Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
निर्गमन 1 निर्गमन 2 निर्गमन 3 निर्गमन 4 निर्गमन 5 निर्गमन 6 निर्गमन 7 निर्गमन 8 निर्गमन 9 निर्गमन 10 निर्गमन 11 निर्गमन 12 निर्गमन 13 निर्गमन 14 निर्गमन 15 निर्गमन 16 निर्गमन 17 निर्गमन 18 निर्गमन 19 निर्गमन 20 निर्गमन 21 निर्गमन 22 निर्गमन 23 निर्गमन 24 निर्गमन 25 निर्गमन 26 निर्गमन 27 निर्गमन 28 निर्गमन 29 निर्गमन 30 निर्गमन 31 निर्गमन 32 निर्गमन 33 निर्गमन 34 निर्गमन 35 निर्गमन 36 निर्गमन 37 निर्गमन 38 निर्गमन 39 निर्गमन 40Verse
निर्गमन 32:1 निर्गमन 32:2 निर्गमन 32:3 निर्गमन 32:4 निर्गमन 32:5 निर्गमन 32:6 निर्गमन 32:7 निर्गमन 32:8 निर्गमन 32:9 निर्गमन 32:10 निर्गमन 32:11 निर्गमन 32:12 निर्गमन 32:13 निर्गमन 32:14 निर्गमन 32:15 निर्गमन 32:16 निर्गमन 32:17 निर्गमन 32:18 निर्गमन 32:19 निर्गमन 32:20 निर्गमन 32:21 निर्गमन 32:22 निर्गमन 32:23 निर्गमन 32:24 निर्गमन 32:25 निर्गमन 32:26 निर्गमन 32:27 निर्गमन 32:28 निर्गमन 32:29 निर्गमन 32:30 निर्गमन 32:31 निर्गमन 32:32 निर्गमन 32:33 निर्गमन 32:34 निर्गमन 32:35



निर्गमन 32:1 पर टिप्पणी — अर्थ का स्पष्ट उद्घाटन
जहाँ तक विस्तृत अर्थ है, सभा-जन ने मूसा के विलम्ब को देखने के बाद एक त्वरित, निर्णयात्मक कदम उठाने की गलती की: वे अपने तीनों को एक नया देवता बनाकर अपने साथ चलने को कहने लगे। यह घटनाक्रम परमेश्वर की महिमा के सामने एक असमंजस भरा आत्म-विश्वास का पल था, जहाँ भय, निराशा और नेतृत्व की कमी ने उनके विश्वास को परीक्षा में डाल दिया।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यहोशना-यात्रा के बीच, जिस समय मूसा पर्वत पर परमेश्वर के साथ महीनों तक मौन में रहे, इस अवधि में इस्राइलियों ने अपने इतिहास की चिंता, असुरक्षा और धार्मिक पहचान की खोज के विरोध में एक “नया देव” बनाने की योजना बनाई। मूसा का पर्वतीय घटनाक्रम प्रकाशित कर रहा है कि ईश्वरीय अनुदान और निर्देश के लिये मानव में धैर्य और विश्वास कितने आवश्यक हैं।
interpretive observations (व्याख्यात्मक बिंदु)
छोटी थीमैटिक सूची
अन्य संबंधित ग्रंथ संदर्भ
विषयगत प्रवृत्ति के साथ तीन cross-references:
व्याख्या से समझना यह है कि इन संदर्भों में ईश्वर-आह्वान और पवित्र आचरण का एक साथ चलना आवश्यक है; निर्भरता ईश्वर के नियमों पर और चेहरे को नये देवताओं के निर्माण से बचना है।
व्यावहारिक निष्कर्ष
आज की ज़िन्दगी में हम जब किसी कठिन परिस्थिति या प्रतीक्षा के बीच होते हैं, तो हमें यह याद रखना चाहिए कि परमेश्वर के मार्ग में धैर्य और विश्वास ही सुरक्षा का मार्ग है। भावनात्मक आवेग के बजाय, परमेश्वर के वचन और निमंत्रण पर टिके रहने से हम वास्तविक आस्था की संरचना स्थिर रखते हैं।
विद्वान-उद्धरण (संक्षेप)
माथ्यू हेनरी, बिल-अल्बर्ट बार्न्स और एडम क्लार्क के सार्वजनिक-डायरेक्ट उद्धरणों के छोटे पंक्तियाँ नीचे उद्धृत हैं जब संभव हों:
कई स्थानों पर उन्होंने ईश्वर की पवित्रता, धैर्य और नेतृत्व के महत्व पर बल दिया है कि मानव-निर्णय में नहीं, परमेश्वर के निर्देश पर चलना सच और सुरक्षित मार्ग है। ध्यान दें कि उनीदर्शित उद्धरणों का उपयोग केवल सामान्य सार के लिए है और मूल स्रोत पाठ से संक्षेप में बेमेल उद्धरण हैं।
उद्धरण उदाहरण: “धैर्य मार्ग को खोलता है” (हेनरी के विचारों के सार) और “ईश्वर के बिना कोई देवता नहीं” जैसे विचार उनके कार्यों में बार-बार उभरते हैं; इन पंक्तियों को संपूर्ण प्रसंग में समझना उचित है।
निष्कर्ष
यह घटना यह सिखाती है कि ईश्वर के साथ समय बिताने वाले और उसकी आज्ञाओं के अनुसार चलने वाले लोग ही जीवन की परिक्षाओं में स्थिर रहते हैं। मूसा के विलम्ब को देख कर इस्राइलियों ने जो किया, वह अस्थिरता का एक नमूना है; परन्तु परमेश्वर का धैर्य और वचन ही उनकी वास्तविक सुरक्षा बनती है।