Old Testament
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निर्गमन 36:1 का पार्श्व-पाठ और उसका संगतार्थ
यहोवा ने मसीहियों के निर्माण के लिए यहूदी जाति में वे लोग चुने, जिन्हें पवित्र भवन की सेवा के लिये विशेष ज्ञान और समझ दि़ी गई थी। इस पद में 잠ित शब्द यह दर्शाते हैं कि जिस समय वेतन-व्यवस्था बन रही थी, तब होशियार और बुद्धिमान कर्मियों की एक टोली (बसलेल, ओहोलीआब और अन्य) को यहोवा की आज्ञाओं के अनुसार पवित्रस्थान की सेवकाई के समस्त प्रकार के कार्य करने के लिये चुना गया।
पवित्रस्थापन की सेवकाई के लिये चुने गए
यह पाठ दिखाता है कि परमेश्वर अपनी सेवा के लिये केवल ताकत नहीं देता, बल्कि ऐसी समझ और विवेक भी देता है जो उसे सही त्याग और क्रम से चलाने में मदद करता है। “जो यहोवा ने ऐसी बुद्धि और समझ दी हो” से यह स्पष्ट होता है कि यह ज्ञान, नेतृत्व और कौशल परमेश्वर की कृपा से प्राप्त है, ताकि वे निर्माणकार्य सुव्यवस्थित और पवित्र किया जा सके।
महत्त्वपूर्ण शब्द और भाव छवि
अन्य पवित्रग्रंथ से संबंध
- प्रेरितों के पहले अध्याय में भी यह सिद्धांत दोहराया गया है कि परमेश्वर अपने लोगों के लिये जरूरी कला और समझ देता है ताकि वह कार्य ठीक ढंग से सम्पन्न हो।
- अन्य जगहों पर भी यही विचार मिलता है कि परमेश्वर अपनी सेवा के लिये केवल औजार नहीं देता, बल्कि उनके लिये दिल और मस्तिष्क में ज्ञान भर देता है ताकि कार्य निष्ठा और पवित्रता के साथ किया जाए।
आज के संदर्भ में उपयोगी अनुप्रयोग
संक्षिप्त निष्कर्ष
निर्गमन 36:1 हमें यह याद दिलाता है कि न केवल भवन की भौतिक संरचना, बल्कि उसमें सेवकाई के हर कार्य के लिये परमेश्वर की बुद्धिमत्ता आवश्यक है। जिन लोगों को 특별 ज्ञान मिला, वे उसे पवित्रस्थान के निर्माण के लिए समर्पित कर देते हैं—यह विश्वास, समर्पण और काम के साथ एकता का उद्धार दर्शाता है।
मैथ्यू हेन्री, ऐल्बर्ट बार्न्स और अडम क्लार्क से सम्बद्ध उद्धरण
Matthew Henry के अनुसार यह पाठ यह दर्शाता है कि परमेश्वर अपने लोगों को उनकी सेवा के लिये विशेष आस्तित्व और कौशल देता है, ताकि उसकी पवित्रता प्रकट हो।
Albert Barnes ने कहा कि ऐसे सभी कर्मी जो परमेश्वर की आज्ञाओं के अनुसार चलते हैं, उनके लिए ईश्वरीय मार्गदर्शन स्पष्ट रहता है।
Adam Clarke ने टिप्पणी में संकेत किया कि परमेश्वर की योजना में हर कलाकृति और साज-सज्जा का उद्देश्य पवित्रता और भगवान की महिमा है।
उद्धरण (सार):
“जो यहोवा ने ऐसी बुद्धि और समझ दी हो, कि वे यहोवा की सारी आज्ञाओं के अनुसार पवित्रस्थान की सेवकाई के लिये सब प्रकार का काम करना जानें…”