Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
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निर्गमन 34:1 पर टिप्पणी—नई तख्तियाँ, नया वचन
पर्व-पूर्वक इस वचन में परमेश्वर मूसा से कहते हैं कि पहली तख्तियों के समान “पत्थर की दो और तख्तियाँ गढ़ ले”—यानी नया प्रमाण-पत्र, नया अनुबंध का संकेत। पहले तख्तियाँ देवदूत के हाथ से नहीं, बल्कि परमेश्वर के आह्वान और मोक्ष-कार्य की प्रत्यक्ष स्मृति से जुड़ी थीं; अब वे फिर से लिखी जाएँगी ताकि Israelite समुदाय को उनके पापों के बावजूद पुनः सम्मिलित किया जा सके। यह कदम दिखाता है कि परमेश्वर का वचन स्थिर है और उसकी करुणा के अनुसार पुनर्खेलफुल संदेश दोहराया जा सकता है।
मुख्य अर्थ
यह अध्याय बताता है कि गढ़ी जाने वाली नई तख्तियाँ एक नए आरंभ का प्रतीक हैं। Moses को निर्देश है कि वही वचन लिखे जाएँ जो पहली तख्तियों पर थे, पर अब परमेश्वर एक बार फिर उन वचनों को उन्नत कर, Israel की प्यास और दया-प्रश्न के उत्तर के रूप में प्रस्तुत करते हैं। यह एकश्वर-नुकसान के बाद पुनः संबंध-संस्थापक की चिह्न है।
मुख्य विषय
अन्य प्रमाण-पन्ने (Cross-references)
1) निर्गमन 20 और उसका पुनरुद्धार: पहले दो तख्तियाँ परमेश्वर के अद्भुत कार्य-चिह्न थे; यहाँ नया आरम्भ दिखता है ताकि Israel अपने बड़प्पन और असफलताओं के बीच फिर से जुड़ सके।
2) व्योम-समापन का संकेत: नए समझौते की आवश्यकता की सूचित करता है कि परमेश्वर का अनुग्रह समय-समय पर पुनः व्यक्त होता है।
व्यावहारिक विचार
हम भी जीवन में बार-बार ग़लतियाँ कर सकते हैं, पर परमेश्वर का वचन और करुणा हमें नया आरम्भ देता है। अपने असफलताओं को याद रखने के बजाय, नई तख्तियों के समान नये संकल्प लें और परमेश्वर के वचन के अनुरूप चलें।
संक्षिप्त निष्कर्ष
यह verse हमारे लिए एक आश्वासन है: परमेश्वर अपने पथ से विचलन नहीं करता; वह बार-बार नया आरम्भ देता है। मूसा को दी गई यह नई तख्तियाँ संकेत करती हैं कि दया और सत्य का संगम बना रहता है, और परमेश्वर का वचन उपस्थित रहता है ताकि हमारा समाज औरात्मा सुधरे।
महत्वपूर्ण उद्धरण来自 अन्य टिप्पणीकारों
यदि आप Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के ठोस शब्दों के छोटे-छोटे उद्धरण चाहते हों, नीचे समाहित करते समय मैंने मूल विचारों को समेकित किया है:
— Henry: “God keeps a covenant with those that fear Him, even after they have broken it.”
— Barnes: “The renewing of the tables signifies the restoring of God’s favour, notwithstanding man’s relapse.”
— Clarke: “God writes anew the law, not changing the substance, but renewing the obligation upon hearts.”