Old Testament
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निर्गमन 11:1 पर टिप्पणी — एक सुसंगत अर्थ
इस वाक्य का सीधे अर्थ है: परमेश्वर मूसा से कहता है कि एक और बड़ी विपत्ति मिस्र पर डालेगा, ताकि फरोह और मिस्र तुम्हें जाने दें; और जब वे जाने दें, तब वे तुम्हें ढंग से निकाल देंगे। यह ईश्वरीय निर्णय का अन्तिम चरण है जो एक बड़े उद्धारकार्य की पूर्वसूचना है: मिस्र से निकलना तब होगा जब हर प्रकार के विरोध और दमन को पूर्ण कर दिया जाएगा।
प्रासंगिक संदर्भ और पृष्ठभूमि
यह पाठ निर्गमन की क्रमिक पंक्तियों में ईश्वर के पथ-निर्देशन और मूसा-आनन्दित नेतृत्व की culminant चोटी है। मोशे को मिस्र पर अंतिम विपत्ति की घोषणा करते समय परमेश्वर यह बतला रहा है कि यह अत्याचारों की मानवीय समाप्ति और यहूदियों के निकास की दिशा में निर्णायक कदम है। संदेश में यह स्पष्ट है कि भगवान की योजना में मिस्र के दुःखों के कारणों का न्याय और इस्रएल के उद्धार दोनों जुड़े हैं।
interpretive observations
2-3 स्पष्ट थीमैटिक बिंदु
पारस्परिक संदर्भ (क्रॉस-रेफरेंस) और संक्षिप्त व्याख्या
1) भजन 105:26-38 प्रकार: समान तर्क देता है कि परमेश्वर किस प्रकार संकटों के समय अपने लोगों को उद्धार देता है।
2) निर्गमन 12:31-36: यह मार्गदर्शित चरणों के साथ घर-घर से निर्गमन की व्यवस्था को स्पष्ट करता है—ब्रह्मण में एक स्थाई परिवर्तन।
3) ध्यान दें योबस 2:13-14 जैसे संदर्भ: विश्वासियों के दुःखों के बीच परमेश्वर की वचन-विश्वास और उद्धार-कृत्य कैसे प्रकट होते हैं।
सीधे पाठ से सीखने योग्य छोटे निष्कर्ष
व्यावहारिक takeaway
जब हमें परीक्षा के समय निकलना पड़े, तब भी परमेश्वर की योजना पर भरोसा रखें। कठिनाइयों के बीच भी वह सत्य और उद्धार का मार्ग देता है, और हमारा भाग्य उसी की संरक्षण-योजना के अधीन है।
नोट: नीचे संकलित उद्धरण केवल Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के स्पष्ट उद्धरण-आवद्ध होने पर ही दिया गया है।