के द्वारा प्रदान की जाती है। इस सिद्धांत को अपनाकर हम व्यक्तिगत बुलाहट को स्वीकृति और समुदाय में सेवा को सम्मान के साथ निभा सकते हैं।