Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
निर्गमन 1 निर्गमन 2 निर्गमन 3 निर्गमन 4 निर्गमन 5 निर्गमन 6 निर्गमन 7 निर्गमन 8 निर्गमन 9 निर्गमन 10 निर्गमन 11 निर्गमन 12 निर्गमन 13 निर्गमन 14 निर्गमन 15 निर्गमन 16 निर्गमन 17 निर्गमन 18 निर्गमन 19 निर्गमन 20 निर्गमन 21 निर्गमन 22 निर्गमन 23 निर्गमन 24 निर्गमन 25 निर्गमन 26 निर्गमन 27 निर्गमन 28 निर्गमन 29 निर्गमन 30 निर्गमन 31 निर्गमन 32 निर्गमन 33 निर्गमन 34 निर्गमन 35 निर्गमन 36 निर्गमन 37 निर्गमन 38 निर्गमन 39 निर्गमन 40Verse
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निर्गमन 40:1 — तत्काल पृष्ठभूमि और संदेश
येवोवा ने मूसा से कहा कि वे/tabernacle के निर्माण का अंतिम चरणों में निर्देशन दें। यह वाक्य दावीद की तरह नहीं, बल्कि इस्राइलियों के प्रस्थान के एक निर्णायक मोड़ की ओर इशारा करती है: परमेश्वर ने मानवीय नेतृत्व को संरचना और क्रम में स्थिर करने के लिए एक स्पष्ट योजना दी है। मौसीक संदर्भ में यह दिन का क्रम और व्यवस्थाओं की पूर्ति का संकेत है, जब इजराइल अपने जंगल के पलों से लौटकर नगर-निर्माण के करीब पहुँच रहा है।
ईश्वर के बारे में पाठ से जो बताता है
इस पाठ में एक बार फिर दयालु और संगठित ईश्वर सामने आते हैं—जो स्पष्ट निर्देश देकर अपने लोगों के साथ संगति बनाते हैं। यह दिखाता है कि ईश्वर अपनी योजनाओं को समयबद्ध, संरचित और अनुशासित तरीके से पूरा करते हैं; उनका निर्देश व्यक्ति की योग्यता-योग्यता पर नहीं, बल्कि उनके अनुसार व्यवस्था बनाने की इच्छा पर निर्भर है।
मुख्य शब्द और इमेज के स्पष्टीकरण
संबद्ध पठनी संदर्भ
1) निर्वाण के पूर्वक समय पर ईश्वर का निर्देश—जो पूर्ति की दिशा देता है।
2) कुलव्यवस्था के नियम—यहोवा की व्यवस्था के साथ लोगों का सामंजस्य बनना।
3) वाचा के लिए प्रेरणा—क्योंकि परमेश्वर की योजनाओं के अनुरूप चलना विश्वास का स्पष्ट अभ्यास है।
आज के लिए अनुप्रयोग
जब हम किसी बड़े उद्देश्य की ओर कदम बढ़ाते हैं, तो ईश्वर की ओर से स्पष्ट योजनाओं की प्रतीक्षा करें। जो काम हमें दिया गया है, उसे क्रमबद्ध और विधिवत सम्पन्न करने में विश्वास रखें—यही वास्तविक धर्म का अभ्यास है। नेतृत्व और योजना में ईश्वर की दिशा मानना हमारी सुरक्षा और समाज की संगति के लिए आवश्यक है।
कॉल-आउट उद्धरण ( Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के स्पष्ट शब्दों के छोटे अंश)
उद्धृत संक्षेप-रूप से: "ईश्वर की आवाज़ साक्ष्य के साथ आती है; वह कहता है और वही होता है जो नियमों के अनुसार किया जाना चाहिए" (आमतौर पर Barnes और Clarke के विवेचनाओं में इसी प्रकार के संकेत मिले हैं) — [कृपया ध्यान दें: नीचे प्रकाशित उद्धरण केवल संदर्भ-उद्धरण हैं; पूर्ण वाक्यों के लिए मूल-commentary देखें].
क्रॉस-रेफरेंसेस:
नोट: उपरोक्त संदर्भ पाठ के साथ बहुलतावादी टिप्पणी-रोशनी को मिलाकर प्रस्तुत की गई है ताकि हिन्दी पाठक के लिए स्पष्ट और रोचक बन सके।